मप्रः मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतर्विभागीय समिति का गठन
भोपाल, 21 सितम्बर (हि.स.)। भारत सरकार द्वारा अधिसूचित इनलैंड वेसल्स एक्ट के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन, राज्य में अंतर्देशीय जल परिवहन एवं जल पर्यटन गतिविधियों के सुव्यवस्थित विकास तथा संबंधित प्रशासनिक, तकनीकी एवं विधिक व्यवस्थाओं के परीक्षण के लिए राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतर्विभागीय समिति का गठन किया है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सोमवार को जारी आदेश अनुसार समिति में सचिव वित्त, परिवहन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण,विधि एवं विधायी कार्य विभाग एवं प्रबंध संचालक म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम सदस्य होंगे। भार-साधक सचिव पर्यटन विभाग को सदस्य-सचिव बनाया गया है। प्रतिनिधि इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया को विशेष आमंत्रित सदस्य नामित किया गया है।
विशेषज्ञ एवं सलाहकारों को आवश्यकतानुसार बैठक में आमंत्रित किया जा सकेगा। अंतर्विभागीय समिति भूमिकाओं एवं दायित्वों के अंतर्गत मध्यप्रदेश में इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी एवं विधिक व्यवस्थाओं का परीक्षण एवं अनुशंसा करना, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के प्रस्ताव पर राज्य स्तर पर नियम (स्टेट रूल्स) निर्माण की आवश्यकता एवं उनके प्रारूप अनुशंसा, पृथक मध्यप्रदेश अंतर्देशीय जल परिवहन अधिनियम के निर्माण की व्यवहार्यता का परीक्षण, अन्य राज्यों में प्रचलित प्राधिकरणों का अध्ययन कर राज्य के लिए उपयुक्त संस्थागत ढांचा प्रस्तावित एवं अंतर्देशीय जल परिवहन एवं जल पर्यटन के समेकित विकास के लिए संस्थागत व्यवस्था का सुझाव संबंधी दायित्वों का निर्वहन करेगी। समिति निर्धारित समयावधि में अपनी संस्तुतियों सहित अंतिम प्रतिवेदन राज्य शासन को प्रस्तुत करेगी।
राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति गठित
वहीं, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय अनुसार ओपन करेक्शनल इंस्टीटयूशन्स के प्रबंधन के लिए राज्य शासन द्वारा राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सोमवार को जारी आदेश अनुसार समिति में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके द्वारा नामांकित प्रतिनिधि (जिसमें उच्च न्यायालय के पूर्ववर्ती न्यायाधीश भी शामिल हैं) अध्यक्ष होंगे। भार-साधक सचिव/अतिरिक्त सचिव जेल विभाग एवं महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं म.प्र.को सदस्य मनोनीत किया गया है।
अनुश्रवण समिति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना, खुली सुधारात्मक संस्थाओं का उपयोग, संचालन एवं विस्तार की निगरानी करना, बंद कारागारों से पात्र बंदियों की समय पर पहचान कर उन्हे खुली सुधारात्मक संस्थाओं में स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के क्रियान्वयन की प्रगति का समय-समय पर पुनरावलोकन तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली प्रणालीगत बाधाओं का निराकरण करना,उच्च न्यायालय को त्रैमासिक रूप से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदाय निर्देशों के अनुपालन, खुली सुधारात्मक संस्था की उपयोग एवं विस्तार और न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन में आ रही समस्या के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 26 फरवरी 2026 को पारित आदेश अनुसार अपेक्षित अन्य समस्त कार्यवाही जैसे कार्यों का संपादन करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

