मप्रः तेंदुआ शिकार-तस्करी मामले में फरार आरोपी की याचिका हाईकोर्ट ने की निरस्त
- तीन राज्यों से 15 आरोपी गिरफ्तार, तेंदुए के अवयव और शिकार सामग्री जब्त
भोपाल, 09 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में तेंदुओं के अवैध शिकार एवं तस्करी के मामले में फरार मुख्य आरोपी को उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ से राहत नहीं मिली है। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी द्वारा दायर याचिका पर विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय ने उसे निरस्त कर दिया है।
मध्य प्रदेश एसटीएसएफ द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों और विशेष शासकीय अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत ठोस दलीलों के आधार पर उच्च न्यायालय ने आरोपी को राहत देने से इनकार करते हुए जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी को जांच में सहयोग के लिए कई बार जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के समन भेजे गए, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। जांच में सहयोग नहीं करने पर विशेष न्यायालय, शिवपुरी द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) द्वारा उसकी तलाश की जा रही है।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में वन्यजीव शिकार एवं तस्करी गिरोहों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान में विगत माह तेंदुओं के अवैध शिकार और अवयवों की तस्करी के मामले की जांच में एक संगठित गिरोह के शामिल होने के साक्ष्य मिले हैं। यह मामला मध्य प्रदेश शासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गिरोह ने श्योपुर और मुरैना जिलों में आने वाले अत्यंत संवेदनशील ‘चीता लैंडस्केप’ में 10 तेंदुओं का शिकार किया है। मामले में अब तक हरियाणा, मध्य प्रदेश और दिल्ली के 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में तेंदुओं के अवयव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा बाघ और तेंदुओं के शिकार में उपयोग किए जाने वाले 6 लेग होल्ड ट्रैप और एक चाकू भी जब्त किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

