मप्रः निर्माण स्थलों पर हेल्थ कल्चर विकसित करने बिल्डरों के साथ मिलकर काम करेगा श्रम विभाग

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मप्रः निर्माण स्थलों पर हेल्थ कल्चर विकसित करने बिल्डरों के साथ मिलकर काम करेगा श्रम विभाग


-निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य उपाय सुनिश्चित करने के लिए हुई कार्यशाला

भोपाल, 02 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में श्रम विभाग निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में एक और पहल करने जा रहा है। ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ को बेहतर बनाने के लिए श्रम विभाग ने अब प्राइवेट बिल्डरों को भी तकनीकी मदद देने की पहल की है। मप्र श्रम विभाग के सचिव रघुराज राजेंद्रन ने कहा कि ‘नये श्रम कानून’ में सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत हर श्रमिक की सुरक्षा और कल्याण को सुनिश्चित किया गया है। निर्माण स्थल चाहे वो सरकारी हो या प्राइवेट; श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता और सबसे बड़ा कर्तव्य होना चाहिए।

बीओसीडब्ल्यू 1996 के अधिनियम के अनुसार ‘निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य उपाय’ सुनिश्चित कराए जाने को लेकर शुक्रवार को ‘अटलबिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान’ में एक महत्वपूर्ण एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ और श्रम विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी, निजी भवन निर्माता और प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।

सचिव रघुराज ने कहा के निर्माण स्थलों पर एक ऐसे जिम्मेदार व्यक्ति की नियुक्ति की जानी चाहिए, जिसे श्रमिकों की सुरक्षा से संबंधित अच्छी प्रैक्टिस और जानकारी हो। उन्होंने कहा कि बीओसीडब्ल्यू एक्ट में इसका प्रावधान है। इस बात की सूचना बोर्ड को देना अनिवार्य है।

प्रथम वक्ता भारतीय मानक ब्यूरो(बीआईएस) के संयुक्त संचालक राहुल कुमार ने निर्माण स्थलों पर दुर्घटनाओं को रोकने, श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक और तकनीक पहलुओं पर प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने नए श्रमिकों को सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशिक्षित करने और पुराने श्रमिकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण(पीपीई) पर भी विस्तार से बताया। जैसे- भवन निर्माण, फैक्ट्री, खदान, रासायनिक और विद्युत कार्य आदि के दौरान कैसी पीपीई का इस्तेमाल करना चाहिए। विभिन्न प्रकार के हेलमेट, मास्क, रेस्पिरेटर, दस्ताने, सेफ्टी गॉगल्स, सेफ्टी जूते, सेफ्टी जैकेट, इयर प्लग आदि के मानकों और उनकी उपयोगिता के बारे में बताया। भारतीय मानकों (बीआईएस) और अंतरराष्ट्रीय मानकों(आईएसओ) पर भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी, उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने के लिए सेफ्टी संस्कृति का निर्माण करना सभी का दायित्व है ,यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमे सभी की भूमिका अनिवार्य है।

उप श्रमायुक्त जासेमिन अली ने सरकारी, सार्वजनिक एवं निजी निर्माण परियोजनाओं पर लगने वाले उपकर सेस के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य कुल लागत का एक प्रतिशत सेस मंडल को जमा करना होता है। यह राशि सीधे श्रमिक कल्याण योजनाओं पर खर्च की जाती है। क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने सुझाव दिया कि निर्माण कार्य प्रारंभ होने से पहले ही अगर इस दिशा में प्रयास हो, तो बेहतर रहेगा इसमें श्रम विभाग की पहल अनुकरणीय है।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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