निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश, गुणवत्ता से समझौता नहीं: सम्पतिया उइके

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निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश, गुणवत्ता से समझौता नहीं: सम्पतिया उइके


- पीएचई मंत्री ने की मंडला जिले के निर्माण कार्यों की समीक्षा

मंडला, 17 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके ने शुक्रवार को मंडला जिले में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि कई निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन कार्यों की समय-सीमा पूर्ण हो चुकी है, उन्हें प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण किया जाए।

जिला योजना भवन में हुई समीक्षा बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, नगर पालिका नैनपुर की अध्यक्ष कृष्णा पंजवानी, जिला पंचायत सदस्य शैलेष मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे, डीएफओ प्रीता एसएम, डीएफओ एमएस मौर्य, अपर कलेक्टर राजेंद्र कुमार सिंह, जिला पंचायत सीईओ शाश्वत सिंह मीना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री संपतिया उइके ने जनजातीय कार्य विभाग एवं ईई आरईएस विभाग क्रमांक 1 व 2 के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जिस समय सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण होने थे वह समयावधि से अधिक है। उन्होंने निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए। बैठक में विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा लंबित कार्यों की समीक्षा कर उन्हें शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने पूर्व में स्वीकृत कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की और जहां कार्य लंबित हैं, वहां आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा जनप्रतिनिधियों से समन्वय बनाकर कार्यों को गति देने पर भी जोर दिया। साथ ही कहा कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लोकार्पण किया जाए।

पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने कहा कि जलापूर्ति एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है। इसके लिए अमृत सरोवर, खेत तालाब, चैकडेम, स्टॉपडेम आदि जल संरचनाओं का निर्माण बेहद जरूरी है जो जल स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा।

बैठक में मंत्री संपतिया उइके ने निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में वन समितियों के माध्यम से जल संरक्षण के कार्यों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही, जल स्रोतों की नियमित निगरानी एवं संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। जिले के क्षेत्रों में दोना पत्तल वन उत्पाद के द्वारा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की जरूरत है। इसके लिए अभी से ऐसे स्थानों का चयन करें जहां दोनापत्तल का कार्य आर्थिक गतिविधि के रूप में बेहतर तरीके से किया जा सकता है। डीएफओ पूर्व एवं पश्चित द्वारा बैठक में अवगत कराया गया कि ग्राम स्तर पर लगातार प्रचार-प्रसार कर आवश्यक जानकारी दी जा रही है कि जंगल में महुआ बीनने लोग अकेले न जाएं। गर्मी के मौसम में वनाग्नि की घटनाएं आमतौर पर अधिक होती है।

मंत्री संपतिया उइके ने कहा कि बरसात के मौसम के पूर्व वृहद स्तर पर पौधारोपण करने की कार्ययोजना पहले से ही तैयार कर ली जाए। इसके तहत जिन पौधों को रोपित करना है उसकी उपलब्धता भी सुनिश्चित कर लें। छायादार एवं फलदार वृक्षों को इसमें शामिल करें। ऐसे निर्माण कार्य जो वन विभाग की भूमि के अंतर्गत आने से पेंडिंग है उसकी भी जानकारी प्रदान करें। जिससे कि आवश्यक समाधान निकालकर निर्माण कार्य पूरे किए जा सकें। शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित ऐसे भवनविहीन शालाओं की सूची तैयार करें। किसी भी स्थिति में विद्यालय का संचालन जीर्णशीर्ण भवनों में न हो इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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