मप्रः पीजीआई-डी रिपोर्ट पर जीतू पटवारी ने उठाए सवाल

WhatsApp Channel Join Now
मप्रः पीजीआई-डी रिपोर्ट पर जीतू पटवारी ने उठाए सवाल


भोपाल, 29 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ज़िलों के लिए परफ़ॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई-डी) 2025-26 रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर रिपोर्ट में सामने आए जिलावार प्रदर्शन की समीक्षा कराने और कमजोर क्षेत्रों में सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की मांग की है।

जीतू पटवारी के मुताबिक पीजीआई -डी में देश के 784 जिलों की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का 600 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया गया है। इसमें सीखने के नतीजे, शिक्षक, बुनियादी ढांचा, स्कूल सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल लर्निंग और शासन सहित विभिन्न मानकों को शामिल किया गया है। उनका दावा है कि रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश का कोई भी जिला 60 प्रतिशत के प्रदर्शन स्तर को पार नहीं कर सका। प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला 333 अंक यानी 55.5 प्रतिशत के स्तर पर रहा।

भोपाल-इंदौर समेत कई जिलों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

पीसीसी चीफ पटवारी ने रिपोर्ट में दर्ज विभिन्न जिलों के आंकड़ों का हवाला देते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। उनके अनुसार भोपाल में सीखने के परिणाम करीब 47 प्रतिशत और स्कूल सुरक्षा करीब 37 प्रतिशत रहा। इंदौर में स्कूल में सुविधाएं करीब 41 प्रतिशत तथा सीखने के परिणाम करीब 47 प्रतिशत बताया गया है।

इसी तरह सागर में डिजिटल लर्निंग का प्रदर्शन करीब 24 प्रतिशत, बड़वानी में स्कूल सुरक्षा करीब 26 प्रतिशत, सीखने के परिणाम करीब 36 प्रतिशत और डिजिटल लर्निंग करीब 16 प्रतिशत बताया गया। विदिशा में सीखने के परिणाम करीब 41 प्रतिशत, अशोकनगर में स्कूल प्रबंधन करीब 45 प्रतिशत और सीखने के परिणाम करीब 49 प्रतिशत, आगर-मालवा में स्कूल सुरक्षा करीब 34 प्रतिशत और डिजिटल लर्निंग करीब 28 प्रतिशत तथा धार में डिजिटल लर्निंग करीब 20 प्रतिशत और सीखने के परिणाम करीब 42 प्रतिशत रहने का दावा किया गया है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा के दौर में कई जिलों में डिजिटल लर्निंग का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम रहना चिंता का विषय है। सरकार को यह देखना चाहिए कि स्कूलों में डिजिटल संसाधनों, इंटरनेट, स्मार्ट क्लास और शिक्षकों के डिजिटल प्रशिक्षण की स्थिति क्या है।

पटवारी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन केवल योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, स्कूलों की सुविधाओं और सुरक्षित वातावरण जैसे परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए।

पटवारी ने कहा कि प्रदेश के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखते हुए सरकार को रिपोर्ट में सामने आए कमजोर पक्षों पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने सरकार से पीजीआई-डी के जिलावार आंकड़ों पर सार्वजनिक चर्चा कर सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

Share this story