गौरवशाली-प्राचीन स्थापत्य आज भी नये प्रयोग की प्रेरणा देती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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गौरवशाली-प्राचीन स्थापत्य आज भी नये प्रयोग की प्रेरणा देती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- अभियंता दिवस समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल, 15 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश की गौरवशाली प्राचीन स्थापत्य विरासत आज भी तकनीक के साथ नये प्रयोग की प्रेरणा देती है। अभियंता अपनी प्रतिभा, तकनीकी ज्ञान और नवाचार से विकास की संभावनाओं को धरातल पर साकार करते हैं। किसी नए मार्ग का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं देता, बल्कि वह उस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का नया द्वार खोलता है। अभियंताओं द्वारा तैयार की जाने वाली प्रत्येक परियोजना और डिजाइन में प्रदेश के भविष्य की आर्थिक संरचना की परिकल्पना निहित होती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अभियंता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर राज्य स्तरीय समारोह का शुभारंभ किया। समारोह वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री ने सर विश्वेश्वरैया के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि सर विश्वेश्वरैया ने अपनी दूरदृष्टि, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र सेवा के भाव से जल प्रबंधन, सिंचाई, औद्योगिक विकास तथा संस्थागत निर्माण के क्षेत्र में ऐसे कार्य किए, जिनका लाभ देश को आज भी मिल रहा है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति का विजन और संकल्प पूरे देश के विकास को नई दिशा दे सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महान सिविल इंजीनियर भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर प्रदेश के सभी अभियंताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग सर्कुलर्स के संकलन का किया विमोचन

मुख्यमंत्री ने समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं, अधिकारियों, संयुक्त दलों और निर्माण एजेंसियों को 5 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग और सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल के बीच टिकाऊ अधोसंरचना निर्माण के लिए एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के गत 10 वर्ष के सर्कुलर्स के संकलन के कम्पेडियम का विमोचन भी किया।

भारत की स्थापत्य परंपरा प्राचीन काल से ही रही है समृद्ध

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियंता उपलब्ध संसाधनों, ज्ञान और अपनी योग्यता का समन्वय कर उनकी क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। प्रकृति के पंचतत्वों और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग से वे समाज के लिए ऐसी स्थायी संरचनाओं का निर्माण करते हैं, जो पीढ़ियों तक उपयोगी रहती हैं। भारत की स्थापत्य परंपरा प्राचीन काल से ही समृद्ध रही है। एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर मंदिर, प्राचीन जल संरचनाएं तथा जीवंत प्रतीत होने वाली शिल्पकृतियां तत्कालीन अभियंताओं और शिल्पकारों की असाधारण तकनीकी दक्षता का परिचय देती हैं। मध्यप्रदेश की प्राचीन स्थापत्य विरासत ने देश के लोकतांत्रिक भवनों की वास्तुकला को भी प्रेरणा दी है। यह गौरवशाली विरासत आज के अभियंताओं को आधुनिक तकनीक के साथ नए प्रयोग करने की प्रेरणा देती है।

महापुरुषों के नाम पर पुरस्कार विभाग की अभिनव पहल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंताओं को 5 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान करने की अभिनव पहल के लिए लोक निर्माण विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया पुरस्कार, विश्वकर्मा पुरस्कार, विक्रमादित्य पुरस्कार, रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरस्कार और राजा भोज पुरस्कार के माध्यम से विभाग ने भारत की ऐतिहासिक विभूतियों के योगदान को आधुनिक निर्माण व्यवस्था से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी नवाचार, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण और जनहित के प्रति अभियंताओं की प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेंगे। वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त अभियंताओं का सम्मान विभाग की गौरवशाली परंपरा और उनके दीर्घकालीन योगदान के प्रति आदर का प्रतीक है।

नवाचार करने वाले अभियंताओं के साथ है सरकार

मुख्यमंत्री ने सीमेंटरहित कंक्रीट सहित पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री और आधुनिक तकनीकों पर किए जा रहे प्रयोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग नई तकनीक, अनुसंधान और नवाचारों को अपनाकर देश के अग्रणी विभागों में अपनी पहचान बना रहा है। विभाग की उपलब्धियां पूरी टीम की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। मुख्यमंत्री ने अभियंताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे निर्भय होकर जनहित में नवाचार करें, राज्य सरकार हर सकारात्मक पहल में उनके साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का आत्मविश्वास और वैश्विक प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है। विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में अभियंताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम को लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, सेवानिवृत्त अभियंता, निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अभियंता दिवस पर उत्कृष्ट अभियंताओं एवं निर्माण एजेंसियों का हुआ सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंता दिवस पर अधोसंरचना निर्माण के क्षेत्र में गुणवत्ता, समयबद्धता, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, अभियंताओं, संयुक्त दलों एवं निर्माण एजेंसियों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया। मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया पुरस्कार से मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम, भोपाल के संभागीय प्रबंधक ईश्वर सिंह चंदेली, मध्यप्रदेश भवन विकास निगम, जबलपुर के उप महाप्रबंधक मानवेंद्र सिंह सेंगर, लोक निर्माण विभाग, जबलपुर के कार्यपालन यंत्री (भवन) मनीष कुमार शर्मा तथा पीडब्ल्यूडी संधारण संभाग क्रमांक-2, भोपाल के प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी एच.एन. त्रिपाठी को सम्मानित किया गया।

विश्वकर्मा पुरस्कार मेसर्स वी.वी.सी.एम.के.एस. प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अग्रवाल कंस्ट्रक्शन वर्क्स, मेसर्स एपेक्स स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड तथा मेसर्स गौर रोड टारकोट प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर को प्रदान किया गया। विक्रमादित्य पुरस्कार मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, ग्वालियर के संयुक्त दल को प्रदान किया गया। इस दल में संभागीय प्रबंधक राजेश दायमा, संभागीय प्रबंधक हर्षिता वार्ष्णेय, उप महाप्रबंधक शशांक शर्मा और प्रबंधक दीपक नामदेव शामिल रहे। इसी श्रेणी में लोक निर्माण विभाग, संभाग सागर के संयुक्त दल को भी सम्मानित किया गया, जिसमें कार्यपालन यंत्री साहित्य तिवारी और उपयंत्री अनिल श्रीवास्तव शामिल रहे।

रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरस्कार लोक निर्माण विभाग, श्योपुर के कार्यपालन यंत्री पुष्कल प्रताप को प्रदान किया गया। राजा भोज पुरस्कार से मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के संयुक्त दल को सम्मानित किया गया। इस दल में तत्कालीन उप महाप्रबंधक मोहन किशोर परमार और प्रबंधक महेंद्र डोलिया शामिल रहे। इसी पुरस्कार से लोक निर्माण विभाग के संयुक्त दल को भी सम्मानित किया गया, जिसमें कार्यपालन यंत्री शिवेंद्र सिंह, कार्यपालन यंत्री हृदेश आर्य और उपयंत्री रामसिंह रघुवंशी शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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