इंदौर ने टीबी निदान में हासिल की बड़ी उपलब्धि, आईआरएल को मिला नई टीबी दवाओं की जाँच के लिए राष्ट्रीय प्रमाणन
- टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्य प्रदेश निभाएगा अग्रणी भूमिकाः उप मुख्यमंत्री शुक्ल
इंदौर, 10 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर ने क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत मनोरमा राजे टीबी अस्पताल में स्थित राज्य स्तरीय इंटरमीडिएट रिफरेंस लेबोरेटरीज (आईआरएल) को नई एवं अत्यंत महत्वपूर्ण टीबी दवाओं बेडाक्विलिन (बीडीक्यू) और प्रेटोमैनिड (पीटीएम) के लिए लिक्विड कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (एलसी डीएसटी) करने का राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
यह प्रमाणन सुप्रा नेशनल रेफरेंस लेबोरेटरी (एसएनआरएल), एनआईआरटी चेन्नई एवं केंद्रीय क्षय प्रभाग (सीटीडी) द्वारा प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आईआरएल की टीम को बधाई दी है। उन्होंने शनिवार को अपने बयान में कहा है कि मध्य प्रदेश ने टीबी के विरुद्ध लड़ाई में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की टीबी दवाओं की जांच के लिए राष्ट्रीय प्रमाणन मिलना हमारे स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता, वैज्ञानिक दक्षता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों को समय पर सटीक उपचार मिलेगा और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्य प्रदेश अग्रणी भूमिका निभाएगा।
उल्लेखनीय है कि यह प्रयोगशाला देश की उन शुरुआती 15 प्रयोगशालाओं में शामिल हो गई हैं, जहां यह अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण जाँच संभव हो पाई है। यह परीक्षण केवल बायोसेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशालाओं में ही किया जा सकता है। इससे पूर्व पूरे देश में केवल एनआईआरटी चेन्नई ही इस परीक्षण के लिए प्रमाणित था, जिसके कारण राष्ट्रीय स्तर पर मरीजों की आवश्यकता को पूरा करना व्यवहारिक रूप से कठिन था।
अस्पताल के इंचार्ज डॉ. शैलेन्द्र जैन ने कहा कि इंदौर को नई पीढ़ी की टीबी दवाओं की जांच के लिए राष्ट्रीय प्रमाणन मिलना, हमारे स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता, वैज्ञानिक दक्षता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों को समय पर सटीक उपचार मिलेगा और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्य प्रदेश अग्रणी भूमिका निभाएगा। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में डॉ. नितिन कुमार डोशी का उल्लेखनीय योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रमाणन के माध्यम से अब इंदौर में ही माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस पर बीडीक्यू एवं पीटीएम दवाओं की प्रभावशीलता की सटीक जाँच संभव होगी। इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों के उपचार में समय पर सही दवा व्यवस्था तय की जा सकेगी, उपचार परिणाम बेहतर होंगे तथा दवा प्रतिरोध के फैलाव को रोकने में भी मदद मिलेगी। नई बी-पाल उपचार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ इस प्रयोगशाला का प्रमाणन टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाएगा तथा मरीजों को आधुनिक, सटीक एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

