भोपालः ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में जोखिम भरे निर्माण, 853 नोटिस जारी
- विद्युत सुरक्षा को लेकर एमपी ट्रांसको चलाएगा जागरूकता अभियान
भोपाल, 02 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अति उच्च दाब (ईएचटी) ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में हो रहे निर्माण पर नोटिस जारी किये गए हैं। शहर की तीन प्रमुख 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) क्षेत्र में सामने आए मानव जीवन के लिये खतरा बने निर्माणों के संबंध में अब तक 853 नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
यह जानकारी सोमवार को मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी( एमपी ट्रांसको) भोपाल के अधीक्षण अभियंता सुधीर नेमा ने दी। उन्होंने बताया कि बताया कि एमपी ट्रांसको ने इन निर्माणों से संभावित विद्युत दुर्घटनाओं को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने और संबंधित निर्माणकर्ताओं को सुरक्षा मानकों की जानकारी देने की तैयारी की है।
तीन प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों का मामला
अधीक्षण अभियंता नेमा ने बताया कि भोपाल में जिन तीन 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के आरओडब्ल्यू क्षेत्र में निर्माण के मामले सामने आए हैं, उनमें गोविंदपुरा भोपाल-बैरागढ़ टैप लालघाटी, भोपाल-आईटी पार्क और भोपाल-अमरावतखुर्द ट्रांसमिशन लाइन शामिल हैं। इन लाइनों के आसपास विभिन्न स्थानों पर निर्माण होने से निर्धारित विद्युत क्लियरेंस बनाए रखने की चुनौती सामने आई है।
ये क्षेत्र हैं जोखिम भरे
उन्होंने बताया कि भोपाल में गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, करोंद, नारियलखेड़ा, देवकीनंदन नगर, बैरागढ़, आनंद नगर, जैन कॉलोनी कलियासोत, रतनपुरऔर आसपास के क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक तेजी से शहरी विस्तार हुआ है। यहां पर ट्रांसमिशन लाइन के प्रतिबंधित कारीडोर में नियम विरुद्ध निर्माण कर लिए गए हैं।
853 नोटिस जारी, अब कार्रवाई की तैयारी
कंपनी संबंधित निर्माणकर्ताओं को विद्युत सुरक्षा प्रावधानों की जानकारी देने के साथ स्थानीय प्रशासन के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चलाएगी। संभावित विद्युत दुर्घटनाओं और व्यवधानों की रोकथाम के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कंपनी ने नागरिकों से प्रतिबंधित कॉरिडोर में निर्माण नहीं करने और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है।
132 केवी के लिए 27 और 220 केवी के लिए 35 मीटर सुरक्षा कॉरिडोर
निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार, 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर और 220 केवी लाइन के दोनों ओर 35 मीटर का प्रतिबंधित कॉरिडोर निर्धारित है। इन क्षेत्रों में निर्धारित मानकों के विपरीत निर्माण होने पर गंभीर विद्युत जोखिम पैदा हो सकते हैं। तेज हवा में तारों के झूलने अथवा अन्य परिस्थितियों में भवनों और संरचनाओं के नजदीक विद्युत आर्क बनने से भी जानलेवा दुर्घटना की आशंका रहती है। इसके अलावा ऐसे निर्माण ट्रांसमिशन लाइनों के रखरखाव और निर्बाध विद्युत आपूर्ति में भी बाधा बन सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

