दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना सरकार की प्राथमिकताः मंत्री कुशवाह

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दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना सरकार की प्राथमिकताः मंत्री कुशवाह


- राज्य स्तरीय दिव्यांगन सलाहकार बोर्ड की बैठक सम्पन्न

भोपाल, 30 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है।

मंत्री कुशवार को सोमवार को सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण संचालनालय में आयोजित राज्य स्तरीय दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार विमर्श और राज्य में संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य स्तरीय दिव्यांगन सलाहकार बोर्ड का गठन किया गया है। बैठक में विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली पोंक्षे वायंगणकर, निःशक्तजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।

बैठक में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष सहायता निधि स्थापित करने और उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही राज्य दिव्यांग खेल प्राधिकरण के गठन पर भी विचार किया गया, जिससे खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिल सके। ग्वालियर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांग खेल प्रशिक्षण केंद्र के उपयोग में राज्य को अधिक अधिकार देने तथा दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट मैदान विकसित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने पर सहमति बनी।

दिव्यांगजनों की स्वास्थ्य एवं पहचान संबंधी सुविधाओं को सरल बनाने के लिए UDID कार्ड के साथ ही आयुष्मान कार्ड जारी करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही UDID कार्ड निर्माण हेतु निजी अस्पतालों एवं चिकित्सकों को अधिकृत करने और मनरेगा में कार्यरत परिजनों की मजदूरी प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष प्रावधान करने पर भी चर्चा हुई।

प्रत्येक जिले में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिससे दिव्यांगजनों की विभिन्न समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर हो सके। साथ ही जिला स्तर पर दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के गठन तथा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत लोकल लेवल कमेटी की बैठक हर तीन माह में आयोजित करने पर जोर दिया गया। बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए लीगल गार्जियनशिप प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा “घरौंदा योजना” के अंतर्गत प्रत्येक जिले में केंद्र स्थापित करने पर विचार किया गया।

दिव्यांगजनों के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए NHFDC के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने तथा संबंधित बैंकों को योजनाओं की जानकारी से अवगत कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक जिला मुख्यालय में दिव्यांगजनों के लिए दुकानों का आरक्षण और कैंटीन/व्यवसाय से जुड़े विज्ञापनों की जानकारी सभी स्वैच्छिक संस्थाओं तक पहुंचाने पर भी बल दिया गया।

सार्वजनिक भवनों की सुगम्यता सुनिश्चित करने के लिए एक्सेस ऑडिट कराने और विशेष सोशल ऑडिट टीम के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया। भोपाल के वॉटर स्पोर्ट्स पार्क सहित अन्य स्टेडियमों में दिव्यांगजनों के लिए वॉटर स्पोर्ट्स की व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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