मप्रः नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 अभियान को प्रदेशभर में मिल रहा जनसमर्थन

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मप्रः नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 अभियान को प्रदेशभर में मिल रहा जनसमर्थन


- स्कूलों, कॉलेजों, हाट-बाजारों, औद्योगिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर लाखों नागरिकों तक पहुँचा नशामुक्ति का संदेश

भोपाल, 22 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में संचालित नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 अभियान के सातवें दिवस पुलिस ने जनभागीदारी के साथ व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रदेश के विभिन्न जिलों में विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, औद्योगिक इकाइयों, धार्मिक स्थलों, हाट-बाजारों, बस स्टैंडों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों से संवाद कर नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी तथा नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया।

पुलिस मुख्यालय द्वारा बुधवार को जानकारी दी गई कि अभियान के अंतर्गत चित्रकला, पोस्टर, स्लोगन, रंगोली एवं निबंध प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों, मानव श्रृंखलाओं, जागरूकता रैलियों, जनसंवाद, शपथ ग्रहण, डिजिटल प्रचार तथा सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया गया।

अभियान के सातवें दिन इंदौर कमिश्नरेट में एक साथ 03 जागरूकता रथ, 25 एलईडी स्क्रीन एवं 60 बड़े बिलबोर्ड के माध्यम से निरंतर नशामुक्ति संदेश प्रसारित किए गए। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पेंटिंग, स्लोगन , रंगोली, कविता, निबंध एवं ओपन माइक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विभिन्न थाना क्षेत्रों, चौराहों , बस्तियों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों से संवाद कर नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। सोशल मीडिया रील्स, पॉडकास्ट तथा मोहल्ला समितियों की बैठकों के माध्यम से अभियान को डिजिटल और सामुदायिक दोनों स्तरों पर प्रभावी बनाया गया।

खंडवा जिले में पुलिस द्वारा 28 विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। शहर में संयुक्त बाइक रैली निकालकर नागरिकों को नशे के विरुद्ध जागरूक किया गया। स्कूलों, छात्रावासों , महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों , बस स्टैंडों तथा ओंकारेश्वर सहित अनेक स्थानों पर जनसंवाद आयोजित हुए।

खरगोन पुलिस ने विद्यालयों में प्रतियोगिताओं के साथ विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को ऑनलाइन नशामुक्ति शपथ दिलाई गई। डायल-112 वाहनों के माध्यम से ऑडियो जिंगल प्रसारित किए गए। नगर निगम की एलईडी स्क्रीन पर लगातार नशामुक्ति संदेश चलाए गए। व्यापारिक संगठनों, वाहन संघों, पत्रकारों , सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर समाज के प्रत्येक वर्ग को अभियान से जोड़ा गया। अस्पतालों, खदान क्षेत्रों तथा सार्वजनिक स्थलों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

अलीराजपुर जिले में स्थानीय आदिवासी संस्कृति को अभियान से जोड़ते हुए हाट-बाजारों में पारंपरिक वेशभूषा एवं स्थानीय बोली में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए। अनूपपुर जिले में विभिन्न स्कूलों एवं महाविद्यालयों में पेंटिंग प्रतियोगिताएं, जागरूकता रैलियां तथा सामूहिक शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। बैंक, बाजार एवं सार्वजनिक स्थलों पर भी नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के संबंध में जागरूक किया गया।

पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन द्वारा एक बेहद अनूठी पहल करते हुए भैरूगढ़ स्थित सेन्ट्रल जेल में जाकर 300 कैदियों को नशे के दुष्परिणामों के संबंध में जानकारी दी गई और उन्हें अपराध व नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित किया गया। आरएपीटीसी इंदौर रामकृष्ण मिशन स्कूल और शास. महारानी लक्ष्मी बाई कन्या पी.जी. महाविद्यालय में पेंटिंग व निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें विजेताओं को मेडल पहनाकर व सर्टिफिकेट देकर प्रोत्साहित किया गया।

अन्य जिलों में भी व्यापक गतिविधियाँ

आगर-मालवा, अशोकनगर, उमरिया, कटनी, विदिशा, इंदौर ग्रामीण सहित प्रदेश के अनेक जिलों में विद्यालयों, ग्राम सभाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, छात्रावासों एवं सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों, अभिभावकों, युवाओं, महिलाओं एवं ग्रामीण नागरिकों को नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी प्रेरित करने का संदेश दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार अपनाते हुए अभियान को प्रभावी बनाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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