पारंपरिक जल स्रोतों के गहरीकरण और सफाई में सभी नागरिक करें सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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पारंपरिक जल स्रोतों के गहरीकरण और सफाई में सभी नागरिक करें सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


पारंपरिक जल स्रोतों के गहरीकरण और सफाई में सभी नागरिक करें सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- गंगा दशहरा 25 मई को पानी सहेजने के लिए प्रदेशवासियों से श्रमदान की अपील

भोपाल, 01 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाज से जल गंगा संवर्धन अभियान से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का आधार है। भारतीय संस्कृति में जल स्त्रोतों की साफ-सफाई और उनके संरक्षण को पुण्य कार्य मानते हुए धार्मिक महत्व प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को जारी संदेश में कहा कि कुंओं-बावड़ियों-तालाबों-नदियों जैसे जल स्त्रोतों की साफ-सफाई और जल स्त्रोतों के आस-पास पौध-रोपण से जनसामान्य को जोड़ने के लिए 25 मई गंगा दशहरा पर अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इसके लिए सभी गांवों, नगरों के सभी वार्डों में जनसामान्य को सामूहिक श्रमदान के लिए प्रेरित किया जाएगा।

जिलों की रैकिंग में डिण्डोरी और खण्डवा देश में रहे सबसे आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण अभियान में वृहद स्तर पर गतिविधियां जारी हैं। सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संचय भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम रहा। अभियान के अंतर्गत 5 लाख 64 हजार 119 कार्य पूर्ण किये गये, जो द्वितीय स्थान पर रहे, आंध्रप्रदेश से लगभग 76 हजार अधिक थे। छतीसगढ, बिहार और उत्तरप्रदेश क्रमश: तीसरे चौथे एवं पांचवे स्थान पर रहें। प्रदेश के डिंडोरी जिले ने 1 लाख 47 हजार 217 और खण्डवा जिले ने 87 हजार 740 कार्य पूर्ण कर देश में पहला और दूसरा स्थान प्राप्त किया।

जनसहयोग से लग रहे प्याऊ लगाने और हो रही कुंओं-तालाबों की सफाई

प्रदेश में प्याऊ लगाने, तालाबों-कुंओं की साफ-सफाई और नगर सौन्दर्यीकरण के लिए जनसहयोग से वृहद स्तर पर व्यापक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। नगरीय निकायों में अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 54 जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया गया। नदियों में मिलने वाले नालों के शुद्धिकरण कार्य का क्रियान्वयन 45 स्थानों पर आरंभ हो चुका है। प्रदेश में 220 तालाबों, 348 कुंओं, 90 बावड़ियों और 199 घाटों को अतिक्रमण मुक्त कर उनका संवर्धन किया गया। इसी क्रम में 734 नाले-नालियों की साफ-सफाई और सौन्दर्यीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। नगरीय निकायों में 3 हजार 40 रैन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां स्थापित की गई हैं। प्रत्येक नगर निगम में 10 और अन्य निकायों में 5 प्याऊ स्थापित किया गए हैं। पूरे प्रदेश में लगभग 1 हजार से अधिक प्याऊ जनसेवा के कार्य में लगे हैं। नगरीय निकायों में 16 हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं। व्यापक स्तर पर पौध-रोपण की तैयारी जारी है।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत संचालित गतिविधियों में प्रथम 5 जिले

बैतूल - पहला

अशोक नगर- दूसरा

बालाघाट- तीसरा

डिण्डोरी- चौथा

नरसिंहपुर- पांचवा

गांवों में 6 हजार 232 करोड़ की लागत से होंगे लगभग ढाई लाख कार्य

जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 2 लाख 43 हजार 887 कार्यो के लिये 6 हजार 232 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में 45 हजार 132 खेत तालाब 68 अमृत सरोवर 77 हजार 975 डगवेल रिचार्ज और सिंचाई अधोसरंचना से संबंधित 824 कार्य पूर्ण कर लिये गये है। जल संरक्षण और रिचार्ज से जुडे़ 20 हजार 160 कार्य, वॉटर शेड से संबंधित 3 हजार 324 कार्य और मरम्मत तथा रख-रखाव के 1 हजार 841 कार्य पूर्ण किये जा चुके है। जल संचय जन भागीदारी के अंतर्गत 5 लाख 54 हजार 549 कार्य पंजीकृत किये गये। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यो को पूर्ण करने में खण्डवा, खरगौन, डिण्डोरी, राजगढ़ एवं बालाघाट क्रमश: प्रदेश में अग्रणी रहे।

पेयजल स्त्रोतों की गुणवत्ता परीक्षण और नलों व पाइपों के लीकेज सुधारने पर भी हो रहा है कार्य

स्कूल, आंगनवाड़ी इत्यादि के पेयजल स्त्रोतों के गुणवत्ता परीक्षण के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। नलों, पाइप लाईनों के लीकेज सुधारने, पेयजल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई रखने के लिए जागरूकता संबंधी गतिविधियों का भी संचालन किया जा रहा है। विभाग के अंतर्गत गतिविधियों के संचालन में निवाड़ी, आगर-मालवा, बुरहानपुर, हरदा और ग्वालियर टॉप पर रहे हैं।

वन भूमि में बोल्डर चेक डेम, परकोलेशन टैंक, कंटूर निर्माण और पौध-रोपण से करेंगे वर्षा जल का संरक्षण

प्रदेश में वन भूमि का क्षेत्रफल व्यापक है और वन क्षेत्र में विशेष रूप से वर्षा जल संरक्षण की असीम संभावनाएं विद्यमान है। वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वन भूमि पर कार्य के पहले वन विभाग से अनुमति लेना आवश्यक होता है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वन भूमि पर कार्यों को गति देने के लिये नवाचार करते हुए ऑनलाईन ऐप विकसित किया गया। इससे वन भूमि पर कार्यो की अनुमति की प्रक्रिया सुगम बनाने में मदद मिली और ऑनलाईन ट्रैकिंग भी संभव हुई।

वन्य जीवों के लिए तालाबों और झिरिया से होगी पानी की व्यवस्था

प्रदेश में वन विभाग की एक लाख 37 हजार 800 हेक्टेयर क्षेत्र में 130 करोड़ रूपए की लागत से भू-जल संरक्षण कार्य के लिए बोल्डर चेक डेम, परकोलेशन टैंक, कंटूर निर्माण द्वारा जल संग्रहण क्षेत्र उपचार की योजना है। वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तालाब-झिरिया-स्टॉपडेम निर्माण की 129 गतिविधियां संचालित की गई हैं। अविरल निर्मल नर्मदा योजना में 5 हजार 650 हैक्टेयर क्षेत्र में 70 करोड़ रूपए की लागत से वर्षा ऋतु में पौधरोपण एवं भू-जल संरक्षण के कार्य किए जाएंगे। इसी प्रकार एक लाख 16 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं में पौध-रोपण और भू-जल संरक्षण के लिए 820 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

समाज में स्कूल, कॉलेजों और नवांकुर संस्थाओं से बन रहा है पानी सहेजने का माहौल

जल गंगा संवर्धन अभियान में जन-जन को जोड़ने के लिए गतिविधियां संचालित की जा रही है। इसमें स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और जन अभियान परिषद विशेष रूप से सक्रिय है। प्रदेश के 1 हजार 344 विद्यालयों में जल संरक्षण पर रैली, निबंध लेखन, पोस्टर मेकिंग, रंगोली प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, 14 हजार 910 विद्यालयों में जल संरक्षण के लिए शपथ दिलाने के साथ-साथ परिचर्चा और संवाद भी हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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