स्वदेशी वस्तुएं खरीदने से छोटे उद्यमियों को मिलता है प्रोत्साहन : हेमंत खंडेलवाल

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स्वदेशी वस्तुएं खरीदने से छोटे उद्यमियों को मिलता है प्रोत्साहन : हेमंत खंडेलवाल


स्वदेशी वस्तुएं खरीदने से छोटे उद्यमियों को मिलता है प्रोत्साहन : हेमंत खंडेलवाल


भोपाल, 26 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि स्वदेशी वस्तुएं खरीदना केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलता है। जब हम स्वदेशी उत्पाद खरीदते हैं, तो उस उत्पाद को बनाने में लगे लोगों के श्रम और उद्यम को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।

खंडेलवाल सोमवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे 12 दिवसीय स्वदेशी मेले को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन की ओर से 24 अक्टूबर से 4 नवंबर तक आयोजित मेले में देश में बने उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। मेले का उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को लोगों तक पहुंचाना और स्थानीय उद्यमियों व शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराना है।

खंडेलवाल ने कहा कि करीब एक हजार वर्ष पहले विश्व के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत थी, लेकिन बाद में मुगलों और अंग्रेजों के शासनकाल में देश की संपत्ति लूटी गई। उन्होंने कहा कि 1947 में स्वतंत्रता के समय भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाएं लगभग समान थीं, जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन से अधिक थी। बाद के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति में बदलाव आया।

उन्होंने लोगों से अपील की कि कोई भी सामान खरीदने से पहले एक मिनट रुककर यह जरूर सोचें कि उसे बनाने में अपने देश के लोगों का कितना श्रम लगा है। यदि हम स्वदेशी उत्पादों को अपनाएंगे, तो उनके निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

स्वदेशी अपनाना राष्ट्रभक्ति का हिस्सा: अनिल श्रीवास्तव

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत मध्य भारत प्रांत के उपाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन के अंतर्गत स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। स्वदेशी अपनाने की परंपरा पुरानी है। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओं ने भी देशी वस्तुओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया था।

श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 1992 में उदारीकरण का दौर शुरू होने पर दत्तोपंत ठेंगड़ी ने इसके सांस्कृतिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी। प्रधानमंत्री ने भी विदेशी बाजारों के प्रभाव से बचने के लिए स्वदेशी अपनाने की बात कही है। स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करना राष्ट्रभक्ति का एक रूप है।

छोटे शिल्पकारों को स्वावलंबन का अवसर: लाल सिंह आर्य

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा कि देशभर में स्वदेशी मेले के माध्यम से छोटे उद्यमियों और शिल्पकारों को स्वावलंबी बनने का अवसर मिल रहा है। इन मंचों से जुड़े लोग राष्ट्रसेवा का कार्य कर रहे हैं और उनके प्रयासों से हजारों लोगों को रोजगार तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

आर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर को खादी अपनाने का आह्वान किया था। महात्मा गांधी भी खादी को बढ़ावा देते थे। प्रधानमंत्री के आह्वान से छोटे कलाकारों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन मिला है और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर भी देश में बदलाव लाया जा सकता है। यदि लोग छोटे कलाकारों की बनाई वस्तुएं खरीदेंगे, तो उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा। हाथ से बनी कलाकृतियां अपनी अलग पहचान रखती हैं। छोटे कलाकारों को सम्मानित करने और उनकी वस्तुओं को खरीदने से उनका मनोबल बढ़ता है और देश की आर्थिक मजबूती में उनका योगदान सामने आता है।

कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, श्रीकांत बुधोलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी और विनय कुमार सोनी, शोभराज सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

स्वदेशी मेले में श्लोक, भगवान के नाम और दोहा प्रतियोगिता आयोजित

मेले के तीसरे दिन के कार्यक्रम में श्लोक, भगवान के नाम और दोहा प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता की प्रभारी अनीता आर्य और सह प्रभारी निवेदिता व्यास रहीं। मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम की प्रभारी मनीषा चौरसिया रहीं। प्रस्तुतियों के माध्यम से देश के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक नृत्य परंपराओं को मंच पर प्रदर्शित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

Livevns.news Desk
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