देश में स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का मॉडल राज्य बनेगा मप्र, नागरिकों को सफर होगा सुगम

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देश में स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का मॉडल राज्य बनेगा मप्र, नागरिकों को सफर होगा सुगम


भोपाल, 11 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन समिट-2026 के पहले दिन शुक्रवार को सीमलेस पैसेंजर एक्सपीरियंस वाया वन स्टेट, वन जर्नी: इंटीग्रेटेड टिकटिंग एंड ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय तकनीकी सत्र में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि परस्पर जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, स्वचालित किराया संग्रहण और स्मार्ट मोबिलिटी समाधान न केवल नागरिकों के सफर को सुगम बनाएंगे, बल्कि मध्य प्रदेश को देश में स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का मॉडल राज्य भी बनाएंगे।

सत्र में ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के उपाध्यक्ष (सार्वजनिक परिवहन) श्रीनिवास भंडारी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर भरत मिश्रा तथा चलो मोबिलिटी की सह-संस्थापक प्रिया सिंह ने अपने विचार साझा किए। सत्र का संचालन केपीएमजी की पार्टनर (गवर्नमेंट एंड पब्लिक सर्विसेज) सोनिया सिंह ने किया।

सत्र में बताया गया कि समिट का प्राथमिक विज़न एकीकृत टिकटिंग और स्वचालित किराया संग्रहण (इंटीग्रेटेड टिकटिंग एंड ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन) प्रणाली के माध्यम से राज्यभर में यात्रियों को निर्बाध सफर का अनुभव प्रदान करना है। इस पहल के तहत यात्रा के हर चरण को आसान और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे यात्री एक ही मंच से रूट, बस सेवाओं, उनकी उपलब्धता और सटीक किराये की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत यात्री आरक्षित, अनारक्षित और नियमित यात्री पास डिजिटल माध्यमों से बुक कर सकेंगे।

यात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न भुगतान विकल्प जोड़े गए हैं, जिनमें यूपीआई, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी), एमपीवाईपीआईएल क्लोज़-लूप कार्ड और ई-वॉलेट शामिल हैं। इसके साथ ही ग्रामीण और अंतर-शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए नकद व ऑफलाइन टिकटिंग की व्यवस्था भी रखी गई है, जिससे नेटवर्क न होने पर भी यात्रा बाधित न हो।

परिवहन विभाग के इस एकीकृत तंत्र में ऑन-बोर्ड ई-पीओएस, चालक द्वारा जारी टिकट, मोबाइल व वेब बुकिंग और एक साझा बैकएंड प्रणाली को शामिल किया गया है। यह व्यवस्था रीयल-टाइम डेटा, लाइव यात्री संख्या (राइडरशिप) और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (वीएलटीएस) के जरिए क्रू वर्कफ़्लो व अलर्ट्स को नियंत्रित करेगी। इससे ऑपरेटरों को स्पष्ट ऑडिट रिकॉर्ड मिलेगा, राजस्व रिसाव (रेवेन्यू लीकेज) पर पूरी तरह रोक लगेगी और रूट व सेवाओं की बेहतर योजना तैयार की जा सकेगी। यह पूरी प्रणाली बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए पूरी तरह समावेशी व अनुकूल बनाई गई है। डिजिटल टिकट, लाइव एकीकरण और फीडबैक सेवाओं के साथ-साथ असफल लेन-देन के त्वरित समाधान, पारदर्शी रिफंड और मजबूत डेटा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और पूरी तरह विश्वसनीय यात्रा अनुभव मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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