ई-संजीवनी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण व अधोसंरचना की कमियों को प्राथमिकता से करें दूर : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

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ई-संजीवनी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण व अधोसंरचना की कमियों को प्राथमिकता से करें दूर : उप मुख्यमंत्री शुक्ल


- उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की ई-संजीवनी के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा

भोपाल, 30 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने शुक्रवार को भोपाल स्थित निवास कार्यालय में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश में टेलीमेडिसिन सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और मरीजों को समय पर उचित परामर्श उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ई-संजीवनी के माध्यम से नागरिकों को सहज, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यक अधोसंरचना, इंटरनेट कनेक्टिविटी, विद्युत आपूर्ति एवं उपकरणों की उपलब्धता के साथ स्वास्थ्यकर्मियों का समुचित प्रशिक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने इन कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने तथा सेवाओं के संचालन में आने वाली बाधाओं का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।

टेलीमेडिसिन सेवाओं की नियमितता एवं सक्रियता पर विशेष ध्यान

समीक्षा में अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि में ई-संजीवनी के माध्यम से दर्ज 59,914 सामान्य परामर्श कॉल तथा 10,890 विशेषज्ञ परामर्श कॉल की जानकारी प्रस्तुत की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेलीमेडिसिन सेवाओं के उपयोग में वृद्धि के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं को सक्रिय करने, चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्धारित समय-सारणी के अनुसार परामर्श सेवाओं का संचालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन केंद्रों पर चिकित्सकों की उपलब्धता और परामर्श सेवाओं की नियमितता सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को सेवा प्राप्त करने के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े। इसके साथ ही, सेवाओं के संचालन एवं प्रगति की नियमित निगरानी कर निष्क्रिय केंद्रों को पुनः सक्रिय करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।

अधोसंरचना एवं प्रशिक्षण की कमियों का प्राथमिकता से निराकरण

समीक्षा के दौरान अगस्त-सितंबर 2025 में किए गए सुविधा तत्परता आकलन (फैसिलिटी रेडीनेस असेसमेंट) के निष्कर्षों पर भी चर्चा की गई। आंकलन में इंटरनेट कनेक्टिविटी, विद्युत आपूर्ति एवं प्रशिक्षण से संबंधित कमियां प्रमुखता से सामने आईं। कुल 2,723 उप स्वास्थ्य केंद्र ऐसे चिन्हित किए गए, जहां केवल एक मूलभूत सुविधा की कमी है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इन केंद्रों में आवश्यक सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि कम समय में अधिक केंद्रों को ई-संजीवनी सेवाओं के लिए तैयार किया जा सके।उन्होंने निर्देश दिए कि जिन संस्थाओं में इंटरनेट, बिजली, उपकरण अथवा प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी के कारण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, उनकी अलग-अलग पहचान कर निराकरण की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श से वंचित न रहना पड़े।

चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों का क्षमता संवर्धन

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ई-संजीवनी की सफलता के लिए तकनीकी सुविधाओं के साथ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षित होना भी आवश्यक है। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) तथा मेडिकल ऑफिसर्स को ई-संजीवनी की प्रक्रिया, तकनीकी संचालन और विशेषज्ञ परामर्श के लिए मरीजों को उचित रूप से संदर्भित करने संबंधी नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने बॉन्डेड चिकित्सकों को भी ई-संजीवनी की उपयोगिता एवं संचालन प्रक्रिया के प्रति संवेदनशील बनाने के निर्देश दिए। चिकित्सकों को इस व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श मिल सके। उन्होंने कहा कि सामान्य स्तर पर उपचार के साथ जहां विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक हो, वहां ई-संजीवनी के माध्यम से परामर्श प्राप्त करने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जाए।

जन-जागरूकता से बढ़ेगा ई-संजीवनी पर विश्वास

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ई-संजीवनी सेवाओं के प्रति आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को यह जानकारी दी जाए कि वे अपने निकटतम स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और मैदानी अमले को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि मरीजों को ई-संजीवनी के माध्यम से मिलने वाले परामर्श की उपयोगिता, प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में सही जानकारी दी जाए। मरीजों को गुणवत्तापूर्ण परामर्श एवं उचित मार्गदर्शन मिलने से इस सेवा के प्रति विश्वास बढ़ेगा और अधिक नागरिक इसका लाभ उठा सकेंगे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सेवाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करने, प्राथमिकता वाले जिलों में कमियों का निराकरण करने तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी का उद्देश्य केवल तकनीक उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से नागरिकों को वास्तविक, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि ई-संजीवनी को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का प्रभावी हिस्सा बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम समन्वित रूप से उठाए जाएं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा सुलभ हो सके। बैठक में डॉ. हिमांशु जायसवार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

Livevns.news Desk
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