मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाया गई डोल ग्यारस, प्रदेशभर निकले डोल-चल समारोह

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मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाया गई डोल ग्यारस, प्रदेशभर निकले डोल-चल समारोह


भोपाल, 22 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में मंगलवार को डोल ग्यारस धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर राजधानी भोपाल समेत प्रदेशभर में धार्मिक आयोजन हुए। उज्जैन में अलग-अलग इलाकों से डोल और झांकियों के साथ चल समारोह निकाले गए, जो हरसिद्धि मंदिर पहुंचे। भगवान कालभैरव की सवारी भी निकाली गई। इंदौर में विभिन्न समाजों के डोल और धार्मिक चल समारोह निकाले गए। भोपाल में भी चल समारोह निकाला गया।

वहीं, देवास के हाटपीपल्या में भगवान नृसिंह की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। नृसिंह मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा में लक्ष्मीनारायण, राधाकृष्ण, राम, सत्यनारायण और कृष्ण मंदिरों के डोल भी शामिल हुए। बैंड-बाजे, डीजे और ढोल-ताशों के साथ निकली शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए शाम को नृसिंह घाट पहुंची। रास्तेभर श्रद्धालु कीर्तन और नृत्य करते हुए शामिल हुए।

नृसिंह घाट पर सभी मंदिरों के डोल को नदी के जल में झुलाकर रखा गया। आरती के बाद जयकारों के बीच नृसिंह मंदिर के पुजारी ने भगवान की साढ़े 7 किलो वजनी पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तीन बार छोड़ा। तीनों बार प्रतिमा पानी में तैरती रही। इस परंपरा को देखने के लिए दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु घाट पर पहुंचे।

हाटपीपल्या में भगवान नृसिंह की प्रतिमा को नदी में तीन बार तैराने की करीब 127 साल पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि प्रतिमा तीनों बार तैरती है तो आगामी वर्ष सुखद रहता है। दो बार तैरने पर साल के 8 महीने अच्छे रहने और एक बार तैरने पर वर्ष सामान्य रहने की मान्यता है। तीनों बार प्रतिमा डूबने पर वर्ष अनिश्चितताओं से गुजरने की बात कही जाती है।

इस बार 22 वर्षीय अविनय पिता विष्णुदास वैष्णव ने पहली बार भगवान नृसिंह की पाषाण प्रतिमा को नदी में तैराया। उनके परिवार में कई पीढ़ियों से यह परंपरा निभाई जा रही है। अविनय ने अपने पिता और दादा की परंपरा को आगे बढ़ाया।

इधर, भोपाल में डोल ग्यारस पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन जुलूस निकाला गया। पीपल चौक स्थित पीपल जामा मस्जिद के पास से शुरू हुए जुलूस में भोपाल के राजा और दूल्हे राजा की प्रतिमाओं के साथ विभिन्न समाजों के डोल शामिल हुए। जुलूस में कलाकार अलग-अलग धार्मिक और ऐतिहासिक पात्रों के रूप में भी नजर आए। इनमें नीम करोली बाबा और अहिल्याबाई होल्कर और महात्मा गांधी के रूप में तैयार कलाकार आकर्षण का केंद्र रहे। इंदौर में भी भव्य चल समारोह निकला गया, जिसमें अखाड़ों ने करतब दिखाए।

आगर मालवा में डोल ग्यारस का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। आगर में मालीपुरा सहित विभिन्न स्थानों से भगवान के सुसज्जित विमानों के साथ भव्य चल समारोह निकला। ढोल-नगाड़ों और जय श्रीराम के जयकारों से माहौल भक्तिमय रहा। अखाड़ों के युवाओं ने लाठी, बनेटी और तलवारबाजी के हैरतअंगेज करतब दिखाए। जगह-जगह पुष्पवर्षा और साफा बांधकर अखाड़ों का स्वागत किया गया।

