मप्रः त्यौहारों पर आतिशबाजी से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर स्वास्थ्य संस्थाओं को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश
- कलेक्टर्स बर्न वार्ड एवं बर्न यूनिट की तैयारियों का निरीक्षण कर नियमित करें मॉनिटरिंग
भोपाल, 03 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार सभी जिला कलेक्टर्स शासकीय जिला चिकित्सालयों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों में संचालित बर्न वार्ड एवं बर्न यूनिट का निरीक्षण करने एवं उन्हें उपचार के लिए पूर्णतः क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बर्न वार्ड में आवश्यक बेड, दवाएं, चिकित्सा सामग्री, उपकरण एवं मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए नियमित मॉनिटरिंग की जाए। निजी एवं शासकीय चिकित्सालयों एवं मेडिकल कॉलेजों में प्रतिदिन भर्ती बर्न इंजरी के मरीजों की स्थिति की समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत पटाखों एवं आतिशबाजी से होने वाली बर्न इंजरी तथा अन्य दुर्घटनाओं के प्रभावी उपचार एवं रोकथाम के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के समस्त शासकीय चिकित्सालयों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों को विशेष तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने मंगलवार को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं।
24x7 चिकित्सकीय सेवाएं एवं आवश्यक संसाधन रहें उपलब्ध
जारी निर्देशों के अनुसार, सभी चिकित्सालयों में 24 घंटे चिकित्सकों, नर्सिंग ऑफिसर्स एवं पैरामेडिकल स्टॉफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बर्न इंजरी, आंखों की चोट, हाथ-पैर की चोट, कानों को नुकसान तथा पटाखों के धुएं से होने वाली श्वसन संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए आवश्यक दवाएं, चिकित्सा सामग्री एवं जांच उपकरण उपलब्ध रखे जाएं। सामान्य मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज किया जाए तथा गंभीर मरीजों के लिए उनकी स्थिति के अनुरूप उपचार की कार्ययोजना तैयार की जाए।
कार्बाइड गन से होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति रखें विशेष सतर्कता
अवैध रूप से निर्मित कार्बाइड गन के उपयोग से होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके विस्फोट से प्लास्टिक एवं धातु के छोटे कण आंख, चेहरे और त्वचा को गंभीर रूप से घायल कर सकते हैं। एसीटिलीन गैस से जलने की घटनाएं भी हो सकती हैं। विशेषकर बच्चों एवं किशोरों में पलक, कंजंक्टाइवा एवं कॉर्निया को क्षति तथा स्थायी दृष्टिहानि का खतरा रहता है। आमजन को कार्बाइड गन एवं असुरक्षित आतिशबाजी के उपयोग से बचने के लिए जागरूक किया जाए।
रेफरल एवं एम्बुलेंस व्यवस्था की विशेष तैयारी
गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने से पहले प्राथमिक उपचार देकर स्थिर किया जाए। रेफरल नोट में दिए गए उपचार, जांच एवं आगे आवश्यक उपचार का पूरा विवरण दर्ज किया जाए तथा संबंधित अस्पताल को पूर्व सूचना दी जाए। रेफर मरीजों के उपचार का निरंतर फॉलोअप भी लिया जाए। अस्पतालों में आकस्मिक ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों, एम्बुलेंस चालकों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ के नाम और मोबाइल नंबर प्रदर्शित किए जाएं। 108 एम्बुलेंस को ऑक्सीजन एवं आवश्यक उपकरणों सहित पूरी तरह क्रियाशील रखा जाए। आवश्यकता होने पर जिला कलेक्टर के अनुमोदन से मरीजों को दूसरे जिले अथवा अन्य राज्य में भी भेजा जा सकेगा। अति गंभीर मरीजों के परिवहन के लिए नियमानुसार एयर एम्बुलेंस की सुविधा का भी उपयोग किया जाए।
आंखों की चोट में त्वरित प्राथमिक उपचार की सलाह एवं विशेषज्ञ को रेफरल
पटाखों से आंख में चिंगारी, बारूद, रासायनिक पदार्थ अथवा धातु एवं प्लास्टिक के कण जाने पर आंख को नहीं मलने, बाहरी वस्तु स्वयं निकालने या बिना चिकित्सकीय सलाह आई ड्रॉप डालने से बचने की सलाह दी गई है। रासायनिक पदार्थ जाने पर आंख को 15 से 20 मिनट तक साफ पानी अथवा नॉर्मल सलाइन से धोकर हल्के से स्टेराइल गॉज से ढकें तथा तत्काल नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। आंख पर दबाव न डालें। कॉर्नियल बर्न, आंख में बाहरी वस्तु अथवा गंभीर क्षति की स्थिति में विशेषज्ञ जांच एवं आवश्यकतानुसार स्लिट लैम्प, एक्स-रे अथवा सीटी स्कैन की व्यवस्था की जाए। गंभीर नेत्र चोट वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल निकटतम शासकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

