अनूपपुर: संतान प्राप्ति और सुख समृद्धि की कामना कर माताओं ने की भगवान शिव और माता गौरी की पूजा, रखा व्रत

WhatsApp Channel Join Now
अनूपपुर: संतान प्राप्ति और सुख समृद्धि की कामना कर माताओं ने की भगवान शिव और माता गौरी की पूजा, रखा व्रत


अनूपपुर: संतान प्राप्ति और सुख समृद्धि की कामना कर माताओं ने की भगवान शिव और माता गौरी की पूजा, रखा व्रत


अनूपपुर, 18 सितंबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में संतान सप्तमी का व्रत दो दिन गुरूवार और शुक्रवार को मनाया गया। सप्तमी तिथि दो दिन रहने और उदया तिथि के अंतर के कारण गुरुवार से व्रत की शुरुआत हुई, जबकि 18 सितंबर शुक्रवार को मुख्य पूजा की गई। जिलेभर में महिलाओं ने संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की।

संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य कामना एवं खुशहाली के लिए माताओं ने सप्तमी का पर्व श्रद्घा-भक्ति के साथ जिले भर में मनाया गया। विधान परंपरा के अनुसार संतान सुख के लिए गणपति,कार्तिक और गौरा-पार्वती की पूजा पाठ की एवं प्रसाद स्वरूप मीठे पुआ-पकवान सात भाग में अर्पित किए तथा चांदी के चूड़ों का अर्पण कर गौरा देवी से संतान की रक्षा का वर मांगा। पवित्र नगरी अमरकंटक में संतान सप्तमी पर महिलाओं ने मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर पूजा-अर्चना की। सुबह से ही महिलाएं नर्मदा नदी में स्नान करने पहुंचीं। इसके बाद परिवार और संतान के सुखी जीवन के लिए प्रार्थना की।

भारतीय सनातन परंपरा में भाद्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी को माताएं अपने बच्चों की लम्बी आयु एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए उपवास रह कर पूजा पाठ करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान रक्षा और संतान की उन्नति के लिए किया जाता है। व्रत में भगवान शिव और माता गौरी की पूजा का विधान है। सप्तमी का व्रत विशेष महत्व रखता हैं। सुबह से ही माताओं ने स्नान कर व्रत की तैयारी की। माताओं ने भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा अर्चना कर व्रत किया। निराहार व्रत रह कर संतान की रक्षा की कामना करते हुए खीर पूड़ी तथा गुड़ के पुए बनाए। भोलेनाथ को कलावा अर्पित कराकर स्वयं धारण किया और इस व्रत की कथा सुनी। माताओं ने अपने बच्चों की सुख समृद्घि के लिए ईश्वर से कामना की।

मान्यता है कि संतान सप्तमी का व्रत लोमष ऋषि के कहने पर देवकी मइया ने किया था। इसके प्रभाव से स्वयं भगवान कृष्ण ने उनके गर्भ से जन्म लिया स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी इस व्रत का रहस्य धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था।

दो दिन रही सप्तमी तिथि

राम जानकी मंदिर अनूपपुर के पुजारी पंडित नरेंद्र तिवारी ने बताया कि हिंदू पंचांग में तिथि के घटना-बढ़ने और सूर्योदय के समय मौजूद तिथि के आधार पर व्रत-त्योहार की तारीख तय होती है। 17 सितंबर को सुबह 10.49 बजे सप्तमी तिथि शुरू हुई थी, जो 18 सितंबर को दोपहर 1.01 बजे समाप्त हुई।

उदया तिथि के कारण 18 को मुख्य पूजा

पंडित तिवारी के अनुसार, अधिकांश व्रत और त्योहार उदया तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। 18 सितंबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि मौजूद थी। साथ ही मध्याह्न में पूजा का मुख्य मुहूर्त भी इसी दिन मिला। इसलिए संतान सप्तमी का मुख्य व्रत और पूजा 18 सितंबर को की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

Share this story