देश और प्रदेश के गांवों की तस्वीर बदल देगी विकसित भारत जी-राम-जी योजनाः कृष्णा गौर

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देश और प्रदेश के गांवों की तस्वीर बदल देगी विकसित भारत जी-राम-जी योजनाः कृष्णा गौर


देश और प्रदेश के गांवों की तस्वीर बदल देगी विकसित भारत जी-राम-जी योजनाः कृष्णा गौर


- मजदूर और किसान दोनों के लिए लाभकारी है यह योजना, इसमें मजदूरों को 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटीः प्रभारी मंत्री

सीहोर, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की पिछड़ा वर्ग एवं सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि विकसित भारत- जीरामजी योजना केवल रोजगार का वादा नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका की गारंटी है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत करेगी। गरीब, जनजाति और पिछड़ा वर्ग को रोजगार मिले, उसके लिए यह कानून आया है। यह योजना देश और प्रदेश के गांवों की तस्वीर बदल देगी।

प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर सोमवार को सीहोर में आयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्र सरकार द्वारा लाई गई नवीन योजना विकसित भारत-जीरामजी योजना से ग्रामीण जीवन में आने वाले क्रांतिकारी बदलावों के संबंध जानकारी दे रही थीं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। इस कानून में पुराने प्रावधानों को संशोधित करते हुए गांवों को अधिक अधिकार और स्वायत्तता दी गई है।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक वस्तुतः भारत के ग्रामीण अंचलों के समग्र विकास की दिशा में एक ठोस कदम है। भ्रष्टाचार-मुक्त ग्राम पंचायत, सुशासन और जनभागीदारी इसके प्रमुख उद्देश्य हैं। इस योजना से आत्मनिर्भर और सशक्त गांवों का निर्माण संभव होगा। इस योजना से गांवों के विकास को भी मजबूती मिलेगी। प्रभारी मंत्री ने कहा कि पहले किसानों को कृषि से जुड़े कामों के लिए श्रमिक ही नहीं मिलते थे, पर विकसित भारत जी-राम-जी योजना में कृषि के व्यस्ततम समय विशेषकर बुवाई और कटाई के समय पर्याप्त मात्रा में कृषि श्रमिकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इस अधिनियम में राज्यों को एक वित्त वर्ष में कुल 60 दिन की अवधि अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है। बीज बुवाई एवं फसल कटाई की व्यस्ततम समयावधि को भी रोजगार उपलब्ध कराने की अवधि में शामिल किया जा सकेगा। प्रावधान के अनुसार इस अवधि में अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित अन्य कार्य नहीं किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केन्द्र सरकार तय मानकों के आधार पर देश के हर राज्य को एक निश्चित राशि भी देगी। अधिनियम में ग्रामीण आजीविका निर्माण के स्थाई स्रोत विकसित करने पर जोर दिया गया है। इससे ग्रामीणों के देशज ज्ञान, कौशल, उद्यमिता और उनमें निहित कला प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

मंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि इस अधिनियम में बेरोजगारी भत्ता और विलम्बित मजदूरी देने का प्रावधान भी रखा गया है। इसके तहत यदि किसी ग्रामीण परिवार को उसके मांग करने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर काम नहीं दिया जाता है तो राज्य सरकार तय की गई दरों एवं शर्तों के अनुसार संबंधित मांगकर्ता परिवार को बेरोजगारी भत्ता देने के लिए भी बाध्य होगी। इसी तरह काम पूरा कर लेने के बाद भी यदि किसी कारणवश मजदूर को उसकी निर्धारित मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है, तो मुआवजे के तहत उसे विलम्बित मजदूरी के रूप में अतिरिक्त राशि देने का प्रावधान भी इस अधिनियम में है। हितग्राही मूलक रोजगार कार्यों के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, गैर अधिसूचित जनजातियां, खानाबदोश, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, भूमि सुधार के हितग्राही, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं वन अधिकार अधिनियम के हितग्राही, छोटे और सीमांत किसानों को इस अधिनियम में प्राथमिकता दी जायेगी।

उन्होंने बताया कि अधिनियम में पंचायती राज संस्थाओं–ग्रामसभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य रोजगार गारंटी परिषद को भी स्पष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं। अधिनियम में विकसित भारत जी-राम-जी स्कीम में शुरू किए गए निर्माण कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा नियोजित किए गए सभी मजदूरों को तेजी से समुचित भुगतान देने के लिए डिजिटल तथा बायोमैट्रिक भुगतान प्रणाली और ग्राम सभा द्वारा सोशल ऑडिट द्वारा योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिनियम में पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न स्तरों पर एक समयबद्ध एवं शिकायत निवारण तंत्र तथा कुछ दंडात्मक प्रावधान भी किए गए हैं। इसके लिए शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता और इसकी मॉनिटरिंग के लिए शिकायत प्रबंधन सूचना प्रणाली की डिजिटल व्यवस्था स्थापित की जाएगी।

प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर बताया कि इस योजना में ग्रामीण परिवार को 100 के स्थान पर 125 दिन के अकुशल श्रम दिवस के रोजगार की गारंटी होगी। वन क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति परिवारों को 25 दिवस का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। योजना अंतर्गत जल संरक्षण संवर्धन के कार्य, आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचे के कार्य का कोर, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास कार्य, मौसमी घटनाओं से निपटने के लिये कार्य, बेहतर भुगतान व्यवस्था (वर्तमान के 15 दिवस के स्थान पर 7 दिवस में मजदूरों को भुगतान) पारदर्शिता एवं जवाबदेही, बायोमेट्रिक हाजिरी, तकनीकी का बेहतर उपयोग, रियल टाइम डाटा अपडेट, मोबाइल मॉनिटरिंग एवं जीपीएस तकनीकी का उपयोग पर बल दिया गया है।

उन्होंने कहा कि योजना को पीएम गति शक्ति के साथ जोड़ा गया है और विकास कार्यों की आवश्यकता के अनुरूप पंचायतों को तीन श्रेणी A,B,C में वर्गीकरण की व्यवस्था की गई है। कटाई एवं बुवाई के समय मे 60 दिवस श्रमिकों को रोजगार नहीं दिए जाने की व्यवस्था है ताकि कृषि कार्य हेतु किसानों को मजदूर उपलब्ध हो सकें। केन्द्र: राज्य का अनुपात 60:40 के अनुपात में रखा गया है। बेहतर मॉनिटरिंग के लिए प्रशासनिक व्यय को 6% से बढाकर 9% किया गया है। बजट आबंटन में वृद्धि करते हुए वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए मनरेगा में 86000 करोड़ के स्थान पर इस योजना में 1.51 लाख करोड़ का केंद्र सरकार ने प्रावधान किया गया है। मजदूरों को विलम्ब से भुगतान किये जाने पर विलंबित क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।

पत्रकार वार्ता में सीहोर विधायक सुदेश राय, भाजपा जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष रचना सुरेन्द्र मेवाड़ा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिस राठौर, राजकुमार गुप्ता तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारगण उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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