बड़वानी में समान नागरिक संहिता पर मंथन, नागरिकों से 15 जून तक मांगे गए सुझाव

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बड़वानी में समान नागरिक संहिता पर मंथन, नागरिकों से 15 जून तक मांगे गए सुझाव


बड़वानी, 06 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर नागरिकों के सुझाव और विचार जुटाने के उद्देश्य से गठित उच्च स्तरीय समिति की जिला स्तरीय बैठक शनिवार को बड़वानी में आयोजित की गई। पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित इस बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक में समिति की सदस्य डॉ. शोभा पैठनकर ने समान नागरिक संहिता की अवधारणा, इसके संभावित स्वरूप, विभिन्न राज्यों के अनुभवों और सामाजिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने महिलाओं के अधिकार, सामाजिक न्याय, पारिवारिक कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ संवाद किया।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य, अधिवक्ता, शांति समिति के प्रतिनिधि, छात्र संगठन, शिक्षाविद, मीडिया प्रतिनिधि और विभिन्न समुदायों के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने यूसीसी से जुड़े अपने विचार और सुझाव समिति के समक्ष रखे।

डॉ. पैठनकर ने कहा कि भारत की पहचान उसकी अनेकता में एकता की परंपरा है और किसी भी महत्वपूर्ण नीति पर निर्णय लेने से पहले समाज के सभी वर्गों की राय जानना आवश्यक है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गांव-गांव जाकर इस विषय पर चर्चा करने और अधिक से अधिक लोगों को सुझाव देने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार चाहती है कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित हो, ताकि नागरिकों के विचारों के आधार पर संतुलित और पारदर्शी प्रस्ताव तैयार किया जा सके।

समिति ने नागरिकों से 15 जून 2026 तक अपने सुझाव ऑनलाइन भेजने की अपील की है। इसके लिए राज्य सरकार ने एक विशेष पोर्टल और ईमेल व्यवस्था उपलब्ध कराई है, जहां आमजन अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रदेशभर में समिति के सदस्य विभिन्न जिलों में पहुंचकर सीधे नागरिकों से संवाद कर रहे हैं और प्राप्त सुझावों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / Rajesh Rathore

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