मप्रः सुरखी को मिली बड़ी सौगात, 16 करोड़ की लागत से जैसीनगर में बनेगा 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल

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मप्रः सुरखी को मिली बड़ी सौगात, 16 करोड़ की लागत से जैसीनगर में बनेगा 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल


भोपाल, 23 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र की जनता को बेहतर एवं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिली है।

जनसम्पर्क अधिकारी राजेश पाण्डेय ने गुरुवार को बताया कि खाद्य मंत्री मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के सतत प्रयासों, प्रभावी पहल और शासन स्तर पर निरंतर किए गए विशेष फॉलोअप के परिणामस्वरूप राज्य शासन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जैसीनगर का उन्नयन 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल के रूप में करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 16 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

मंत्री राजपूत ने गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों तक भी शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है और सुरखी विधानसभा क्षेत्र को मिली यह सौगात उसी जनकल्याणकारी सोच का परिणाम है।

मंत्री राजपूत ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरी प्राथमिकता हमेशा यह रही है कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय न करना पड़े। इसी उद्देश्य से मैंने जैसीनगर अस्पताल के उन्नयन का विषय लगातार शासन के समक्ष प्रमुखता से रखा। आज सरकार ने इस महत्वपूर्ण मांग को स्वीकार कर क्षेत्र की जनता को बड़ी राहत प्रदान की है।

अब स्थानीय स्तर पर मिलेगा विशेषज्ञ उपचार

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल बनने के बाद जैसीनगर में चिकित्सा विशेषज्ञ, सर्जरी विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, सामान्य शल्य चिकित्सक, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, निश्चेतना विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजी विशेषज्ञ, पैथोलॉजी विशेषज्ञ, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, रेडियोग्राफर, नेत्र सहायक, ओटी तकनीशियन सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों, फ्रैक्चर, हड्डी एवं जोड़ संबंधी ऑपरेशन, जटिल प्रसूति मामलों, नवजात शिशुओं की गंभीर स्थितियों, शिशु रोगों तथा अन्य जटिल शल्य चिकित्सा संबंधी उपचार स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेंगे।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं होंगी और मजबूत

अस्पताल के उन्नयन के बाद सुरक्षित प्रसव, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं का उपचार, परिवार कल्याण सेवाएं, पीपीआईयूसीडी परामर्श, नवजात शिशु देखभाल, जन्म के तुरंत बाद स्तनपान की व्यवस्था, नियमित टीकाकरण, कमजोर एवं बीमार नवजात शिशुओं की समय पर पहचान एवं उपचार जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवाएं पहले से अधिक सुदृढ़ और सुलभ होंगी। इससे मातृ मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के प्रदेश सरकार के लक्ष्य को गति मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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