आदिरंग महोत्सवः गणगौर नृत्य, ढीमसा नृत्य, लहंगी नृत्य और भीली गायन का हुई प्रस्तुति

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आदिरंग महोत्सवः गणगौर नृत्य, ढीमसा नृत्य, लहंगी नृत्य और भीली गायन का हुई प्रस्तुति


आदिरंग महोत्सवः गणगौर नृत्य, ढीमसा नृत्य, लहंगी नृत्य और भीली गायन का हुई प्रस्तुति


खण्डवा, 21 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जनजातीय नृत्य, संगीत एवं शिल्प कलाओं पर केंद्रित तीन दिवसीय आदिरंग महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार की रात गणगौर नृत्य, ढीमसा नृत्य, लहंगी नृत्य और भीली गायन का प्रस्तुतियां हुईं।

नया हरसूद के स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार ने जनजातीय वर्ग के विकास के लिए अनेक योजनाएं प्रारंभ की है। इन योजनाओं की मदद से जनजातीय वर्ग के नागरिकों के जीवन में खुशहाली आई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है जो अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या भील, शंकर शाह और रघुनाथ शाह जैसे जननायकों के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।

कार्यक्रम में प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह के अलावा खंडवा विधायक कंचन मुकेश तन्वे, जनपद अध्यक्ष पुनासा राव पुष्पेंद्र सिंह, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष श्री सेवादास पटेल तथा खंडवा की पूर्व महापौर भावना शाह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी भी मौजूद थे।

केंद्रीय मंत्री उईके ने इस अवसर पर कहा कि हमारे देश की पहचान सांस्कृतिक विविधता के कारण है। आदिरंग महोत्सव कार्यक्रम के माध्यम से देश की विभिन्न जनजातीय लोक कलाओं का प्रदर्शन एक ही मंच से हो रहा है। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उन्होंने प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री श्री विजय शाह को बधाई दी।

मंत्री डॉ. विजय शाह ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि आदिरंग महोत्सव कार्यक्रम के माध्यम से देश की विभिन्न जनजातियों की कला एवं संस्कृति का प्रदर्शन हरसूद के नागरिकों को आज देखने को मिल रहा है। छनेरा जैसे छोटे नगर में राज्य स्तरीय आदिरंग कार्यक्रम का आयोजन स्वीकृत करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार प्रकट किया। विधायक श्रीमती तन्वे ने भी इस अवसर पर संबोधित किया।

शनिवार को भीली गायन आनन्दी लाल मावेल-धार, नर्मदा प्रवाहः नृत्य-नाटिका- स्वागतिका स्वाई, भोपाल, सौंगी मुखौटा, भवाड़ा नृत्य विष्णु आनंद गवली एवं साथी-महाराष्ट्र, बरेदी नृत्य मयंक यादव एवं साथी-सागर, लहंगी नृत्य सहरिया जनजातीय- रामलखन आदिवासी एवं साथी-श्योपुर, गणगौर नृत्य संजय महाजन एवं साथी-बड़वाह तथा उड़ीसा के आलोक रंजन साहू एवं उनके साथियों ने ढीमसा लोक नृत्य प्रस्तुत किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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