जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी के सम्पूर्ण शैक्षणिक विकास के लिये संकल्पित सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी के सम्पूर्ण शैक्षणिक विकास के लिये संकल्पित सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पुन: स्थापित हुई जनजातीय समुदाय की गरिमा: मुख्यमंत्री

भोपाल, 22 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी को हर क्षेत्र में आगे लाने के लिये प्रतिबद्ध है। उनके सम्पूर्ण शैक्षणिक विकास के लिये धनराशि की कोई कमी नहीं है। साथ ही जनजातीय सांस्कृतिक पहचान एवं विरासत को बनाये रखने के साथ ही विकास प्रक्रिया में हर स्तर पर उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने रविवार को एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदाय की गरिमा पुन: स्थापित हुई है। उभरती प्रतिभाओं को सम्मान मिला है। राज्य सरकार ने जनजातीय विदयार्थियों की शिक्षा के लिये पर्याप्त बजट प्रावधान किया है। शिक्षा के अलावा सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिये भी पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से शत-प्रतिशत अनुदान पर जनजातीय क्षेत्रों में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इन विद्यालयों में जनजातीय समुदाय के 2 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। राज्य सरकार ने अपने बजट 2026-27 में प्राथमिक शालाओं के अंतर्गत 4507 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। माध्यमिक शालाओं के अंतर्गत 2895 करोड़ रुपये और शासकीय हाई/हायर सेकेण्डरी शालाओं के अंतर्गत 1477 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। कक्षा 11 वीं, 12 वीं और महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना में एक लाख 92 हजार विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। उन्हें 348 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है। इस बार के बजट में उनके लिए 693 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सांदीपनि विद्यालय

जनसम्पर्क अधिकारी अवनीश सोमकुवर ने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा देने सांदीपनि विदयालयों के लिये 825 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये नवीन शिक्षा नीति के तहत 94 सांदीपनि विद्यालय संचालित किये जा रहे हैं। इनमें के.जी. वन से कक्षा 12 वीं तक के विद्यार्थियों को एकीकृत कर उनके सर्वांगीण विकास के लिये शिक्षा के साथ खेल-कूद एवं साहित्यिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। सांदीपनि विद्यालयों के नवीन भवन बनाये जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जनजातीय वियार्थियों के लिये आवास सहायता योजना में 198 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराया गया है। इस योजना में जिन विदयार्थियों को छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता उन्हें संभागीय मुख्यालयों में 2000 रुपये प्रतिमाह और जिला मुख्यालयों में 1250 रुपये प्रतिमाह और विकासखंड स्तर पर 1000 रुपये प्रतिमाह आवास भत्ता मिल रहा है। अत्यंत पिछड़ी जनजाति के लिये आहार अनुदान योजना के अंतर्गत 450 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। बैगा, भारिया एवं सहरिया परिवारों को कुपोषण से मुक्त करने उनके परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में 2017 से प्रतिमाह 1000 रुपये देना प्रारम्भ किया गया था। अब यह राशि बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह की गई है। वर्तमान में 2 लाख 28 हजार से ज्यादा महिलाओं को लाभान्वित किया गया है।

आकांक्षा योजना

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, जनजाति वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों को कक्षा 11 वीं एवं 12 वीं में अध्ययन करते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे- जे.ई.ई. एवं नीट की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थाओं के माध्यम से इन्दौर एवं भोपाल संभाग मुख्यालय पर कोचिंग दी जा रही है। छात्रावास/आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, बिजली, पानी, खेल-कूद सुविधाएं दी जाती है। भोजन व्यवस्था के लिए बालकों को 1650 रुपये और बालिकाओं को 1700 रुपये प्रतिमाह शिष्यवृत्ति मिल रही है। जनजातीय परिवारों के विद्यार्थियों की सुविधा के लिये सभी जनजातीय विकासखण्डों में छात्रावासों, आश्रमों का संचालन किया जा रहा है। इनके के संचालन से 11 हजार 420 आदिवासी विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।

शिक्षा के लिये बजट

उन्होंने बताया कि जनजातीय विदयार्थियों को शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाने के लिये बजट की कोई कमी नहीं है। सीनियर छात्रावास के अंतर्गत 538 करोड़़ रुपये, मप्र स्पेशल एंड रेसीडेंशियल अकादमिक सोसायटी के अंतर्गत 524 करोड रूपये, आश्रम के अंतर्गत 431 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 372 करोड़ रुपये, एकीकृत छात्रावास योजना में 322 करोड़ रुपये, जूनियर छात्रावास के लिये 225 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जिला प्रशासन के अंतर्गत 142 करोड रुपये, एच्छिक संस्थाओं को शैक्षणिक गतिविधियों के लिये अनुदान के उददेश्य से 128 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। छात्रवृत्ति योजना में कक्षा नवीं एवं दसवीं के अंतर्गत 125 करोड़ रुपये, 11वीं, 12वीं और महाविदयालय छात्रवृत्ति के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। क्रीड़ा परिसर के लिये 99 करोड़ रुपये हाई स्कूल के लिये 80 करोड़ और अुनुसूचित जनजाति छात्रवृत्ति के लिए 65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

जनजातीय क्षेत्रों में हुई तेज प्रगति

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, प्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, 81 कन्या शिक्षा परिसर एवं आठ आदर्श आवासीय विद्यालय जैसी विशिष्ट संस्थाएं संचालित है। कन्या शिक्षा परिसर का नाम माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर किया गया है। विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्र में पांच कंप्यूटर प्रशिक्षण कौशल विकास केंद्र छिंदवाड़ा, शिवपुरी, शहडोल, डिंडोरी और मंडला जिलों में संचालित है। प्रत्येक प्रशिक्षण केंद्र पर 100 विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से जनजातीय परिवारों की सामाजिक आर्थिक प्रगति में तेजी आई है।

उन्होंने बताया कि वन अधिकार अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन करते हुए दो लाख 70 हजार दावों को मान्यता दी गई है और तीन लाख 62 हजार से अधिक दावों का पुनः परीक्षण किया जा रहा है। इन परिवारों को उनके रीति-रिवाज के अनुसार ग्राम की व्यवस्थाओं के लिए हैबिटेट राइट्स दिए जा रहे हैं। अभी तक बैगा बहुल 23 गांवों तथा भारिया बहुल पातालकोट के 12 गांव शामिल कर 35 गांवों में हैबिटेट राइट्स दिए गए हैं। वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत 792 वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया गया है। धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान से जनजाति बहुल गांवों और आकांक्षा जिलों में जनजातीय परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। अभियान के अंतर्गत 51 जिलों के 267 विकाखंडों के 11 हजार से ज्यादा गांव में रहने वाले 18 लाख 58 हजार जनजातीय परिवारों की 93 लाख लाख 23 हजार जनसंख्या को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिए जा रहा है।

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा-अभियान-पीएम जनमन में 24 जिलों के जनजाति परिवारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसके अंतर्गत 9 मंत्रालयों की 11 अधोसंरचनात्मक एवं 7 हितग्राहीमूलक योजनाओं में विशेष पिछली जनजाति के हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। इन परिवारों के 10 लाख 99 हजार आधार कार्ड बनाए गए हैं और 5 लाख 96 हजार जन धन खाते खोले गए हैं। इसके अलावा 7 लाख 23 लाख आयुष्मान कार्ड और 10 लाख से ज्यादा जाति प्रमाण-पत्र बनाए गए हैं। लगभग 60 हजार किसान क्रेडिट कार्ड बनाए गए हैं और 8 हजार अधिकारियों को पीएम किसान सम्मान निधि दी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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