इंदौरः नदी-नालों में दूषित जल प्रवाहित करने वाली औद्योगिक और अन्य इकाईयों के विरूद्ध होगी कार्रवाई

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इंदौरः नदी-नालों में दूषित जल प्रवाहित करने वाली औद्योगिक और अन्य इकाईयों के विरूद्ध होगी कार्रवाई


- औद्योगिक अपशिष्ट जल के प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विषय पर समीक्षा बैठक सम्पन्न

इंदौर, 23 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में नदी-नालों में दूषित जल प्रवाहित करने वाली औद्योगिक और अन्य इकाइयों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।

यह जानकारी सोमवार को यहां कलेक्टर श्री शिवम वर्मा की अध्यक्षता में औद्योगिक अपशिष्ट जल के प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विषय पर चर्चा हेतु आयोजित बैठक में दी गई। इस अवसर पर निर्देश दिए गए कि सभी ऐसी इकाईयां अपने-अपने यहां दूषित जल के समुचित निपटारे की व्यवस्था सुनिश्चित करें। वे अपने परिसरों में ईटीपी की स्थापना करें। आवश्यकता के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की स्थापना भी अनिवार्य रूप से की जाए। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

बैठक में नमामि गंगे अभियान के तहत प्रदूषण को नियंत्रित करने और अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपचार की व्यवस्था मजबूत करने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर श्री वर्मा द्वारा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की आवश्यकता, केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता तथा उद्योगों की भागीदारी को लेकर चर्चा की गई। कलेक्टर शिवम वर्मा ने उद्योग प्रतिनिधियों से पर्यावरण संरक्षण को साझा जिम्मेदारी बताते हुए सहयोग करने का आह्वान किया और कहा कि प्रशासन और उद्योगों के संयुक्त प्रयास से औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

बैठक में बताया गया कि पालदा और कुमेड़ी क्षेत्र में करीब 700 छोटे-बड़े उद्योग संचालित हैं, इन क्षेत्रों में सीईटीपी की अत्यन्त आवश्यकता है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों में सीईटीपी की स्थापना की जाए। जरूरत पड़ने पर टैंकरों माध्यम से भी अपशिष्ट जल का परिवहन कर सीईटीपी तक पहुँचाया जाए। पालदा और कुमेड़ी क्षेत्र में नए CETP की आवश्यकता को लेकर चर्चा करते हुए बताया गया कि परियोजना की अनुमानित लागत 66 करोड़ रुपये से अधिक है। उक्त परियोजना के संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा 60 प्रतिशत राशि दी जाएगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत उद्योगों को वहन करनी होगी। उद्योगों की वित्तीय भागीदारी और संचालन-रखरखाव में सहयोग मिलने के बाद ही राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा परियोजना की DPR पर विचार किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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