भोपालः नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का डीजीपी की उपस्थिति में समापन

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भोपालः नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का डीजीपी की उपस्थिति में समापन


- अपराध की सूचना से अंतिम न्याय तक की पूरी प्रक्रिया 14 विशेष जोन में हुई प्रदर्शित

भोपाल, 07 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नवीन न्याय संहिताओं को आमजन के लिए सरल, सहज एवं व्यावहारिक रूप में समझाने के उद्देश्य से भेल दशहरा मैदान में आयोजित पांच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी का बुधवार देर शाम पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा की उपस्थिति में समापन हुआ।

इस अवसर पर डीजीपी मकवाणा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 3 अक्टूबर के दौरे की सूचना के बाद प्रदर्शनी के आयोजन के लिए मात्र छह दिन का समय मिला था। सीआईडी टीम ने लगातार अवकाश के दिनों में कार्य करते हुए रूपरेखा तैयार की और इवेंट एजेंसी ने केवल दो दिनों में प्रदर्शनी का सेटअप तैयार किया। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में इतने बड़े स्तर का आयोजन टीमवर्क और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

डीजीपी मकवाणा ने विशेष रूप से आरक्षकों कीसराहना करते हुए कहा कि अंतिम समय में ब्रीफिंग मिलने के बावजूद उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ आगंतुकों को नवीन कानूनों एवं आधुनिक पुलिसिंग की जानकारी दी। उन्होंने स्वयं भी परिवार के साथ सामान्य नागरिक के रूप में प्रदर्शनी का अवलोकन कर पूरी प्रक्रिया को समझा। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने प्रदर्शनी में अपराध की सूचना से लेकर पुलिस कार्रवाई, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी व्यवस्था को एक ही मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किए जाने की सराहना की। समापन अवसर पर प्रदर्शनी को सफल बनाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सीआईडी, फिंगरप्रिंट टीम, डॉग स्क्वाड, पुलिस स्टेशन टीम सहित विभिन्न अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रदर्शनी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रावधानों को केवल पुस्तकीय जानकारी तक सीमित न रखते हुए पुलिस, फॉरेंसिक, चिकित्सा, अभियोजन, न्यायपालिका एवं जेल प्रशासन की समन्वित कार्यप्रणाली के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। 14 विशेष जोन में मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो, लाइव डेमो और सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से नागरिकों को आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली की पूरी कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला।

अंतिम दिन अभियोजन एवं न्यायालय चरण का सजीव मंचन

प्रदर्शनी के अंतिम दिन तृतीय चरण—अभियोजन तथा न्यायालय चरण को विशेष रूप से सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें विवेचना के बाद प्रकरण के अभियोजन तक पहुंचने, अभियोजन की भूमिका, न्यायालयीन कार्यवाही तथा अंतिम न्याय तक पहुंचने की प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया गया। इस सजीव प्रस्तुति में CCTNS एवं ICJS सहित आधुनिक डिजिटल प्रणालियों की भूमिका को भी प्रदर्शित किया गया। प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न चरणों के बीच डिजिटल सूचना एवं कार्यप्रणाली का समन्वय प्रकरण के त्वरितएवं व्यवस्थित निराकरण में सहायक बनता है।

रंगमंचीय प्रस्तुति से समझाई ‘घटना से न्याय तक’ की पूरी प्रक्रिया

प्रदर्शनी के लिए अपराध अनुसंधान विभाग के तत्वावधान में तैयार की गई रंगमंचीय प्रस्तुति में घटना घटित होने से लेकर पुलिस सहायता, पुलिस थाने की कार्यप्रणाली, अपराध की खोजबीन एवं विश्लेषण, चिकित्सकीय सहायता, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक परीक्षण, अभियोजन तथा न्यायालयीन कार्यवाही तक की पूरी प्रक्रिया को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में नवीन न्याय संहिताओं एवं आधुनिक न्याय प्रणाली के व्यावहारिक उपयोग को भी दर्शाया गया। रंगमंचीय प्रस्तुति का निर्देशन श्री आनंद यादव द्वारा किया गया। सीमित समय में प्रस्तुति को तैयार कर आमजन के लिए प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत करने में उनके परिश्रम, लगन एवं रचनात्मक योगदान की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सराहना की गई।

डायल-112 से लेकर साइबर सुरक्षा तक तकनीक आधारित पुलिस सेवाएं

प्रदर्शनी में डायल-112 के माध्यम से आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर सूचना संकलन, डिस्पैच, पुलिस रिस्पॉन्स एवं वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग तक की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया गया। साइबर सुरक्षा जोन में ऑनलाइन ठगी से बचाव, 1930 पर तत्काल सूचना, साइबर फ्रॉड के ‘गोल्डन ऑवर’, E-Zero FIR तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार से संबंधित जानकारी दी गई। नागरिकों को साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने और समय पर शिकायत करने के लिए जागरूक किया गया।

‘ऑपरेशन मुस्कान’ और महिला हेल्प डेस्क की जानकारी भी दी गई

प्रदर्शनी में ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के माध्यम से गुम हुए बालक-बालिकाओं की तलाश, तकनीकी विश्लेषण, CCTV, अंतरराज्यीय समन्वय एवं उन्हें सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की पुलिस कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध पुलिस सहायता, विधिक अधिकारों एवं संवेदनशील प्रथम संपर्क व्यवस्था को भी प्रदर्शित किया गया।

विद्यार्थियों और युवाओं ने प्रदर्शनी को बताया उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक

पांच दिनों के दौरान नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं की प्रदर्शनी में उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक विज्ञान, डायल-112, पुलिसिंग, अभियोजन एवं न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़े प्रदर्शन देखे तथा लाइव क्विज में भी सहभागिता की। युवा आगंतुकों ने आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक अनुसंधान, नागरिक सुरक्षा एवं न्याय प्रक्रिया से जुड़ी प्रस्तुतियों को उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं सीखने का बेहतर अनुभव बताया।

आमजन को कानून और न्याय व्यवस्था से जोड़ने की अभिनव पहल

नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित यह प्रदर्शनी केवल कानूनों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि आमजन को यह समझने का अवसर दिया कि किसी घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस किस प्रकार कार्रवाई करती है, वैज्ञानिक साक्ष्य किस प्रकार जुटाए एवं परखे जाते हैं, अभियोजन की भूमिका क्या होती है और न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से प्रकरण अंतिम न्याय तक किस प्रकार पहुंचता है।

प्रदर्शनी के माध्यम से तकनीक-सक्षम, वैज्ञानिक, समन्वित एवं नागरिक-केंद्रित आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली को सरल भाषा, डिजिटल तकनीक और सजीव नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया गया। पांच दिवसीय आयोजन की यही विशेषता रही कि कानून को पढ़ने के साथ-साथ उसे देखने, समझने और अनुभव करने का अवसर नागरिकों, विद्यार्थियों एवं युवाओं को मिला।

इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव, उप पुलिस महानिरीक्षक साकेत प्रकाश पाण्डेय, प्रशांत खरे, एस ओ टू डीजीपी मलय जैन, सहायक पुलिस महानिरीक्षक मनीष खत्री, संतोष भदौरिया उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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