भोपाल में भी पानी में मिला 'ई-कोलाई' बैक्टीरिया, इससे इंदौर में गई 20 लोगों की जान

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भोपाल में भी पानी में मिला 'ई-कोलाई' बैक्टीरिया, इससे इंदौर में गई 20 लोगों की जान


भोपाल में भी पानी में मिला 'ई-कोलाई' बैक्टीरिया, इससे इंदौर में गई 20 लोगों की जान


- खानूगांव और ईदगाह हिल्स क्षेत्र की 15 हजार आबादी पर खतरा

भोपाल, 08 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी के लोग भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। यहां खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर का ग्राउंड वाटर दूषित निकला है। यहां से लिए गए चार सैंपल फेल हो गए हैं। पानी में 'ई-कोलाई' बैक्टीरिया मिला है। यही बैक्टीरिया इंदौर के भागीरथपुरा में मिला था, जिसके चलते अब तक 20 जानें जा चुकी हैं। हालांकि, भोपाल नगर निगम के अफसर कर रहे हैं कि ये सप्लाई का नहीं बल्कि ग्राउंड वाटर है। इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।

खानूगांव समेत आसपास के क्षेत्रों में करीब 15 हजार की आबादी गंदा पानी पी रही है। नगर निगम की खुद की जांच में खानूगांव और ईदगाह हिल्स इलाके से लिए गए चार नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। गुरुवार को ही नगर निगम ने 46 लीकेज सुधारे और 133 स्थानों पर सीवेज चैंबर भी साफ करवाए। कुल 338 पानी के सैंपल की जांच 8 लैब में कराई गई। ताकि, गंध, रंग, स्वाद, रेसिड्‌डअल क्लोरीन, पीएच, टरबीलिटी व बैक्टीरिया के बारे में पता चल सके। निगम ने कचरा जलाने पर मनोरिया अस्पताल पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी किया। वहीं, मान सरोवर स्थित कॉम्पलेक्स में दो दुकानों पर भी बकाया राशि होने पर कार्रवाई की गई।

जानकारी के अनुसार, खानूगांव के जिस कुएं से निचली बस्तियों में पेयजल की आपूर्ति हो रही है, उसमें 10-15 दिनों से सीवर का पानी मिल रहा है। यह पानी इतना खतरनाक है कि पीने का छोड़िए नहाने से भी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है। स्थानीय नागरिक वसीम खान ने बताया कि उन्होंने एक दिन कुएं के पानी से अपनी बच्ची को नहला दिया था। उसके बाद से उसकी तबीयत खराब है शरीर में फोड़े हो गए हैं। अन्य रहवासियों ने बताया कि 50 साल पुराना कुआं है। खानूगांव के निचले इलाकों में इसी से पानी की सप्लाई निगम करता है। खानूगांव में नर्मदा की पाइपलाइन पहुंची है, लेकिन निचली बस्तियों तक इसका पानी नहीं पहुंचता। ऐसे में पुराने कुएं से पानी वहां भेजा जाता है।

निगम ने कुछ समय पहले एक उसके पास ही एक सीवेज लाइन डाली थी, जो 10-15 दिन पहले फूट गई। रहवासियों ने शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अखबार में छपा तो नगर निगम का अमला पहुंचा। बुधवार को वहां पानी की जांच हुई जिसमें ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। स्थानीय रहवासी रूबीना खान ने बताया कि जब से कुएं के पानी से बदबू आ रही थी, उसी दिन से कुएं का पानी छोड़ दिया। कुछ दिनों तक निस्तारी के लिए उसका इस्तेमाल किया, लेकिन अब बदबू बढ़ने लगी तो उसे पूरी तरह छोड़ दिया। आसपास के सभी लोग पीने का पानी खरीदकर मंगा रहे हैं। निस्तार के लिए पानी कुप्पियों में ढोकर लाया जा रहा है।

