मप्र : तबादलों में करोड़ों के लेनदेन का आरोप, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
भाेपाल, 20 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर प्रदेश में बड़े पैमाने पर कथित तबादला उद्योग संचालित किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने के दौरान चले तबादला अभियान ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जीतू पटवारी ने शनिवार काे बयान जारी कर आरोप लगाया कि प्रदेश में तबादलों की प्रक्रिया प्रशासनिक आवश्यकता के बजाय आर्थिक लेनदेन से प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, विभिन्न विभागों में पदस्थापना और तबादलों के लिए कथित रूप से तय दरों पर लेनदेन किया जा रहा है तथा पूरी व्यवस्था दलालों, बिचौलियों और कुछ अधिकारियों के प्रभाव में संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं और आज पुनः दोहरा रहे हैं कि प्रदेश में तबादलों को एक संगठित व्यवस्था का रूप दे दिया गया है। उनका दावा है कि अधिकारी, कर्मचारी और संविदाकर्मी तक इस व्यवस्था से प्रभावित हैं तथा विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग स्तर पर कथित आर्थिक मांगें की जा रही हैं।
पटवारी ने हाल में सामने आए एक स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए कहा कि उसमें विभिन्न विभागों से जुड़े कुछ व्यक्तियों द्वारा तबादलों के बदले धनराशि मांगे जाने के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो तबादला प्रक्रिया से जुड़े गंभीर तथ्य उजागर हो सकते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि जांच के दौरान कई मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों से संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आई है। उनके अनुसार, यदि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो तो प्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े कथित तबादला घोटालों में से एक का खुलासा हो सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में कर्मचारियों और अधिकारियों को मनचाही पदस्थापना के लिए भारी रकम खर्च करनी पड़ रही है। विभिन्न स्तरों के तबादलों के लिए लाखों रुपये तक की मांग किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। पटवारी ने हाल ही में पटवारियों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों और बाद में उन्हें निरस्त किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटनाक्रम ने सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि तबादले प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर किए गए थे तो उन्हें इतनी जल्दी वापस क्यों लिया गया, और यदि निर्णय त्रुटिपूर्ण थे तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। उनका आरोप है कि प्रदेश में विकास, रोजगार और किसान हितों से जुड़े मुद्दों की अपेक्षा तबादला प्रक्रिया अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि तबादलों से जुड़े सभी आदेशों, अनुशंसाओं तथा संभावित वित्तीय लेनदेन की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और तब तक संघर्ष जारी रखेगी, जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस मुद्दे पर अपना निर्णय देगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

