ग्वालियरः पांडुलिपि सर्वे में मिली महत्वपूर्ण उपलब्धि, 700 दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का हुआ डिजिटल दस्तावेजीकरण

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ग्वालियरः पांडुलिपि सर्वे में मिली महत्वपूर्ण उपलब्धि, 700 दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का हुआ डिजिटल दस्तावेजीकरण


ग्वालियर, 24 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से पांडुलिपि सर्वे का कार्य जारी है। सर्वे के दौरान ग्वालियर में 700 दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ मिले हैं, जिनका डिजिटल दस्तावेजीकरण किया गया।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने बुधवार को बताया कि सर्वे दल द्वारा विभिन्न स्थानों पर संरक्षित दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का चिन्हांकन कर उन्हें डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है। इसी क्रम में सर्वे दल ने बीते दिनों ग्वालियर में चेतकपुरी स्थित नीलकमल माहेश्वरी के निवास पर पहुँचकर वर्ष 1800 से 1947 के मध्य की हस्तलिखित पांडुलिपियों एवं ग्रंथों का अवलोकन किया। इस दौरान उपलब्ध सामग्री का विवरण ज्ञान भारतम ऐप पर दर्ज किया गया। माहेश्वरी के निजी संग्रह में सुरक्षित लगभग 700 दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया गया।

नीलकमल माहेश्वरी ने बताया कि उनके संग्रह में कई अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं। इनमें सबसे छोटी आकार की हस्तलिखित पांडुलिपि भी शामिल है। साथ ही प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के नाम स्वर्ण (गोल्डन) स्याही से अंकित एक विशेष हस्तलिखित पांडुलिपि भी उनके संग्रह की महत्वपूर्ण धरोहर है।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियाँ, ग्रंथ अथवा अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं, तो उनकी जानकारी पांडुलिपि सर्वे दल को उपलब्ध कराएँ। इससे जिले की अमूल्य सांस्कृतिक एवं साहित्यिक धरोहर का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटल अभिलेखीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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