नगर निगम के हाउसिंग फॉर ऑल के तहत ईदगाह हिल्स में विकसित बाजपेयी नगर बदहाली की गिरफ्त में है। यहां की करीब 15 हजार आबादी पिछले चार साल से दूषित पानी पी रही है। पानी की लाइन सीवेज में डूबी हुई है। हर महीने शिकायतें करते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती थी। इंदौर कांड के बाद यहां पहली बार पानी की जांच हुई तो ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। खानूगांव निवासी अब्दुल आहत के अनुसार कुएं के पास से पंप हाउस ले जाने के लिए सीवेज लाइन डाली गई थी। वह टूट गई है उसी की गंदगी कुएं में मिल रही थी, जिससे कुएं का पानी दूषित हुआ है।

मोहम्मद यूसुफ और असद खान ने बताया कि शिकायत करते हैं कि पानी गंदा आ रहा है, लेकिन सुनवाई नहीं होती। निगम के अधिकारी देखने तक नहीं आते थे। बाजपेयी नगर के शहजाद खान और मुश्ताक खान का कहना है कि पाइप लाइन सीवेज की गंदगी में डूबी हुई है, 15 हजार आबादी पिछले चार सालों से दूषित पानी पी रही है। इंदौर कांड के बाद नगर निगम का अमला प्रत्येक दिन 200 से अधिक नमूनों की जांच कर रहा है, लेकिन इसमें भी केवल खानापूर्ति हो रही है। केवल पानी की गुणवत्ता को रंग, गंध, स्वाद, क्लोरीन और बैक्टीरिया की मौजूदगी के आधार पर मापा जा रहा है।

इस मामले में नगर निगम अफसरों का कहना है कि आदमपुर छावनी, बाजपेई नगर और खानूगांव क्षेत्र में भूजल आधारित जल स्त्रोतों से वाटर सप्लाई नहीं किया जा रहा है। इन इलाकों में लोग भूजल स्रोतों के पानी का इस्तेमाल न करें। बुधवार को कुल 250 वाटर सैंपल का परीक्षण किया गया था, गुरुवार की इनकी रिपोर्ट आई, जिनमें से 4 नमूनों में बैक्टीरिया मिला है। इन 4 सैंपल में से 2 आदमपुर खंती के पास, 1 सैंपल वाजपेयी नगर के पास नलकूप और 1 सैंपल खानूगांव कुएं में मिला था।

दरअसल, आदमपुर कचरा खंती के एक किमी दायरे के 5 गांव हैं। यहां के 4 हजार से ज्यादा लोग शुद्ध हवा और पानी को तरस रहे हैं। करीब 800 मीटर दायरे में भूजल और हवा दूषित हो चुकी है। खेतों में मिट्टी की उत्पादन क्षमता घट गई है। इसे लेकर कई बार विरोध हो चुका है। पर्यावरणविद एनजीटी में याचिका भी दाखिल कर चुके हैं।

भोपाल की नवाब कॉलोनी में गुरुवार को कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला समेत कई कांग्रेसी पहुंचे। उन्होंने कहा कि यहां के लोग करीब 5 साल से सीवेज मिला दूषित जल पीने को मजबूर हैं। शिकायतें करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भोपाल में भी इंदौर की तरह अनहोनी होने की आशंका बनी हुई है। निगम प्रशासन केवल खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।

भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेयजल आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने सभी जिलों के जिला पंचायत सीईओ, मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल की टेस्टिंग प्रतिदिन होनी चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पानी के संबंध में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का तत्काल निराकरण हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के संबंध में पेयजल गुणवत्ता परीक्षण, पुरानी लाइनों के सर्वेक्षण करें। यदि उन्हें बदलने या दुरुस्त करने की गुंजाईश है तो तुरंत किया जाना होगा। उन्होंने कहा कि सभी अपने जिले के अंतर्गत आने वाले वाटर फिल्टर प्लांट की टेस्टिंग नगरीय निकाय के साथ मिलकर की जानी चाहिए, इसकी मॉनीटरिंग भी करें। पीएचई विभाग द्वारा जिलों में किए जा टेस्टिंग की भी समीक्षा की। सभी सीईओ को निर्देश दिए कि जिला पंचायत के दौरे के दौरान पेयजल व्यवस्था अनिवार्य रूप से हो।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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