ग्वालियरः किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हुए कृषि मंथन – 2026 का भव्य समापन

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ग्वालियरः किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हुए कृषि मंथन – 2026 का भव्य समापन


- मंथन से निकले सुझावों को मध्य प्रदेश का कृषि रोडमैप बनाने के लिये भेजा जायेगा

ग्वालियर, 24 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय ‘कृषि मंथन 2026’ का मंगलवार को भव्य समापन हुआ।

इस आयोजन में देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और किसानों ने हिस्सा लिया। साथ ही आपसी विचार मंथन कर मध्य प्रदेश की कृषि का भविष्य गढ़ने के लिये सार्थक सुझाव दिए। कृषि मंथन में खासतौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस), जलवायु परिवर्तन, उच्च तकनीकयुक्त उद्यानिकी, बीज सुधार, डिजिटल कृषि और बाजार सुधार जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। मंथन से निकले सुझावों को कृषि योजना बनाने के लिये शासन को भेजा जायेगा। कार्यक्रम के अंत मे प्रगतिशील किसान, शोधार्थी, इन्टरपेन्योर, एवं बेहतर प्रदर्शनी लगाने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के पूर्व उपमहानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. आर.सी. अग्रवाल ने कहा कि मंथन से निकले ‘अमृत’ रूपी सुझावों को शासन तक पहुंचाया जाए और विश्वविद्यालय उन्हें परियोजनाओं में बदलकर कृषि अनुसंधान व नवाचार को नई दिशा दे। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. अरविन्द कुमार शुक्ला ने कहा कि यह कृषि मंथन प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदृष्टि का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों, किसानों और वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाकर ‘आत्मनिर्भर भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा इस आयोजन में आईसीएआर के उपमहानिदेशकों से विमर्श कर देशभर के कृषि संस्थानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंथन से निकले सुझाव शासन को तो भेजे ही जाएंगे, साथ ही इनसे विश्वविद्यालय भी शोध व नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

निदेशक आईसीएआर-केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद डॉ. वी.के. सिंह ने कहा कि समुद्र मंथन की तरह इस कृषि मंथन से जो अमृत निकला है, उसे कृषि संस्थान लागू करें। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को वैज्ञानिकों की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश के लिए एक ठोस एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान, और प्रसार को समान महत्व दिया जाए।

जलवायु और टिकाऊ खेती पर फोकस हो

निदेशक भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मेरठ डॉ. सुनील कुमार तिवारी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ खेती की चुनौतियों से निपटने के लिए शॉर्ट टर्म और मिड टर्म रणनीति आवश्यक है। उन्होंने युवाओं की भूमिका को भविष्य की कृषि के लिए निर्णायक बताया। अन्य सत्रों में डॉ. वी.के. सिंह, डॉ. पी.एम. गौर, डॉ. राहुल त्रिपाठी, डॉ. एन.के. लेनका सहित विशेषज्ञों ने जलवायु अनुकूल किस्मों, फसल अवशेष प्रबंधन, एआई आधारित सटीक कृषि और एकीकृत टिकाऊ मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए।

कृषि में एआई और डिजिटल तकनीक की भूमिका बढ़ाएं

कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल कृषि पर हुए सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की खेती एआई, एमएल और आईओटी आधारित होगी। डॉ. एन.एस. राठौर ने भारतीय कृषि में एआई और आईओटी की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. वी.पी. चौधरी एवं डॉ. सुधीर के. चक्रवर्ती ने स्मार्ट कृषि यंत्रीकरण और भविष्य की तकनीकों पर प्रस्तुति दी। विशेषज्ञों ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डेटा, ड्रोन आधारित निगरानी, सटीक उपकरणों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने और जोखिम कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

बीज, बाजार और हाई-टेक उद्यानिकी पर ठोस सुझाव

मंथन के विभिन्न थीम में पौध प्रजनन, बीज क्षेत्र सुधार, जिला-वार बीज रोलिंग प्लान, स्पीड ब्रीडिंग, नैनो उर्वरक, ई-नाम सशक्तिकरण, क्लस्टर आधारित उत्पादन और हाई-टेक उद्यानिकी मॉडल पर महत्वपूर्ण सिफारिशें सामने आईं। सोयाबीन क्षेत्र को मजबूत करने, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन बढ़ाने और जिला स्तर पर ब्रांडिंग विकसित करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही उद्यानिकी क्षेत्र में पॉलीहाउस, हाइड्रोपोनिक्स, सौर ऊर्जा आधारित कोल्ड स्टोरेज और निर्यात उन्मुख फ्लोरीकल्चर क्लस्टर विकसित करने का सुझाव भी सामने आए।

परंपरागत सोच से आगे बढ़कर उन्नत कृषि तकनीक अपनाने पर भी जोर

तीन दिनों तक चले इस कृषि मंथन ने स्पष्ट संकेत दिया कि मध्यप्रदेश की कृषि अब परंपरागत सोच से आगे बढ़कर तकनीक, नवाचार और नीति-समन्वय के नए युग में प्रवेश कर रही है। मंथन से निकले ‘अमृत’ सुझावों को समयबद्ध कार्ययोजना में बदलने पर प्रदेश की कृषि को निश्चित रूप से नए आयाम मिलेंगे।

कृषि विज्ञान केन्द्र ग्वालियर की प्रदर्शनी को प्रथम पुरस्कार

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में कृषि मंथन - 2026 में राज्य के विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि एवं उद्यानिकी महाविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गईं। कृषि विज्ञान केन्द्र ग्वालियर की प्रदर्शनी को प्रथम पुरस्कार मिला। अतिथियों ने वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह सहित कृषि विज्ञान केन्द्र की पूरी टीम को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। कृषि विज्ञान केन्द्र ग्वालियर द्वारा प्रदर्शनी के माध्यम से मुर्गी पालन, प्राकृतिक तकनीकी संसाधन, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन एवं अन्य उद्यानिकी व कृषि की उन्नत तकनीकियों को दर्शाया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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