जबलपुरः 10 दिवसीय चंदेरी-महेश्वरी उत्सव में विरासत, हस्तकला और फैशन का संगम

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जबलपुरः 10 दिवसीय चंदेरी-महेश्वरी उत्सव में विरासत, हस्तकला और फैशन का संगम


- चार से 80 हजार रुपये तक की साड़ियों की प्रदर्शनी- कोसा वस्त्र, लेदर पर्स और स्टोन ज्वेलरी भी आकर्षण का केंद्र

जबलपुर, 06 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में संत रविदास मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम मर्यादित की ओर से होटल कलचुरी में 4 जून से 14 जून तक 10 दिवसीय चंदेरी-महेश्वरी उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश की पारंपरिक हस्तकरघा और हस्तशिल्प कला का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

यहां चंदेरी, महेश्वरी और कोसा साड़ियों के साथ-साथ कोसा फैब्रिक, ओरिजिनल लेदर पर्स तथा स्टोन वर्क ज्वेलरी भी प्रदर्शित की गई है। साड़ियों की कीमत लगभग 4 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक है। विरासत की बुनाई से सजी चंदेरी साड़ियां चंदेरी साड़ियां अपनी बारीक बुनाई, शाही लुक और पारंपरिक हस्तकला के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। विशेष रूप से हैंडवर्क वाली चंदेरी साड़ियों की पहचान उनके अनूठे जरी कार्य से होती है।

प्रदर्शनी में 4 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक की चंदेरी साड़ियां उपलब्ध हैं। कारीगरों के अनुसार चंदेरी की असली पहचान उसके हाथ से किए गए बुनाई कार्य में छिपी होती है। वर्ष 1930 के दौर में जरी को माचिस की तीली पर लपेटकर बुनाई की जाती थी और आज भी कई शिल्पकार उसी पारंपरिक तकनीक को जीवित रखे हुए हैं। इस तकनीक में डिजाइन को बुनाई के दौरान ही तैयार किया जाता है, जिससे साड़ी के पीछे कटिंग या अतिरिक्त धागे नहीं दिखाई देते।

हैंडवर्क चंदेरी साड़ियों की विशेषता यह है कि इनमें किया गया जरी कार्य न तो चुभता है और न ही आसानी से निकलता है। पूरा डिजाइन वीविंग तकनीक से तैयार किया जाता है, जिससे साड़ी की मजबूती और सुंदरता दोनों बनी रहती हैं। हल्के और मुलायम कपड़े के कारण ये साड़ियां गर्मी और सर्दी दोनों मौसमों में आरामदायक मानी जाती हैं।

महेश्वरी साड़ियों में परंपरा और उत्कृष्ट शिल्पकला

महेश्वरी साड़ियां अपनी सुंदरता, हल्के वजन और आकर्षक डिजाइनों के लिए विशेष पहचान रखती हैं। ये साड़ियां सिल्क, सिल्क-कॉटन और टिश्यू फैब्रिक में तैयार की जाती हैं। प्रदर्शनी में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार द्वारा निर्मित विशेष महेश्वरी सिल्क साड़ी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस साड़ी का पल्लू पूरी तरह रेशम के धागों से बुना गया है। महेश्वरी साड़ियों में अधिकतर प्लेन और बुटीदार डिज़ाइन देखने को मिलते हैं। एक सिल्क-कॉटन साड़ी को तैयार करने में लगभग चार से पांच दिन लगते हैं, जबकि शुद्ध सिल्क साड़ी की बुनाई में 15 से 20 दिन से लेकर एक माह तक का समय लग सकता है।

महेश्वरी साड़ियों की कीमत 4 हजार रुपये से शुरू होकर 25 हजार रुपये या उससे अधिक तक है। इनकी एक प्रमुख पहचान उच्च गुणवत्ता वाली प्राकृतिक जरी है, जो समय के साथ काली नहीं पड़ती। शिल्पकारों के अनुसार इस जरी की कीमत 30 से 40 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है।

कोसा वस्त्रों में परंपरा और आधुनिकता का संगम

प्रदर्शनी में कोसा साड़ियों के साथ-साथ कोसा फैब्रिक भी उपलब्ध है, जिससे कुर्ता, जैकेट और मोदी जैकेट जैसे परिधान तैयार किए जा सकते हैं। कोसा वस्त्र अपनी प्राकृतिक चमक, आरामदायक बनावट और आकर्षक डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां अजरक प्रिंट की कोसा साड़ियों के अलावा वारसोनी की कोसा साड़ियां भी उपलब्ध हैं, जिन्हें भारत सरकार द्वारा जीआई टैग प्राप्त है। ये साड़ियां पारंपरिक बुनाई और उत्कृष्ट शिल्पकला का बेहतरीन उदाहरण हैं। कोसा साड़ियों की कीमत 3,500 रुपये से शुरू होकर 15 से 20 हजार रुपये तक है।

स्टोन ज्वेलरी और लेदर पर्स भी आकर्षण का केंद्र

प्रदर्शनी में पत्थरों से निर्मित स्टोन वर्क ज्वेलरी भी प्रदर्शित की गई है। क्वार्ट्ज, मार्बल और सनस्टोन से बने नेकलेस, ईयररिंग्स, ब्रासलेट और अन्य आभूषण पर्यटकों और ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। इनकी कीमत लगभग 1,500 रुपये से 9,500 रुपये तक है। इसके अलावा विभिन्न डिजाइनों और रंगों में उपलब्ध ओरिजिनल लेदर पर्स भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण हैं। यह 10 दिवसीय उत्सव न केवल खरीदारी का अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश की समृद्ध हथकरघा, हस्तशिल्प और पारंपरिक बुनाई कला को करीब से जानने और समझने का भी एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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