युवा सोच, तकनीकी समझ और नवाचार की क्षमता का शिक्षा व्यवस्था में करें उपयोग: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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युवा सोच, तकनीकी समझ और नवाचार की क्षमता का शिक्षा व्यवस्था में करें उपयोग: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- देश का भविष्य गढ़ने में युवा शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों की भूमिका अहमः मुख्यमंत्री

भोपाल, 05 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश का भविष्य गढ़ने में युवा शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा अधिकारियों और शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की मैदानी जिम्मेदारी सौंपी गई है। युवा ऊर्जा, नई सोच, तकनीकी समझ और नवाचार की क्षमता का उपयोग शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया जाये। प्रत्येक शिक्षा अधिकारी यह संकल्प लेकर कार्य करे कि जिले का परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक हो।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर इंदौर के सांदीपनि शासकीय अहिल्या आश्रम कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम ‘एजुकेशन डायलॉग’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर महान शिक्षक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए प्रदेश के सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम का विषय ‘आज का युवा, भविष्य का निर्माता-एजुकेशन डायलॉग, बेहतर शिक्षा के नए विचार’ था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों सहित 200 से अधिक युवा और शिक्षकों से सीधे संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने युवा शिक्षा अधिकारियों से सीधे संवाद करते हुए उनके अनुभवों, चुनौतियों, प्राथमिकताओं और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से यह भी जाना कि वे अपने जिलों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किस प्रकार काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा अधिकारियों को अपने जिले की स्थानीय परिस्थितियों, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और विद्यालयों की समस्याओं को समझते हुए परिणामोन्मुखी नेतृत्व करना चाहिए। स्थानीय समस्याओं के स्थानीय समाधान विकसित किए जाएं और जो नवाचार सफल हों, उन्हें दूसरे जिलों में भी लागू करने का प्रयास किया जाए।

उन्होंने कहा कि आज के युवा अधिकारी तकनीक को समझते हैं, तेजी से सीखते हैं और समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखने की क्षमता रखते हैं। यह क्षमता शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी ताकत है। युवा अधिकारी अपनी ऊर्जा और नवीन सोच का पूरा उपयोग विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में करें।

युवा सोच और तकनीकी समझ से आएगा शिक्षा में बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी तकनीक की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। आज एआई, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक तकनीक विद्यार्थियों के सीखने के नये अवसर उपलब्ध करा रही है। ऐसे में शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को भी समय के साथ अपनी योग्यता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बेहतर कर सकते हैं। डिजिटल माध्यमों के साथ विद्यार्थियों को विषय की समझ, तार्किक क्षमता, प्रश्न पूछने की आदत और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाये।

कोई भी बच्चा नहीं रहे पीछे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा अधिकारियों से कहा कि उनके कार्य की पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि उनके जिले में कोई भी बच्चा पीछे नहीं रहे। प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति पर नजर रखी जाए। कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए विशेष रणनीति बनाई जाए।

बच्चों की रुचि और योग्यता पहचानें शिक्षक

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि प्रत्येक बच्चें में अलग क्षमता और प्रतिभा होती है। शिक्षक विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और क्षमता को पहचानें तथा उसी के अनुरूप उनका मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा कि कई बार 10वीं के बाद विद्यार्थियों को यह पता नहीं होता कि आगे उन्हें किस विषय या क्षेत्र में पढ़ाई करनी चाहिए। ऐसे समय में शिक्षक उनके मार्गदर्शक बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों से आत्मीय संबंध बनाना जरूरी है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रहें, बल्कि उनके परिवार और सामाजिक परिस्थितियों को भी समझें। प्रत्येक बच्चे पर ध्यान दें और उसकी प्रगति का रिकॉर्ड रखें। विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों और कॅरियर विकल्पों की जानकारी दी जाए तथा आवश्यकता के अनुसार उनकी काउंसलिंग की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार बच्चों के स्कूल छोड़ने के पीछे पारिवारिक और सामाजिक कारण होते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जाने चाहिए। किसी कारण से यदि बच्चा नियमित विद्यालय नहीं जा पा रहा है तो उसे ओपन स्कूल जैसे वैकल्पिक माध्यमों की जानकारी दी जाए, जिससे उसकी शिक्षा बाधित न हो।

उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों और उनके परिवारों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दें। कई परिवारों को उपलब्ध योजनाओं और उनके लाभ की पूरी जानकारी नहीं होती। शिक्षक यदि परिवारों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं तो बच्चों और उनके परिवारों के विकास का रास्ता खुल सकता है।

शिक्षा का आधारभूत ढांचा होगा और मजबूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। प्रदेश के जिन विद्यालयों के पास पक्के भवन की सुविधा नहीं है, उन्हें पक्के भवन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को बस, साइकिल, गणवेश और मध्यान्ह भोजन सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक या सामाजिक कारणों से किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा प्रभावित नहीं हो और उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने कहा कि सभी विद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए जनभागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। समाज, अभिभावक और स्थानीय संस्थाएं विद्यालयों के विकास में भागीदार बनें। शिक्षा केवल सरकार या शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

शिक्षा विभाग में युवा नेतृत्व की नई शुरुआत

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर युवा अधिकारियों को सीधे मैदानी नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश में लगभग 40 नए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), 23 जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) और लगभग 60 विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पदस्थ किए गए हैं। इन युवा अधिकारियों की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। उन्होंने कहा कि यह युवा शक्ति केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में नई ऊर्जा, नई सोच और नए प्रयोगों को आगे बढ़ाने के लिए मैदानी स्तर पर उतरी है। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों को केवल निर्देशों के पालन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें परिणाम आधारित नेतृत्व करना होगा।

जिलों में किए जा रहे नवाचारों की दी जानकारी

संवाद कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। अधिकारियों ने विद्यालयों में इंटरैक्टिव पैनल के उपयोग, ऐप के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने, सीसीटीवी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम तथा सीएसआर के माध्यम से किए जा रहे नवाचारों के बारे में बताया।

अशोकनगर की जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले में विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए तैयार किए गए ‘रियाज’ ऐप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐप के माध्यम से विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाती है। अनुपस्थित विद्यार्थियों के अभिभावकों को ऐप के माध्यम से ऑटोमेटिक कॉल की जाती है। इसके बाद शिक्षक व्यक्तिगत रूप से भी अभिभावकों से संपर्क करते हैं। इस नवाचार से विद्यार्थियों के ड्रॉप आउट की समस्या को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की संभावना बताई। मुख्यमंत्री ने इस नवाचार की सराहना की।

इंदौर के जिला शिक्षा अधिकारी ने शासकीय विद्यालयों में एआई लैब की स्थापना तथा आईआईटी मद्रास के समन्वय से विद्यार्थियों के लिए आईटी क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों में किए जा रहे इन नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि अच्छे प्रयोगों को सभी जिलों के साथ साझा किया जाए।

शिक्षकों से कहा- विद्यार्थियों से आत्मीयता का रिश्ता बनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को परिवार के सदस्य की तरह समझकर आत्मीयता से व्यवहार करें। विद्यार्थियों को यह महसूस होना चाहिए कि शिक्षक उनकी समस्याओं को समझते हैं और उनके भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज में व्यापक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। एक शिक्षक के माध्यम से कई पीढ़ियों का भविष्य प्रभावित होता है, इसलिए शिक्षक अपने दायित्व को केवल नौकरी के रूप में न देखें, बल्कि इसे समाज निर्माण का अवसर मानें। उन्होंने शिक्षकों से अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने योगासन और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हुए कहा कि शिक्षक स्वस्थ रहेंगे तो विद्यालय और शिक्षा विभाग का वातावरण भी स्वस्थ एवं सकारात्मक रहेगा।

मुख्यमंत्री ने हिन्दी भाषा के इतिहास सहित विभिन्न विषयों पर भी अधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा की यात्रा लगभग एक हजार वर्ष पुरानी है। उन्होंने हिन्दी के विकास और शब्दावली को समृद्ध करने में वीर सावरकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘सांसद’, ‘विधायक’, ‘संसद’ और ‘महापौर’ जैसे शब्दों को स्थापित करने में उनका योगदान रहा है।

यहीं नहीं थमना है, निरंतर आगे बढ़ना है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त युवा अधिकारियों और शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यह उनकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहीं रुकना नहीं है, निरंतर आगे बढ़ना है और समाज के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि आपके माध्यम से कई पीढ़ियां आगे बढ़ेंगी। इसलिए अपनी मूल जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक तकनीक और नई सोच को अपनाना जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने अनुभव साझा करते रहें और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नए विचार सामने लाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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