बालाघाट के लालबर्रा नगर में भगवान लक्ष्मीनारायण (ठाकुर जी) और श्रीराम-लक्ष्मण की संयुक्त शोभायात्रा निकाली गई। श्री बजरंग मंदिर एवं श्रीराम मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में निकली शोभायात्रा में भगवान के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु शामिल हुए। बैंड-बाजे के साथ निकली यात्रा से नगर का माहौल भक्तिमय हो गया।

कुक्षी के बाग नगर में देवझूलनी एकादशी पर चार मंदिरों से लड्डू गोपाल की प्रतिमा विराजित कर सजे-धजे डोले निकाले गए। चल समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बाघनी नदी के तट पर भगवान को जल स्नान कराया गया। इसके बाद आरती कर प्रसादी का वितरण किया गया।

अकोदिया में मंगलवार को जलझूलनी एकादशी धूमधाम से मनाई गई। नगर के विभिन्न मंदिरों से 11 डोल हनुमान मंदिर के पास एकत्र हुए, जहां से उनकी शोभायात्रा निकाली गई। नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। शाम 7 बजे कुएं पर विधि-विधान से भगवान को जल स्नान कराया गया। वहीं, तिंगजपुर में श्रीकृष्ण मंदिर से 3 डोल निकाले गए। इनका नगर भ्रमण कराने के बाद कालीसिंध नदी में स्नान कराया गया।

खातेगांव में डोल ग्यारस के अवसर पर विभिन्न मंदिरों और परिवारों की ओर से वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार डोल निकाले गए। जगह-जगह महिलाओं ने आरती उतारकर पूजा-अर्चना की। शाजापुर में डोल ग्यारस (जलझूलनी एकादशी) का पर्व उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण आकर्षक रूप से सजे डोलों में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले, जिससे शहर भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया।

डोल ग्यारस के अवसर पर हरदा के विभिन्न मंदिरों से डोल निकाले गए। भगवान लड्डू गोपाल माता यशोदा के साथ विमान में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। जगह-जगह महिलाओं ने आरती उतारकर पूजा-अर्चना की। देर रात भव्य चल समारोह भी निकाला जाएगा। श्योपुर में भव्य डोल शोभायात्रा निकली। करीब 50 देव विमान और 12 अखाड़े शामिल हुए, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए टोड़ी गणेश मंदिर पहुंचे और यहां से बंजारा डैम की ओर रवाना हुए। शोभायात्रा के दर्शन के लिए जिलेभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जयकारों के बीच लोगों ने जगह-जगह देव विमानों के दर्शन कर पूजा-अर्चना की, जिससे पूरा शहर धार्मिक उत्सव के रंग में नजर आया।

उज्जैन में कालभैरव मंदिर से निकली बाबा कालभैरव की सवारी केंद्रीय जेल भैरवगढ़ पहुंची, जहां जेल अधीक्षक मनोज साहू ने पालकी में विराजित बाबा का पूजन कर आरती की। पुलिस बल ने जेल गेट पर बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और बड़ी संख्या में कैदियों ने जेल के अंदर से दर्शन किए।

मंडला के आजाद वार्ड स्थित करीब 150 साल पुराने राधा-कृष्ण मंदिर में डोल ग्यारस पर सिर्फ भगवान कृष्ण का नर्मदा में जल विहार कराया जाता है, जबकि राधा रानी मंदिर में ही विराजमान रहती हैं। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, वर्ष 1918 में राधा-कृष्ण की मूर्तियों को ले जा रही नाव नर्मदा में पलट गई थी और दोनों मूर्तियां नदी में डूब गई थीं। भक्त वययो बाई की आराधना के बाद भगवान कृष्ण की मूर्ति मिल गई, लेकिन राधा रानी की मूर्ति नहीं मिली। इसके बाद से कृष्ण के अकेले जल विहार की परंपरा शुरू हुई, जिसमें उन्हें दोबारा नदी में न जाने देने के भाव से डोले में रस्सियों से बांधा जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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