मप्र के इंदौर अग्नि हादसे में बिजली कंपनी का दावा, ओवर चार्जिंग से बम की तरह फटी थी ईवी की बैटरी

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मप्र के इंदौर अग्नि हादसे में बिजली कंपनी का दावा, ओवर चार्जिंग से बम की तरह फटी थी ईवी की बैटरी


मप्र के इंदौर अग्नि हादसे में बिजली कंपनी का दावा, ओवर चार्जिंग से बम की तरह फटी थी ईवी की बैटरी


- गर्भवती महिला सहित आठ लोगों की जिंदा जलकर हो गई थी मौत

इंदौर, 21 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में गत दिनों इलेक्ट्रिक कार (ईवी) से हुए अग्नि हादसे को लेकर बिजली कंपनी ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। हालांकि, इसे अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आग की शुरुआत घर में लगे ईवी चार्जिंग पॉइंट से हुई थी।

बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच में सामने आया है कि ओवरचार्जिंग के कारण इलेक्ट्रिक कार की बैटरी बम की तरह फट गई। घटना के समय कार चार्जिंग पर लगी हुई थी, जिसकी पुष्टि स्मार्ट मीटर के डिजिटल डेटा से हुई है। कंपनी ने पिछले तीन महीनों का मिनट-टू-मिनट डेटा निकालकर यह रिपोर्ट तैयार की है।

बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री डीके तिवारी, फायर सेफ्टी विशेषज्ञ विद्या फूलमानी, उपमन्यु साहू और टीआई मनीष लोधा की टीम ने जांच के बाद उक्त रिपोर्ट तैयार की है। अधिकारियों के मुताबिक, कार रोज रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक चार्जिंग पर रहती थी। हादसे वाली रात भी यही क्रम रहा। बताया गया कि तड़के चार्जिंग के दौरान कार में पावर ऑटो कट-ऑफ हुआ, लेकिन करीब आधे घंटे बाद फिर से चार्जिंग शुरू हो गई। इसके बाद जोरदार ब्लास्ट हो गया।

गौरतलब है कि इंदौर में बंगाली चौराहे के पास ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर बुधवार तड़के अग्नि हादसा हुआ था। उनकी इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच में चार्जिंग के दौरान आग लग गई थी, जिसने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हुए थे।

पुलिस के अनुसार, आग ने घर के अंदर रखे गैस सिलेंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। इससे एक के बाद एक सिलेंडर फटने लगे। धमाका इतना तेज था कि मकान का एक हिस्सा ढह गया। घर में लगे डिजिटल लॉक खुल नहीं पाए, इसके कारण अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।

बिजली कंपनी की रिपोर्ट में बताया गया है कि हादसे वाली रात एमपी 09 डीक्यू 0509 नंबर की इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मनोज पुगलिया के घर पर 15 किलोवॉट का स्वीकृत लोड था। एसी, पंखे और फ्रिज की सामान्य खपत के बाद जैसे ही कार चार्जिंग शुरू होती थी, कुल बिजली लोड 2 किलोवॉट से बढ़कर करीब 9 किलोवॉट तक पहुंच जाता था। कंपनी के मुताबिक, स्मार्ट मीटर हर 15 मिनट में बिजली खपत की पूरी जानकारी कंट्रोल रूम तक ऑनलाइन भेजता रहा। जांच के दौरान पिछले तीन महीनों की खपत का विस्तृत डेटा देखा गया। साथ ही, मीटर रीडर इंस्ट्रूमेंट (एमआरआई) के जरिए मिनट-टू-मिनट डेटा का भी मिलान किया गया।

बिजली कंपनी की जांच में तकनीकी तथ्यों के अलावा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी शामिल हैं। मनोज पुगलिया के जिस बंगले में आग लगी थी, उसमें सोलर सिस्टम लगा हुआ था। इस कारण उनके घर में विशेष प्रकार का मीटर लगा हुआ था, जिसमें पल-पल का डेटा सुरक्षित रहता है। बिजली कंपनी ने उस डेटा का विश्लेषण कर पता लगाया कि जिस समय हादसा हुआ, तब घर का कुल लोड 9 किलोवाट तक पहुंचा था। रात तीन बजे के बाद चार्जिंग होने पर ऑटो कट-ऑफ हुआ था। फिर साढ़े तीन बजे सप्लाई शुरू हुई और फिर शॉर्ट सर्किट के बाद आग कार की बैटरी तक पहुंची। बैटरी के विस्फोट के बाद आग अचानक भड़की और पोल के समीप लगे वायर जलने लगे। इसके बाद आग आंगन में खड़ी बाइकों तक पहुंची और फिर घर के अगले हिस्से को चपेट में ले लिया। इस घटना के बाद कार की कंपनी ने भी विशेषज्ञ पहुंचाए और घटनास्थल पर कार के जले हुए कलपुर्जे देखे।

आग पहले कार के पिछले हिस्से में लगी थी, उसी हिस्से में बैटरियां लगी होती हैं। कार के पिछले टायर पहले जले थे, जबकि अगले हिस्से के अलॉय व्हील ज्यादा नहीं जले थे। बता दें कि उद्योगपति के बेटे सौरभ पुगलिया ने कहा था कि कार की बैटरी रात को चार्जिंग पर नहीं लगी थी और आग पोल के कारण घर में लगी थी। इसके बाद बिजली कंपनी और फायर सेफ्टी विशेषज्ञों ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू की थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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