बड़वानीः आजीविका मिशन की समूह महिलाओं ने तैयार की गोबर एवं मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं

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बड़वानीः आजीविका मिशन की समूह महिलाओं ने तैयार की गोबर एवं मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं


बड़वानी, 14 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला बड़वानी से जुड़ी स्व.सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गाय के गोबर एवं प्राकृतिक मिट्टी से भगवान श्री गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं तैयार की गई हैं।

जनसम्पर्क अधिकारी प्रियंका रानी ने सोमवार को बताया कि समूह की महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गाय के गोबर और प्राकृतिक मिट्टी का उपयोग करते हुए गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया। इन प्रतिमाओं को आकर्षक एवं पारंपरिक रूप देने के लिए प्राकृतिक सामग्री और रंगों का उपयोग किया गया है।

गोबर की गणेश प्रतिमा का महत्व

गाय के गोबर से बनी गणेश प्रतिमा पर्यावरण के अनुकूल होती है। विसर्जन के बाद यह प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाती है तथा इससे जल प्रदूषण की समस्या अपेक्षाकृत कम होती है। गोबर का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

मिट्टी की गणेश प्रतिमा क्यों उपयोगी

प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा भी पर्यावरण.अनुकूल विकल्प है। ऐसी प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुलकर मिट्टी में वापस मिल सकती हैं। इसके विपरीत प्लास्टर ऑफ पेरिस एवं रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाओं के विसर्जन से जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमाओं को अपनाना स्वच्छ एवं हरित गणेशोत्सव की दिशा में एक बेहतर पहल है।

महिलाओं को मिल रहा रोजगार एवं स्वावलंबन का अवसर

मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व.सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गणेश प्रतिमाओं का निर्माण केवल धार्मिक एवं पर्यावरणीय पहल ही नहीं, बल्कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण का भी उदाहरण है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से उत्पाद तैयार कर महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत करने के साथ.साथ अपनी कला एवं हुनर को बाजार तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इस पहल के माध्यम से आस्था भी, आजीविका भी और पर्यावरण संरक्षण भी, का संदेश दिया जा रहा है। गणेशोत्सव के दौरान प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमाओं को अपनाकर आमजन भी पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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