मप्र रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026: प्रशासन और विकास में एआई की भूमिका पर हुआ मंथन

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मप्र रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026: प्रशासन और विकास में एआई की भूमिका पर हुआ मंथन


- नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग और स्टार्टअप ने एआई आधारित नवाचार किए साझा

भोपाल, 16 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 में शुक्रवार को एआई को प्रशासन, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के प्रभावी एवं परिवर्तनकारी माध्यम के रूप में स्थापित करने पर व्यापक मंथन हुआ। कॉन्फ्रेंस में नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग और स्टार्टअप प्रतिनिधि शामिल हुए।

कॉन्फ्रेंस के ‘इंडिया एआई सत्र’ में इंडिया एआई की शिखा दहिया ने कहा कि इंडिया एआई मिशन भारत को राष्ट्रीय स्तर की एआई अवसंरचना विकसित करने की दिशा में अग्रसर कर रहा है। उन्होंने बताया कि वैश्विक एआई रैंकिंग-2025 में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एआई को उत्पादकता बढ़ाने तथा देश की आईटी प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभांश और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग के लिए रणनीतिक साधन के रूप में अपनाया गया है। स्वदेशी डेटासेट्स, भारतीय भाषाओं पर आधारित फाउंडेशन मॉडल्स, सब्सिडी आधारित कंप्यूटर अवसंरचना और सुरक्षित व भरोसेमंद एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क इंडिया एआई की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

एआई कोश और जीपीयू अवसंरचना से स्टार्टअप को बढ़ावा

इंडिया एआई मिशन के अर्जुन कार्तिकेयन ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट्स प्रभावी एआई प्रणालियों की नींव होते हैं। ‘एआई कोश’ प्लेटफॉर्म पर 6,250 से अधिक स्वदेशी क्यूरेटेड डेटासेट्स उपलब्ध हैं, जिनके साथ सैंडबॉक्स टूल्स और निःशुल्क कंप्यूटर एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 38 हजार जीपीयू सब्सिडाइज्ड दरों पर परिचालन में लाए गए हैं। इससे बड़े पैमाने पर एआई नवाचार को गति मिली है। 'इनोवेशन सेंटर' के माध्यम से 12 स्टार्टअप को स्वदेशी एलएलएम और एसएलएम विकसित करने में सहयोग दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के प्रभावी उदाहरण

केआरएआई डायग्नोस्टिक्स की डॉ. जान्हवी ने छाती के एक्स-रे के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग के लिए एआई आधारित समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि इंडिया एआई के सहयोग से यह तकनीक 105 से अधिक देशों में लागू हो चुकी है और इसे एफडीए की स्वीकृति भी प्राप्त है। कंवर्ज इन (नोकोबा) के आर्यन ने सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण प्रणालियों में एआई एजेंट्स के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि व्हाट्सएप आधारित संवाद प्रणाली, शत-प्रतिशत कॉल ऑडिटिंग और एसओपी अनुपालन से परिचालन लागत घटी है और नागरिक संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

एआई प्रतिभा निर्माण पर विशेष जोर

इंडिया एआई मिशन के फ्यूचर स्किल्स प्रमुख कार्तिक सूरी ने बताया कि “एआई फॉर ऑल” कार्यक्रम के तहत उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम, फेलोशिप्स और देशभर में 570 एआई एवं डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटर एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है।

शासन में जीआईएस और एआई का एकीकृत उपयोग

कॉन्फ्रेंस में एमपीएसईडीसी के कार्यपालक निदेशक संदीप गोयल ने बताया कि ‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टम’ के माध्यम से जमीनी स्तर पर योजना और निगरानी को सशक्त किया जा रहा है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के एकीकृत उपयोग से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में पारदर्शिता लाई जा रही है। शासन में एआई के सर्वोत्तम प्रयोगों पर चर्चा के दौरान माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, गूगल, पीडब्ल्यूसी और ऑरेकल के प्रतिनिधियों ने स्मार्ट सिटी, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, नागरिक सेवाओं और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना से जुड़े अनुभव साझा किए।

थीमैटिक सत्रों में समावेशी, सतत और भरोसेमंद एआई पर विस्तृत विमर्श

सभी के लिए प्रौद्योगिकी आधारित शासन’ थीमैटिक सत्र की अध्यक्षता भुवनेश कुमार, अध्यक्ष एवं सीईओ, यूआईडीएआई ने की। सत्र में बताया गया कि भारत प्रारंभिक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। आधार, यूपीआई, कोविन, डिजिलॉकर, भाषिणी और ओएनडीसी को इस परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बताया गया। सत्र में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के एकीकरण से स्वास्थ्य जांच, बहुभाषी सेवा वितरण और निर्णय समर्थन प्रणालियों में शासन की दक्षता कई गुना बढ़ती है। भाषाई समावेशन को डिजिटल समानता का आधार बताते हुए एकीकृत बैकएंड प्लेटफॉर्म्स, क्षमता निर्माण और नेतृत्व-आधारित परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण के लिए एआई

थीमैटिक सत्र में एआई को उत्पादकता वृद्धि, रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बताया गया। वक्ताओं ने बताया कि एआई को केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित और सामाजिक प्रभाव आधारित दृष्टिकोण के साथ अपनाया जाना चाहिए।

कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण और सलाह प्रणालियों को किसानों की निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाने वाला तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स को रोग पहचान में तेजी लाने वाला प्रभावी उपकरण बताया गया। एमएसएमई और टियर-2 व टियर-3 क्षेत्रों में एआई विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा प्लेटफॉर्म और उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया गया।

लचीलापन, नवाचार एवं डिजिटल अवसंरचना

इस थीमैटिक सत्र में सुरक्षित, लचीली और भविष्य-तैयार डिजिटल एवं एआई अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि एआई अब आकांक्षात्मक तकनीक नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा वितरण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल शासन की मूल आवश्यकता बन चुकी है। सॉवरेन डेटा और कंप्यूटर अवसंरचना के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्वदेशी हार्डवेयर, सुरक्षित डेटा सेंटर और मजबूत सप्लाई चेन को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता बताई गई। सत्र में सहमति बनी कि गोपनीयता, अनुपालन, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में अंतर्निहित किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने माना कि भरोसेमंद और सुरक्षित एआई अवसंरचना भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी है।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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