मप्रः ईओडब्ल्यू ने यात्री बसों की टैक्स चोरी के मामले में दर्ज की एफआईआईआर

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मप्रः ईओडब्ल्यू ने यात्री बसों की टैक्स चोरी के मामले में दर्ज की एफआईआईआर


जबलपुर, 27 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर की टीम ने यात्री बसों की टैक्स चोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बस मालिकों और परिवहन विभाग के कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला करीब नौ करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति से जुड़ा है।

ईओडब्ल्यू द्वारा शुक्रवार को जानकारी दी गई कि डिंडोरी जिले के बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के साथ ही जिला परिवहन कार्यालय डिंडोरी में पदस्थ (वर्तमान में नरसिंहपुर में पदस्थ) लिपिक पुष्प कुमार प्रधान के खिलाफ धारा 318(4), 61(2), 238(सी) बीएनएस 2023 एवं धारा 7(सी) के तहत गुरुवार रात मामला दर्ज किया गया है। ईओडब्ल्यू ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार ईओडब्ल्यू को भोपाल से शिकायत प्राप्त हुई थी कि संजय एवं साधना केशवानी के नाम पर पंजीकृत यात्री बसों का भारी टैक्स बकाया होने के बावजूद उन्हें परमिट और फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि दोनों के नाम पर 16 बसें पंजीकृत थीं, जो डिंडोरी, जबलपुर, शहडोल, मंडला और बालाघाट जिलों में रजिस्टर्ड थीं। इन बसों का संचालन डिंडोरी-जबलपुर, डिंडोरी-बम्हनी, बिछिया-डिंडोरी और अमरकंटक-मलाजखंड मार्गों पर किया जा रहा था।

जांच में सामने आया कि 16 में से कई बसों का वर्ष 2006 से 2025 तक का टैक्स जमा नहीं किया गया। वाहन मालिकों ने बसों को कबाड़ में बेच देने की सूचना परिवहन कार्यालय देने के बाद 2006 से टैक्स भुगतान बंद कर दिया गया था। वर्ष 2017 में जिला परिवहन कार्यालय डिंडोरी ने टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान लिपिक पुष्प कुमार प्रधान पर आरोप है कि उन्होंने बसों की टैक्स फाइलें गायब कर दीं। फाइलें गुम होने के कारण परिवहन विभाग बकाया वसूली नहीं कर सका, जिससे शासन को लगभग 9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

ईओडब्ल्यू के अनुसार बस संचालकों और परिवहन विभाग के कर्मचारी के बीच आपराधिक षड्यंत्र रचा गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ वाहनों को बिना अनुमति नष्ट कर दिया गया। आरोप है कि पुष्प कुमार प्रधान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बकाया टैक्स से संबंधित मूल दस्तावेज सुरक्षित नहीं रखे, जिससे आरोपियों को लाभ पहुंचा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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