नई शिक्षा नीति में आध्यात्म और विज्ञान का अद्भूत समन्वय, यह हमें बना रही आत्मनिर्भरः मंत्री परमार

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नई शिक्षा नीति में आध्यात्म और विज्ञान का अद्भूत समन्वय, यह हमें बना रही आत्मनिर्भरः मंत्री परमार


नई शिक्षा नीति में आध्यात्म और विज्ञान का अद्भूत समन्वय, यह हमें बना रही आत्मनिर्भरः मंत्री परमार


- मंत्री परमार ने एसजीएसआईटीएस परिसर इंदौर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति का अनावरण किया

इंदौर, 05 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार गुणवत्ता, नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति भारतीयता से ओत-प्रोत है, इसमें आध्यात्म और विज्ञान का अद्भूत समन्वय है। यह हमें आत्मनिर्भर बना रही है।

मंत्री परमार बुधवार को इंदौर के एसजीएसआईटीएस कॉलेज में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों हेतु उद्भव-2026 (ज्ञान का संचार) कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। इंदौर का एसजीएसआईटीएस कॉलेज एक ऐसा प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान है, जहाँ के अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने देश-विदेश में इंदौर का मान बढ़ाया है। इस संस्थान में अध्ययन करना स्वयं को गौरवान्वित करना है। आज यहां जो छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे है, वे सौभाग्यशाली हैं।

कार्यक्रम में मंत्री परमार एवं अतिथियों ने एसजीएसआईटीएस परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति का अनावरण किया। इस अवसर पर एसजीएसआईटीएस कॉलेज के पूर्व छात्र पद्मश्री प्रो. डीबी फाटक, खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत राव होलकर तृतीय, सक्सेरिया महाराज के वंशज नंदू सक्सेरिया, एसजीएसआईटीएस के निदेशक नितेश पुरोहित विशेष रूप से उपस्थित थे।

विद्यार्थी राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें और भारत को एक गौरवशाली राष्ट्र बनाएं: परमार

मंत्री परमार ने कहा कि एसजीएसआईटीएस कॉलेज के लिए यह गर्व की बात है कि यह संस्थान अगले वर्ष अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। वर्ष-2047 में भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूर्ण करेगा। यह पीढ़ी वर्ष-2047 में भारत को विकसित भारत के रूप में देखेंगी। उन्होंने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें और एक ऐसा गौरवशाली राष्ट्र बनायें, जिसमें समाज का अंतिम व्यक्ति भी स्वयं खुश समझें।

उन्होंने कहा कि एसजीएसआईटीएस कॉलेज एक ऐसा तकनीकी शिक्षा संस्थान है, जहाँ विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, मर्यादा और जीवन मूल्य भी सिखाये जाते हैं। हमारे विद्यार्थियों को राष्ट्र की समस्याओं का समाधान करना है।

उन्होंने कहा कि भारत में 4 हजार साल पहले इंजीनियरिंग की शिक्षा दी जाती थी, जिसके कई प्रमाण मौजूद है, इस पर हमें गर्व करना चाहिए। हमारे पूर्वजों ने जो ज्ञान दिया है, उसको आज समझने की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश में केवल हिंदी ही नहीं तमिल, तेलुगु, गुजराती, पंजाबी आदि भारतीय भाषाओं में पढ़ाई करायी जाएगी। ताकि यदि कोई विद्यार्थी दूसरे राज्यों में अध्ययन और रोजगार के लिए जाये तो उसे वहाँ असुविधा नहीं हो। भाषाएं राष्ट्र को जोड़ने का कार्य करती है, तोड़ने का नहीं, इसलिए मध्य प्रदेश में सभी भारतीय भाषाओं का अध्ययन करने की व्यवस्था की जा रही है।

कार्यक्रम में उपस्थित खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत राव होलकर तृतीय ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर एक कुशल शासिका थी। उन्होंने अपने शासनकाल में मंदिर, मठ, धर्मशाला, कुएं, बावड़ी आदि कल्याणकारी विकास कार्य किए। आज का इंदौर देवी अहिल्याबाई के ही नाम से जाना जाता है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे मन लगाकर अध्ययन करें और इस संस्थान का नाम पूरी दुनिया में फैलाएं।

पद्मश्री प्रो. डीबी फाटक ने सभी विद्यार्थियों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एसजीएसआईटीएस संस्थान ने देश और दुनिया को ऐसे कई रत्न दिये हैं, जिस पर जितना गर्व करें, उतना कम है। आपको भी उसी श्रेणी में शामिल होना है।

मंत्री परमार ने झाबुआ पोलिटेक्निक कॉलेज के इंटर्नशिप विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उन्हें प्रमाणपत्र वितरित कर सामूहिक चित्र खिंचवायें। कार्यक्रम का संचालन प्रो. निधि ओसवाल ने किया। कार्यक्रम में बताया गया कि एसजीएसआईटीएस में गत वर्ष बी. टेक के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए सामुदायिक पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस पाठ्यक्रम में अध्ययनरत 600 से अधिक विद्यार्थियों ने उन्नत भारत अभियान, शिव-गंगा झाबुआ, सेवा भारती, विज्ञान भारती सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़कर कार्य किया है। संस्थान के 250 विद्यार्थियों ने मध्य प्रदेश के 20 जिलों के 60 गाँवों में 4 दिन रहकर ग्रामीण भारत की जीवनशैली को समझा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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