(अपडेट) देश और प्रदेश के गांवों की तस्वीर बदल देगी विकसित भारत जी-राम-जी योजना : मोहन यादव

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(अपडेट) देश और प्रदेश के गांवों की तस्वीर बदल देगी विकसित भारत जी-राम-जी योजना : मोहन यादव


केन्द्र सरकार ने ग्रामीण परिवार को अब दी है 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल, 07 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश के सभी गांवों, गरीबों और किसानों के चहुमुखी विकास एवं जरूरतमंदों को ग्राम स्तर पर रोजगार दिलाने के लिए ही केन्द्र सरकार द्वारा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात वीबी जी-राम-जी अधिनियम 2025 लागू किया गया है। 'हर हाथ को काम' मुहैया कराने के लिए इस अधिनियम में एक ग्रामीण परिवार को अब 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। मनरेगा अधिनियम में रोजगार की यह गारंटी मात्र 100 दिन की थी। उन्होंने कहा कि वीबी जी-राम-जी योजना देश के सभी गांवों की तस्वीर बदल देगी है। यह गरीबों, खेतीहर मजदूरों, किसानों सभी के लिए बेहद लाभकारी है। इस योजना से गांवों के विकास को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भोपाल स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को कृषि से जुड़े कामों के लिए श्रमिक ही नहीं मिलते थे, पर वीबी जी-राम-जी योजना में कृषि के व्यस्ततम समय, विशेषकर बुवाई और कटाई के समय पर्याप्त मात्रा में कृषि श्रमिकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। इस अधिनियम में राज्यों को एक वित्त वर्ष में कुल 60 दिन की अवधि अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है, बीज बुवाई एवं फसल कटाई की व्यस्ततम समयावधि को भी रोजगार उपलब्ध कराने की अवधि में शामिल किया जा सकेगा। प्रावधान के अनुसार इस अवधि में अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित अन्य कार्य नहीं किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गांवों, गरीबों और किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इन्हें समृद्ध और सशक्त बनाना ही हमारा मूल लक्ष्य है। इसके लिए हम वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे है। इस वर्ष कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। हम सभी विभागों और कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाले स्वयंसेवी संगठनों, संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के 15 से अधिक बड़े विभाग कृषि वर्ष मनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन सहित मंडी बोर्ड, बीज निगम, कृषि अभियांत्रिकी, एमपी एग्रो, दुग्ध संघ, मार्कफेड, एमपी वेयर हाऊसिंग एंड लॉजीस्टिक्स निगम और ग्रामीण आजीविका विकास मिशन विभिन्न रोजगार आधारित विकास गतिविधियों के जरिए किसानों के कल्याण के लिए संयुक्त रूप से प्रभावी प्रयास करेंगे।

कार्य योजना बनाकर मिशन को देंगे गति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए हम समुचित कार्य योजना बनाने जा रहे हैं। इससे मिशन को गतिपूर्वक संचालित किया जाएगा। इसमें गोपालन को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही कई अन्य सुधार भी इस अधिनियम के दायरे में रहकर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हर जिले में स्टॉल्स, मार्केट आदि लगाने की व्यवस्थाएं भी की जाएगी। हमने तय किया है कि हर जिले में स्टॉल्स के माध्यम से किसानों के प्राकृतिक उत्पाद आमजन को उपलब्ध कराएंगे।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए हम सभी किसानों को आवश्यकतानुसार अनुदान भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में पहले 6 प्रतिशत प्रशासनिक अमला तैनात किया गया था। विकसित भारत जी-राम-जी योजना में इस कार्यकारी अमले की तादाद बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है। इससे योजना के क्रियान्वयन में जवाबदेहिता बढ़ेगी, साथ ही सभी गतिविधियों को पूरी पारदर्शिता से अंजाम दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केन्द्र सरकार तय मानकों के आधार पर देश के हर राज्य को एक निश्चित राशि भी देगी। अधिनियम में ग्रामीण आजीविका निर्माण के स्थाई स्रोत विकसित करने पर जोर दिया गया है। इससे ग्रामीणों के देशज ज्ञान, कौशल, उद्यमिता और उनमें निहित कला प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अधिनियम में बेरोजगारी भत्ता और विलम्बित मजदूरी देने का प्रावधान भी रखा गया है। इसमें तहत यदि किसी ग्रामीण परिवार को उसके मांग करने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर काम नहीं दिया जाता है, तो राज्य सरकार तय की गई दरों एवं शर्तों के अनुसार संबंधित मांगकर्ता परिवार को बेरोजागारी भत्ता देने के लिए भी बाध्य होगी। इसी तरह काम पूरा कर लेने के बाद भी यदि किसी कारणवश मजदूर को उसकी निर्धारित मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है, तो मुआवजे के तहत उसे विलम्बित मजदूरी के रूप में अतिरिक्त राशि देने का प्रावधान भी इस अधिनियम में है।

पंचायती राज संस्थाओं की होगी पूरी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हितग्राहीमूलक रोजगार कार्यों के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, गैर अधिसूचित जनजातियां, खानाबदोश, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, भूमि सुधार के हितग्राही, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं वन अधिकार अधिनियम के हितग्राही, छोटे और सीमान्त किसानों को इस अधिनियम में प्राथमिकता दी जायेगी। अधिनियम में पंचायती राज संस्थाओं - ग्रामसभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य रोजगार गारंटी परिषद को भी स्पष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं। अधिनियम में विकसित भारत जी-राम-जी स्कीम में शुरु किए गए निर्माण कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजीटल रिकॉडिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा नियोजित किए गए सभी मजदूरों को तेजी से समुचित भुगतान देने के लिए डिजीटल तथा बायोमैट्रिक भुगतान प्रणाली और ग्रामसभा द्वारा सोशल ऑडिट द्वारा योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिनियम में पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न स्तरों पर एक समयबद्ध एवं शिकायत निवारण तंत्र तथा कुछ दंडात्मक प्रावधान भी किए गए हैं। इसके लिए शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता और इसकी मॉनिटरिंग के लिए शिकायत प्रबंधन सूचना प्रणाली की डिजीटल व्यवस्था स्थापित की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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