मप्र विधानसभा में राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 और फायर एंड इमरजेंसी सर्विस बिल, 2026 पारित

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मप्र विधानसभा में राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 और फायर एंड इमरजेंसी सर्विस बिल, 2026 पारित


भोपाल, 21 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 और मध्य प्रदेश फायर एंड इमरजेंसी सर्विस बिल, 2026 भी पारित हो गए हैं। विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और सत्ता पक्ष के बीच फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर तीखी बहस हुई। बाद में विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने के बाद मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई। इस दौरान लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि आज जबलपुर से भोपाल का ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे बनाना है तो 15 हजार करोड़ की आवश्यकता है। ये पैसा कहां से आएगा, क्या जनता पर टैक्स बढ़ाएंगे और बढ़ाएंगे भी तो कितना बढ़ाएंगे? इसीलिए यही तरीका सोचा गया कि जो लोग सुविधा का उपयोग करते हैं और जितने समय के लिए करते हैं, केवल उतने समय उनसे ये शुल्क लिया जाए। इस शुल्क का उपयोग सड़कों के रखरखाव और निर्माण में किया जाएगा।

मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि निर्माण कार्यों और बड़ी परियोजनाओं के लिए फंडिंग और बजट की जरूरत होती है। मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक इसी व्यवस्था के लिए लाया गया है। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि कुछ मार्गों के निर्माण में खर्च राशि, टोल वसूली से भी नहीं मिल पाई। ऐसी सड़कों के मामलों के लिए फंडिंग करने यह विधेयक लाया गया है। राकेश सिंह ने कहा कि नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे एरियल डिस्टेंस के आधार पर बनने चाहिए। सरकार इस मंशा पर काम कर रही है। हम 1851 का आदेश समाप्त कर प्रदेश का कानून बना रहे हैं। ऐसा सॉफ्टवेयर बना रहे हैं, जिससे किसी भी परियोजना के पूरा होने में लगने वाला अधिकतम समय स्पष्ट हो जाएगा। परियोजना के पूरे होने की टाइम लिमिट तय हो जाएगी। उसे बार-बार टाला नहीं जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकास प्रसव की तरह होता है। जिस तरह प्रसव वेदना के बाद सुख मिलता है, उसी तरह विकास के बाद सुख मिलता है।

फायर एंड इमरजेंसी सर्विस बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त फायर स्टेशन नहीं हैं और फायर कर्मियों की भी भारी कमी है। उन्होंने सरकार से पूछा कि वर्तमान में प्रदेश में कितने फायर स्टेशन संचालित हो रहे हैं और पिछले पांच वर्षों में कितने नए फायर स्टेशन खोले गए हैं। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएं।

इस पर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नए कानून से जनहानि और धनहानि दोनों में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण फायर सेफ्टी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की आवश्यकता थी। कई बार इमारतों या चलती गाड़ियों में आग लगने जैसी घटनाएं होती हैं, इसलिए फायर सेफ्टी से जुड़ी विसंगतियों को दूर किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक विशेष फायर सेफ्टी फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसे आधुनिक तकनीक के अनुरूप नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। तकनीकी अधिकारियों की अलग टीम बनाई जाएगी। आग की प्रकृति के अनुसार किस प्रकार के रसायन और संसाधनों का उपयोग किया जाए, इसका भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विजयवर्गीय ने कहा कि कई राज्यों के फायर सेफ्टी कानूनों का अध्ययन करने के बाद यह विधेयक तैयार किया गया है और उनका दावा है कि यह देश के सर्वश्रेष्ठ फायर सेफ्टी कानूनों में शामिल होगा। पूरे प्रदेश की मैपिंग कर यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में नए फायर स्टेशन खोले जाने की आवश्यकता है। यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। साथ ही आधुनिक फायर मशीनें और उपकरण भी खरीदे जाएंगे।

उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने में लगभग छह माह लगेंगे। इसके तहत हर वर्ष थर्ड पार्टी निरीक्षण अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था 24 घंटे और सातों दिन कार्य करेगी। मंत्रालय स्तर पर एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में पूरा प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। फायर सेफ्टी टीम बाढ़ और अन्य आपदाओं में भी राहत एवं बचाव कार्य करेगी।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी तथा सभी के लिए समय-सीमा तय रहेगी। यदि किसी आग की घटना में संबंधित भवन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फायर सेफ्टी से जुड़े अधिकारियों को आवश्यक परिस्थितियों में मजिस्ट्रियल शक्तियां भी दी जाएंगी, ताकि राहत और बचाव कार्य में बाधा बनने वाले अवरोधों को तत्काल हटाया जा सके।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय भवन संहिता और भूमि विकास नियमों के प्रावधानों को भी इस कानून में शामिल किया गया है। अधिकारियों के खिलाफ शिकायत के लिए अपील मंच का भी प्रावधान रहेगा। फायर सेफ्टी व्यवस्था के संचालन के लिए शुल्क और राज्य सरकार के वार्षिक बजट से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

इसी दौरान कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रदर्शन का मुद्दा सदन में उठाया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह राज्य का विषय नहीं है, इसलिए इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण विधेयक भी पारित

विधानसभा में मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) 2026 विधेयक भी पारित हो गया। इससे पहले श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 24 घंटे सातों दिन दुकानें खुली रह सकती हैं, बशर्ते हर 8 घंटे बाद ड्यूटी बदल दी जाए। कोई व्यक्ति चाहे तो सप्ताह में 4 दिन 48 घंटे की ड्यूटी कर सकता है और तीन दिन दूसरे काम भी कर सकता है।

पटेल ने कहा कि अब गिग वर्कर्स को भी श्रम संहिता में जोड़ दिया गया है। महिला सुरक्षा की गारंटी देने के लिए कार्यस्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाएंगे। श्रम न्यायालय तब तक काम करेंगे, जब तक श्रम विभाग में ट्रिब्यूनल नहीं बन जाएगा। इस संहिता में भारत सरकार के सभी नियमों का भी प्रावधान किया गया है ताकि लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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