मप्र के विमुक्त-घुमन्तु वर्ग के छात्रावासों में अब 1 रूपये किलो खाद्यान्न, मंत्रि-परिषद ने दी मंजूरी

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मप्र के विमुक्त-घुमन्तु वर्ग के छात्रावासों में अब 1 रूपये किलो खाद्यान्न, मंत्रि-परिषद ने दी मंजूरी


भोपाल, 29 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु वर्ग के छात्रावासों, आश्रमों और सामुदायिक कल्याण केन्द्रों में रहने वाले विद्यार्थियों एवं रहवासियों को अब गेहूं और चावल एक रुपये प्रति किलो की दर से मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

नई व्यवस्था से इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों को खाद्यान्न की मौजूदा दरों की तुलना में सीधे आर्थिक राहत मिलेगी। अभी प्रत्येक रहवासी को प्रतिमाह 12 किलो गेहूं 5 रुपये प्रति किलो और 3 किलो चावल 6.50 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दोनों खाद्यान्न एक रुपये प्रति किलो की दर से मिलेंगे।

एससी-एसटी छात्रावासों के समान सुविधा

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि, इस निर्णय से विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग के छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के शासकीय छात्रावासों के विद्यार्थियों की तरह रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।

प्रदेश में जून 2002 से विभिन्न कल्याणकारी संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा संचालित संस्थाओं को बीपीएल दर पर गेहूं-चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। वहीं नवंबर 2014 से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के शासकीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को एक रुपये किलो की दर से खाद्यान्न दिया जा रहा है। अब इसी व्यवस्था का विस्तार विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु वर्ग के संस्थानों तक किया गया है।

15 किलो खाद्यान्न पर कम होगा खर्च

वर्तमान व्यवस्था में एक रहवासी को हर महीने 12 किलो गेहूं और 3 किलो चावल यानी कुल 15 किलो खाद्यान्न मिलता है। नई दर लागू होने पर 12 किलो गेहूं के लिए 12 रुपये और 3 किलो चावल के लिए 3 रुपये देने होंगे। इससे संस्थानों की भोजन व्यवस्था पर आने वाला खर्च कम होगा और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग अन्य जरूरतों में किया जा सकेगा।

सरकार पर सालाना ₹52 लाख अतिरिक्त भार

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि एक रुपये किलो की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराने पर राज्य शासन पर करीब 52 लाख रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। यह भार राज्य सरकार वहन करेगी। सरकार के अनुसार, रियायती खाद्यान्न से छात्रावासों और आश्रमों की भोजन व्यवस्था को आर्थिक सहारा मिलेगा। इससे विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ उनके भोजन और दैनिक जरूरतों से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी सहायता मिलेगी।

कल्याण योजनाओं के दायरे में विस्तार

सरकार का कहना है कि निर्णय का उद्देश्य विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु वर्ग के विद्यार्थियों को अन्य शासकीय छात्रावासों के समान खाद्यान्न सुविधा उपलब्ध कराना है। रियायती दर पर गेहूं और चावल मिलने से संस्थानों के भोजन संबंधी खर्च में कमी आएगी और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर बनाने में संसाधनों का उपयोग किया जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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