मप्र कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों और सरकार की नीतियों पर साधा निशाना, सरकार से पूछे सवाल

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मप्र कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों और सरकार की नीतियों पर साधा निशाना, सरकार से पूछे सवाल


भोपाल, 13 अगस्त (हि.स.)। राजधानी भाेपाल स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार काे पत्रकार वार्ता की।

ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक एवं मध्यप्रदेश प्रभारी अर्चना पोर्ते, विधायक सुनील उइके और मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम ने संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए आदिवासी समाज के अधिकारों, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल-जंगल-जमीन से जुड़े विषयों पर सरकार से जवाब मांगा।

इस अवसर पर आदिवासी कांग्रेस महिला विभाग की अध्यक्ष चंद्रा सरवटे, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश ठाकुर और संगठन महासचिव अशोक डावर भी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, पहचान और अधिकारों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और कई भाजपा शासित राज्यों के नेताओं की ओर से इस अवसर पर आदिवासी समाज के प्रति अपेक्षित सार्वजनिक संदेश नहीं आया।

कांग्रेस ने कहा कि मुद्दा केवल शुभकामना देने या न देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारों की आदिवासी नीति और प्राथमिकताओं से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। पार्टी ने सवाल उठाया कि आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन, रोजगार, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों को लेकर सरकार की नीतियों का वास्तविक प्रभाव कितना दिखाई दे रहा है।

दावों और जमीन की स्थिति पर कांग्रेस ने मांगा जवाब

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा नेतृत्व लगातार आदिवासी कल्याण और सशक्तिकरण की बात करता है, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर सरकार को सार्वजनिक रूप से आंकड़े और उपलब्धियां सामने रखनी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश को लेकर सरकार से सवाल किए कि आदिवासी युवाओं के लिए कितने नए रोजगार के अवसर पैदा हुए, शिक्षा और उच्च शिक्षा की स्थिति में कितना सुधार हुआ तथा आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का मुद्दा

पत्रकार वार्ता में वनाधिकार कानून के तहत दावों के निराकरण, आदिवासी भूमि और पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा तथा विस्थापन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं की जा सकती। उसकी अपनी संस्कृति, भाषा, परंपरा, इतिहास और सामुदायिक पहचान है, जिनकी संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि आदिवासी समाज के लिए इस्तेमाल होने वाले राजनीतिक विमर्श में उसकी विशिष्ट पहचान और अधिकारों को पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए।

मध्य प्रदेश सरकार से कई सवाल

कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार से पूछा कि आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षा के लिए किए गए प्रयासों के क्या परिणाम रहे हैं। वनाधिकार कानून के दावों के निराकरण की स्थिति क्या है और आदिवासी भूमि एवं पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने आदिवासी महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़क एवं अन्य बुनियादी ढांचे तथा आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित राशि के उपयोग का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की।

सम्मान के साथ अधिकार और परिणाम की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल प्रतीकात्मक सम्मान या घोषणाओं की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उसे अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन, बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को चुनावी राजनीति तक सीमित करने के बजाय देश के विकास में समान भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि वह आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी।

कांग्रेस ने भाजपा से विश्व आदिवासी दिवस पर नेतृत्व की ओर से सामने आए संदेशों के साथ-साथ आदिवासी कल्याण से जुड़ी नीतियों और उनके जमीनी परिणामों पर भी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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