इंदौरः भागीरथपुरा के पानी में मिले घातक बैक्टीरिया, विस्तृत जांच के लिए कोलकाता से आएगी वैज्ञानिकों की टीम

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इंदौरः भागीरथपुरा के पानी में मिले घातक बैक्टीरिया, विस्तृत जांच के लिए कोलकाता से आएगी वैज्ञानिकों की टीम


इंदौरः भागीरथपुरा के पानी में मिले घातक बैक्टीरिया, विस्तृत जांच के लिए कोलकाता से आएगी वैज्ञानिकों की टीम


इंदौर, 03 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में जिस दूषित पानी से लोग बीमार हुए हैं, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हुई जांच में ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया मिले हैं। बताया गया है कि अब बैक्टेरिया की विस्तृत जांच के लिए कोलकाता के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बैक्टिरियोलॉजी से वैज्ञानिकों की टीम इंदौर आएगी। वह भागीरथपुरा से पानी के सैंपल लेगी और बैक्टरीया की विस्तृत जांच करेगी।

दरअसल, शनिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम इंदौर आई। मिशन एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने चाचा नेहरू अस्पताल, एमवाय अस्पताल और भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पतालों में भर्ती मरीजों से चर्चा की और डाक्टरों से इलाज की जानकारी ली। इस दौरान स्टाफ, इलाज, रेफरल मेकेनिजम, औषधियों की उपलब्धता, रिकॉर्ड संधारण को देखा। इलाज करने वाले डाक्टरों से यह भी पूछा कि दवाई का कौन-सा डोज कितनी मात्रा में मरीजों को दिया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से यह भी कहा कि सभी मरीजों को सिर्फ यह नहीं कहना है कि पानी में घोलकर ओआरएस पीएं, उन्हें यह कहना है कि उबले हुए पानी में ओआरएस मिलकर पीएं। दूसरे जिले से बुला रहे विशेषज्ञ इंदौर में बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए दूसरे जिलों से भी विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है। क्योंकि अभी शासकीय संस्थाओं में स्टाफ की कमी बनी हुई है।

मिशन एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि 24 घंटे तक मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है। अन्य जिलों से एपिडिमियोलाजिस्ट, शिशुरोग विशेषज्ञ, औषधि विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारी भी अन्य जिलों सेवाएं देने इंदौर आए हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पानी को पूर्णतया सुरक्षित रखने के लिए क्लोरीवेट ड्रॉप वितरित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की टीम अच्छा काम कर रही है। अभी हमने 15 डाक्टर दूसरे जिलों से बुलवाएं है। हम कोरोना की तरह ही कीट भी सप्लाय करेंगे। इस कीट ओआरएस और जिंक दवाई रहेगी। इसके अलावा रेपिड डायग्नोस्टिक कीट कलकत्ता से उपलब्ध करवाई जा रही है। नेशनल इंस्टिट्यूट आफ बैक्टिरियोलाजी, कलकत्ता के वैज्ञानिकों की टीम भी इंदौर आएगी।

उल्टी-दस्त के 65 नए मरीज मिले, 15 को अस्पताल में करना पड़ा भर्ती

इंदौर में दूषित पेयजल से 16 लोगों की मौत और एक हजार लोगों के बीमार होने के बीच नगर निगम मामले सामने आने के सात दिन बाद भी भागीरथपुरा क्षेत्र में साफ-स्वच्छ नर्मदा जल उपलब्ध नहीं करा पाया है। रहवासी अब भी पूरी तरह टैंकरों पर आश्रित हैं। शनिवार को उल्टी-दस्त के 65 नए मरीज मिले। इनमें से 15 को अस्पतालों में भर्ती किया गया, शेष को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेजा गया। वर्तमान में 149 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 20 आईसीयू में हैं। इस बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम ने क्षेत्र का सघन दौरा किया और अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की।

अब हैजा की आशंका बढ़ीशनिवार को 13 वर्षीय एक बच्चे में हैजा की पुष्टि हुई। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मल-मूत्र मिला पानी घरों तक कैसे पहुंचा। अस्पताल में भर्ती कई मरीजों में किडनी-लिवर तक संक्रमण फैल गया है। अस्पताल में भर्ती संतोष बाई की किडनी तक संक्रमण पहुंच गया है। इसी प्रकार 17 वर्ष के पवन के लिवर में संक्रमण बताया गया है। इन मरीजों का निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।

