ड्रोन एवं जियोस्पेशियल इकोसिस्टम में मध्य प्रदेश बना अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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ड्रोन एवं जियोस्पेशियल इकोसिस्टम में मध्य प्रदेश बना अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक इंटेलिजेंस से डिजिटल गवर्नेंस होगा पारदर्शी, सक्षम और फ्यूचर-रेडी

भोपाल, 03 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में देश की पहली राज्य-स्तरीय ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी (डीडीआर) शुरू की गई है। इससे मध्य प्रदेश भारत के ड्रोन एवं भू-स्थानिक इकोसिस्टम में अग्रणी राज्य बन गया है। यह पहल प्रदेश में गवर्नेंस को पूर्णतः डिजिटल बनाने की राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह तकनीक शासन की प्रक्रियाओं को सुगम, सुदृढ़ और पारदर्शी बनाती है। विभागों के बीच ड्रोन-आधारित इंटेलिजेंस को संस्थागत रूप देकर प्रदेश एक अधिक कनेक्टेड, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक ढांचे की ओर तेजी से अग्रसर है।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को एक बयान में कहा कि डीडीआर का शुभारंभ ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ के अवसर पर किया गया था। इसे राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 तथा डीजीसीए के यूएएस नियम 2021 के अनुरूप विकसित किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा विकसित यह रिपोज़िटरी फ्यूचर-रेडी डिजिटल गवर्नेस की एक सुदृढ़ आधारशिला सिद्ध होगी।

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में ड्रोन तकनीक का प्रभावी एवं व्यापक उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में भूमि सर्वेक्षण, कृषि प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाओं, खनन पट्टों की निगरानी, आधारभूत संरचना निर्माण, पर्यावरणीय मूल्यांकन, नगरीय नियोजन तथा आपदा प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ड्रोन सर्वेक्षण किए जा रहे हैं।अब तक ड्रोन सर्वेक्षणों से प्राप्त डेटा विभिन्न विभागों में अलग-अलग संकलित होता रहा, जिससे कई स्थानों पर सर्वेक्षणों की पुनरावृत्ति,अपूर्ण डेटा एकत्र होने और कई महत्वपूर्ण इमेजरी व भू-स्थानिक जानकारियों को सुरक्षित रखने की चुनौती सामने आई।

ड्रोन डेटा रिपोज़िटरीः एकीकृत, सुरक्षित और पारस्परिक रूप से सक्षम भू-स्थानिक प्लेटफॉर्म

मुख्यमंत्री ने बताया कि डीडीआर एक केंद्रीकृत, क्लाउड-आधारित, सुरक्षित और इंटर-ऑपरेबल डिजिटल अवसंरचना है। इससे भू-स्थानिक प्रशासन के भविष्य का आधार तैयार होता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन डेटा संग्रहित किए जा रहे हैं। इस डेटाबेस में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ऑर्थोमोज़ाइक, 3D टेरेन मॉडल, लिडार स्कैन, वीडियो इमेजरी, लिगेसी बेसलाइन डेटा और बहु-विभागीय सर्वेक्षण रिकॉर्ड शामिल किये जाते हैं। हर डेटा फ़ाइल को सटीक लैटिट्यूड-लाँगीट्यूड मेटाडाटा, सर्चेबल की-वर्ड, मानकीकृत तकनीकी फॉर्मेट और स्वचालित वर्गीकरण के साथ रिपोज़िटरी में संरक्षित किया जाता है। इस डेटा से सभी अधिकारी खोज, तुलना और विश्लेषण कर सकते हैं।

डेटा दोहराव में कमी और दक्षता में वृद्धि

उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार सभी विभागों के ड्रोन सर्वे डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर समेकित किया है। इसके परिणामस्वरूप ड्रोन सर्वेक्षणों के दोहराव में 30-50% तक कमी आई है। डेटा पारदर्शिता में वृद्धि, विभागीय सहयोग में सुधार,फील्ड-वेरिफिकेशन में सटीकता और निर्णय लेने की गति में अत्यधिक बढ़ोतरी संभव हुई है। अब विभाग स्थान, परियोजना, मेटाडाटा, विषय या उद्देश्य के आधार पर आसानी से आवश्यक भू- स्थानिक डेटा खोज सकते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण

मुख्यमंत्री ने कहा कि डीडीआर की तकनीकी संरचना अत्याधुनिक है। इससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग, लिगेसी डेटा की तुलनात्मक समीक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण, स्वचालित कैटलॉगिंग, टाइम-लैप्स परियोजना निगरानी, भविष्य-अनुमान मॉडलिंग और मल्टी-डिपार्टमेंट डेटा इंटीग्रेशन सुगम हुआ है। परिणामस्वरूप डेटा अधिग्रहण का समय सप्ताह से घटकर दिनों में आ गया है। योजनाओं का मूल्यांकन अधिक विश्वसनीय और नीति-निर्माण अधिक तथ्य परक, त्वरित और प्रभावी हुआ है।

डीडीआर से व्यापक लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भू-अभिलेख एवं राजस्व विभाग में भूखंड सीमांकन में उच्च सटीकता, किरायेदारी एवं कब्जा सत्यापन, अतिक्रमण की पहचान और भूमि विवादों का त्वरित निराकरण संभव हुआ है। आधारभूत संरचना एवं निर्माण परियोजनाओं-सड़कों, पुलों, नहरों, सोलर पार्कस एवं सार्वजनिक निर्माण कार्यों की टाइम-लैप्स निगरानी होने लगी है और परियोजनाओं की प्रगति का वैज्ञानिक मूल्यांकन आसान हुआ है। नगरीय प्रशासन एवं शहरी नियोजन के क्षेत्र में उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D मॉडल आधारित ज़ोनिंग, जल, सीवर, परिवहन और उपयोगिता सेवाओं की कुशल योजना बनाने में डीडीआर का उपयोग प्रभावी सिद्ध हुआ है। आपदा प्रबंधन जैसे बाढ़, आग, भू-स्खलन के बाद त्वरित नुकसान आकलन और लिगेसी बेसलाइन डेटा के आधार पर राहत और पुनर्वास की रणनीति बनाना आसान हुआ है। कृषि, सिंचाई, वन एवं पर्यावरण विभाग डीडीआर का उपयोग फसल स्थिति विश्लेषण, कीट-प्रभाव पहचान, माइक्रो- सिंचाई आवश्यकताओं का निर्धारण, वन संरक्षण एवं अवैध कटाई की निगरानी और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन में डीडीआर का उपयोग किया जा रहा है।

डीडीआर को राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में कदम

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आगामी समय में इस ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी को एक राष्ट्रीय रूप से सुलभ भू-स्थानिक ढांचे में विकसित करेगी।इसके लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अनुसंधान संस्थानों, GIS विशेषज्ञों, स्टार्ट-अप्स और निजी उ‌द्योग सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने की योजना है। राज्य का लक्ष्य है कि डीडीआर अनावश्यक ड्रोन सर्वेक्षण को कम करे, अंतर्राज्यीय आपदा प्रबंधन सहयोग को मजबूत बनाए और उच्च-गुणवत्ता वाले भू-स्थानिक डेटा आधारित नीति-निर्माण को सक्षम करे। ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी मध्यप्रदेश की डेटा-आधारित गवर्नेस यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम है, इसमें नवाचार, पारदर्शिता और भू-स्थानिक इंटेलिजेंस शासन का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं। एकीकृत और इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डेटा डुप्लिकेशन समाप्त होगा। इससे स्मार्ट गवर्नेंस की मजबूत नींव स्थापित होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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