मप्र: भोपाल में बाल कल्याण समितियों के लिए 13 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
134 प्रतिभागियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण, 4 चरणों में होगा प्रशिक्षण
भोपाल, 05 जून (हि.स.)। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तत्वावधान में देश में बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक संवेदनशील और मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय प्रयास शुरू किया गया है। भारत सरकार के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान नई दिल्ली द्वारा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में बाल कल्याण समिति के अध्यक्षों और सदस्यों के लिए 13 दिवसीय आवासीय मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर का यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 4 बैचों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 134 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
जनसंपर्क अधिकारी बिंदु सुनील ने शुक्रवार काे जानकारी देते हुए बताया कि इस शृंखला के प्रथम बैच का प्रशिक्षण 01 जून 2026 से हो चुका है, जिसमें कुल 36 प्रतिभागी अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज करा रहे हैं। इसके बाद द्वितीय बैच का आयोजन 29 जून से 11 जुलाई तक किया जाएगा जिसमें 33 प्रतिभागी शामिल होंगे। तृतीय बैच 20 जुलाई से 01 अगस्त तक आयोजित होगा जिसमें 33 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे, तथा चतुर्थ एवं अंतिम बैच 05 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा जिसमें 32 प्रतिभागी शामिल होंगे। नई दिल्ली संस्थान की उपसंचालक एवं कोर्स डायरेक्टर नवीदा खातून की देखरेख में विशेषज्ञ ट्रेनर्स इस पूरे प्रशिक्षण की कमान संभाल रहे हैं।
प्रथम बैच में मध्य प्रदेश के अनूपपुर, अशोकनगर, बड़वानी, भोपाल, बुरहानपुर, दमोह, दतिया, देवास, डिंडौरी, गुना, हरदा, नर्मदापुरम, इंदौर, खंडवा, मंडला, बालाघाट, रायसेन, सीहोर और विदिशा जिले की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य शामिल हुए हैं। 13 दिनों के इस गहन आवासीय प्रशिक्षण में इन सभी प्रतिभागियों को बाल अधिकारिता और उनकी सुरक्षा से जुड़े कानूनी व व्यावहारिक पहलुओं पर पारंगत किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मिशन वात्सल्य योजना' के जमीनी क्रियान्वयन, संवैधानिक ढांचे, बाल अधिकारिता एवं संरक्षण के प्रावधानों और संकटग्रस्त बच्चों की पहचान के लिए वल्नरेबिलिटी मैपिंग पर विस्तार से जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही बच्चों से संबंधित विभिन्न सरकारी नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों सहित किशोर न्याय अधिनियम और दत्तक ग्रहण अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण सत्र में सीएआरए की सीईओ भावना सक्सेना ने कहा कि इस तरह के गहन प्रशिक्षण से बाल कल्याण समितियों के पदाधिकारी बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर अधिक संवेदनशील और कानूनी रूप से सुदृढ़ निर्णय ले सकेंगे, जो राज्य में बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