20 प्रतिशत लोगों को दोबारा अस्पताल में करना पड़ रहा भर्तीभागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण बीमार होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। डिस्चार्ज होने के बाद भी करीब 20 प्रतिशत लोगों को दोबारा भर्ती कराना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिवारों में डर और चिंता है। स्वजन का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे पूरी सावधानी बरत रहे हैं। मरीजों को समय पर दवाइयां दी जा रही हैं और घर में केवल उबला हुआ पानी ही पिलाया जा रहा है। इसके बावजूद तबीयत में सुधार नहीं हो रहा है।

तीन दिन से खा रहा दवाई, नहीं मिला आरामभागीरथपुरा निवासी दीपक कुशवाह ने बताया कि मैं करीब पांच दिन से उल्टी-दस्त की शिकायत से परेशान हूं। पिछले तीन दिन से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दी गई दवाई खा रहा हूं, लेकिन कोई आराम नहीं मिल रहा है। बार-बार यहां समस्या लेकर आ रहा हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक भागीरथपुरा से जो मरीज आ रहे हैं, उनमें उल्टी-दस्त की शिकायत सामान्य मरीजों से अलग है। दस्त में जहां आमतौर पर दो से तीन आइवी चढ़ाने पर आराम मिल जाता है, लेकिन इन मरीजों को आठ आइवी तक चढ़ाना पड़ रहा है। इसी प्रकार एंटीबायोटिक भी दोगुनी देना पड़ रही है।

15 जगहों पर खुदाई के बाद मिले 7 बड़े लीकेजइंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल की गंभीर समस्या को देखते हुए नगर निगम प्रशासन अब पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में आ गया है। जल संकट और बीमारी के मुख्य कारण यानी पाइपलाइन के लीकेज को खोजने के लिए निगम ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। निगम प्रशासन ने भागीरथपुरा में निगरानी और निरीक्षण के लिए एक भारी-भरकम टीम तैनात की है। शनिवार से ही इस क्षेत्र में पानी की सैंपलिंग और लीकेज खोजने के काम की कमान आठ अपर आयुक्तों को सौंपी गई है। इनमें हाल ही में निगम में शामिल हुए तीन नए अपर आयुक्तों के साथ पहले से मौजूद पांच अपर आयुक्त भी शामिल हैं। प्रशासन का लक्ष्य हर हाल में उस स्रोत का पता लगाना है जहां से पीने के पानी में गंदगी मिल रही है।

लीकेज की सघन जांच के लिए भागीरथपुरा की 32 गलियों के लिए 32 बीट निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक गली की जिम्मेदारी एक उपयंत्री या सहायक यंत्री को दी गई है। ये इंजीनियर अपनी-अपनी गलियों में सफाई व्यवस्था, सैंपलिंग और लीकेज की बारीकी से जांच कर रहे हैं। अभियान के तहत नर्मदा जल वितरण लाइन के 15 मुख्य स्थानों पर गड्ढे खोदकर पाइपलाइन की भौतिक जांच की गई। इस प्रक्रिया में सात स्थानों पर बड़े लीकेज मिले हैं, जिन्हें तत्काल दुरुस्त करने का काम किया गया है।

बोरिंग में क्लोरीनेशन और टैंकरों से जलापूर्तिसुरक्षा के लिहाज से शनिवार को भागीरथपुरा की मुख्य टंकी से जल वितरण पूरी तरह बंद रखा गया। पानी की कमी को दूर करने के लिए पूरे क्षेत्र में टैंकरों के माध्यम से पानी भेजा गया है। साथ ही, संक्रमण को रोकने के लिए क्षेत्र के 100 सार्वजनिक और निजी बोरिंग में क्लोरीन डालने का काम भी किया गया है। निगम का अमला यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि पाइपलाइन के लीकेज पूरी तरह बंद होने तक लोगों को स्वच्छ पेयजल का विकल्प मिलता रहे।

भागरीथपुरा में 16 लोगों की दूषित पानी पीने से मौत के बाद भी नगर निगम व प्रशासन का सरकारी अमला दूषित जल की रोकथाम करने में नाकाम है। हकीकत यह है कि भागीरथपुरा ही नहीं पूरा शहर ही ड्रेनेज मिला दूषित पानी पीने पर मजबूर है। इंदौर नगर निगम की हेल्पलाइन 311 पर दूषित पानी की शिकायतें ही इसकी हकीकत बयां कर रही हैं। इस हेल्पलाइन पर इंदौर नगर निगम के 85 वार्ड में से 72 वार्ड ऐसे है जहां के लोगों ने दूषित पानी की शिकायतें पहुंच रही है। इस हेल्पलाइन पर पिछले 48 घंटे में दूषित जल की 316 शिकायतें पहुंची। स्थिति है यह है कि नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारियों का अमला भी इन शिकायतों का निराकरण नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि पिछले सात दिन में हेल्पलाइन पर पहुंची 699 शिकायतें लंबित है।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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