मप्र विधानसभा: ट्रैक्टर लेकर पहुंचे विधायक को गेट पर रोका, हंगामा; कांग्रेस का वॉकआउट

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मप्र विधानसभा: ट्रैक्टर लेकर पहुंचे विधायक को गेट पर रोका, हंगामा; कांग्रेस का वॉकआउट


भाेपाल, 27 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। महिला आरक्षण के मुद्दे पर असहमति जताते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं, सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विधानसभा पहुंच गए, जिन्हें पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक लिया। इस दौरान पुलिस और विधायक के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ विधानसभा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। उनका कहना था कि उन्होंने इसके लिए पास बनवाया था, लेकिन पुलिस ने मंत्रालय के पास यह कहते हुए रोक दिया कि ट्रैक्टर को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। इस बात पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और झूमाझटकी हुई। बाद में शाह गेहूं की बालियां लेकर सदन पहुंचे और किसानों के मुद्दे उठाए।

सदन में ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम के तहत महिलाओं को 33% आरक्षण देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा परिसीमन के आधार पर आरक्षण लागू करने का संकल्प पेश किया गया। कांग्रेस विधायकों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि महिलाओं को अधिकार देने के लिए परिसीमन का इंतजार करना जरूरी नहीं है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण को टाल रही है और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

श्रद्धांजलि के साथ सत्र की शुरुआत

सत्र की शुरुआत में दिवंगत जनप्रतिनिधियों और विख्यात गायिका आशा भोंसले को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री सहित अन्य सदस्य शामिल हुए।

कांग्रेस का वॉकआउट

विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति कर रही है। कांग्रेस विधायक नितेंद्र सिंह राठौर और झूमा सोलंकी समेत अन्य सदस्यों ने मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू करने की मांग की। विरोध दर्ज कराते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस विधायक नितेंद्र सिंह राठौर ने वॉकआउट को लेकर कहा कि बीजेपी महिलाओं की बात तो करती है, लेकिन जब आरक्षण लागू करने की बात आती है तो उसे परिसीमन के बाद लागू करने की बात कहती है। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को अधिकार देना ही है, तो परिसीमन का इंतजार क्यों किया जाए, इसे अभी से लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस पार्टी इसी मांग को रखती है। राठौर ने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर दिखावा और नौटंकी नहीं होनी चाहिए, इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट किया।

मौजूदा सीटों पर तुरंत आरक्षण लागू करें: कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी

कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने कहा कि वर्तमान सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए, ताकि वे अपनी भागीदारी निभा सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह फैसलों को टालना महिलाओं के साथ न्याय नहीं है। उन्होंने मांग की कि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी “कोटे के भीतर कोटा” का प्रावधान किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि सशक्त नारी से ही सशक्त परिवार और देश बनता है। कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम में यह स्पष्ट है कि इसे परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संसद में बिल तो लाती है, लेकिन एक शर्त जोड़कर महिलाओं को पीछे कर देती है, जिससे उसकी नीयत साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि अगर बहनों-बेटियों को आगे बढ़ाना है तो उन्हें भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए और सत्ता में बने रहने के लिए ऐसी रणनीति नहीं अपनानी चाहिए।

सत्ता पक्ष का जवाब

सत्ता पक्ष ने कहा कि आरक्षण परिसीमन और जनसंख्या के संतुलन के आधार पर ही लागू किया जाना उचित होगा। मंत्री कृष्णा गौर ने विपक्ष पर महिलाओं की उम्मीदें तोड़ने का आरोप लगाया। उन्हाेंने कहा कि सदन में बिल गिरने से देश की महिलाओं को बड़ा झटका लगा है। महिलाओं को उम्मीद थी कि उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं को पंख मिलेंगे, लेकिन कांग्रेस और विपक्ष ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। कृष्णा गौर के भाषण पर कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इतना अच्छा भाषण देती हैं, इन्हें सीएम मोहन यादव की जगह बैठा देना चाहिए। जबकि संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष के विरोध को राजनीतिक बताया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आज मोहिनी एकादशी है, और इस संकल्प का विरोध करने वाले भस्मासुर की तरह भस्म हो जाएंगे।

मतभेदों को भुलाकर परिसीमन लागू करना जरूरी: हेमंत खंडेलवाल

भाजपा विधायक और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सभी मतभेदों को भुलाकर परिसीमन लागू करना जरूरी है, ताकि सही आबादी के आधार पर संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम आरक्षण के साथ-साथ परिसीमन और बढ़ी हुई सीटों के आधार पर ही लागू होगा। तभी देश के हर मतदाता के साथ न्याय संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम किसी का हक छीनने वाला नहीं, बल्कि अधिकार देने वाला संशोधन है। उन्होंने परिसीमन पर भी पक्ष रखते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के अनुसार सीटों का पुनर्गठन जरूरी है, तभी सही प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। 1971 के बाद परिसीमन रुकने से जनसंख्या बढ़ी, लेकिन सीटें नहीं बढ़ीं, जिससे असंतुलन पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि संसद की सीटें बढ़ेंगी तो प्रतिनिधित्व बेहतर होगा, जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा संपर्क मजबूत होगा और लोकतंत्र और अधिक प्रभावी बनेगा।

मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी पर भी सवाल

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इतने गंभीर विषय पर चर्चा चल रही है, लेकिन मुख्यमंत्री सदन में मौजूद नहीं हैं। इस पर सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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