गेहूं के समर्थन मूल्य पर मोहन सरकार के खिलाफ किसान संघ का ऐलान- जनजागरण से आंदोलन तक जाएगा संघर्ष
भोपाल, 05 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में गेहूं के समर्थन मूल्य को लेकर एक बार फिर सियासी और किसान आंदोलन की सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय किसान संघ ने प्रदेश की डॉ. मोहन सरकार के खिलाफ ताल ठोकने का ऐलान करते हुए कहा है कि यदि सरकार ने अपने चुनावी वादे के अनुसार गेहूं और धान की खरीद समर्थन मूल्य पर नहीं की, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। इसकी शुरुआत 26 जनवरी से जनजागरण अभियान के रूप में होगी, जो गांव-गांव तक पहुंचेगा।
इस संबंध में रविवार को आयोजित भारतीय किसान संघ की प्रदेश स्तरीय बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि चुनाव के समय सरकार ने किसानों से जो वादे किए थे, अब उन्हें पूरा करने का समय आ गया है। किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपए प्रति क्विंटल घोषित कर उसी दर पर खरीदी सुनिश्चित की जाए।
सरकार से आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए
बैठक के संबंध में सोमवार शाम जानकारी देते हुए भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि किसान संघ लंबे समय से सरकार के साथ संवाद कर रहा है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि वर्तमान समर्थन मूल्य 2600 रुपए से बढ़ाकर 2700 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए। सरकार ने चुनाव के दौरान यह वादा किया था, लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक उसे लागू नहीं किया गया है।”
राहुल धूत ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है और यहां का मुख्य अनाज गेहूं है। इसके बावजूद किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ का उदाहरण, मप्र में उपेक्षा
किसान संघ ने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। राहुल धूत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही अपने चुनावी वादे के अनुसार धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पड़ोसी राज्य में वादा पूरा किया जा सकता है तो मध्य प्रदेश में गेहूं किसानों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है?
उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश में सबसे अधिक गेहूं की खेती होती है, लेकिन यहां के किसानों को उनके हक का मूल्य देने में सरकार पीछे हट रही है। अब किसान सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस निर्णय चाहता है।”
26 जनवरी से जनजागरण अभियान
भारतीय किसान संघ ने साफ किया है कि 26 जनवरी से पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत गांव-गांव जाकर किसानों को समर्थन मूल्य के मुद्दे पर जागरूक किया जाएगा। राहुल धूत ने बताया कि हर साल किसान संघ 26 जनवरी से गांवों में भारत माता पूजन का आयोजन करता है। इस वर्ष भारत माता पूजन के साथ-साथ गेहूं के समर्थन मूल्य को लेकर जनजागरण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार को यह स्पष्ट संदेश देगा कि किसान अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं।
आंदोलन की चेतावनी
किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जनजागरण अभियान के बाद भी सरकार ने 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं के समर्थन मूल्य की घोषणा नहीं की तो आगामी महीने से प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यह आंदोलन सरकार के खिलाफ होगा और इसमें हजारों किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
किसान हित बनाम सरकारी वादे
भारतीय किसान संघ का कहना है कि समर्थन मूल्य प्रत्येक कृषक के लिए एक आर्थिक मुद्दे से अधिक किसान के सम्मान और उसकी आजीविका से जुड़ा सवाल है। बढ़ती लागत, महंगे बीज, खाद और डीजल के बीच यदि किसान को फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता है तो खेती करना घाटे का सौदा बन जाता है।
उल्लेखनीय है कि गेहूं के समर्थन मूल्य को लेकर किसान संघ और मोहन सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार जनजागरण अभियान से पहले ही कोई ठोस फैसला लेती है या फिर प्रदेश एक बड़े किसान आंदोलन का गवाह बनेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

