अनूपपुर: मां नर्मदा से मिलने अमरकंटक आती हैं मां गंगा, स्नान, दान और साधना का महापर्व

WhatsApp Channel Join Now
अनूपपुर: मां नर्मदा से मिलने अमरकंटक आती हैं मां गंगा, स्नान, दान और साधना का महापर्व


अनूपपुर, 25 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मां नर्मदा उद्वगम स्थ लि अमरकंटक में गंगा दशहरा के दिन मां गंगा मां नर्मदा से मिलने अमरकंटक आती हैं। श्रद्धालु इस दिवस को नदियों के दिव्य मिलन, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा के उत्सव के रूप में देखते हैं।

भारतीय सनातन परंपरा में व्रत, पर्व और उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, लोककल्याण और प्रकृति के प्रति श्रद्धा के प्रतीक माने गए हैं। इन्हीं पावन पर्वों में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पर्व है गंगा दशहरा, जिसे धर्मग्रंथों में पुण्य, पापक्षालन और आध्यात्मिक उन्नति का महापर्व कहा गया है। इस वर्ष गंगा दशहरा विशेष संयोग के साथ ज्येष्ठ अधिक मास में पड़ रहा है, जिससे इसकी आध्यात्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी के अनुसार शास्त्रों में वर्णित है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि, हस्त नक्षत्र तथा शुभ कालखंड में मां गंगा का पृथ्वी लोक में अवतरण हुआ था। इसी कारण यह तिथि गंगा दशहरा के रूप में विख्यात हुई। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान, जप, तप और उपासना से जीवन के विविध दोषों और पापों का क्षय होता है तथा शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

शास्त्रीय मान्यता के अनुसार गंगा दशहरा पर दस विशेष शुभ योगों का संयोग बनने पर इसका पुण्य अनेक गुना बढ़ जाता है। इन योगों को दस प्रकार के पापों का नाश करने वाला माना गया है। धार्मिक परंपरा में कहा गया है कि यह पर्व मनुष्य के तीन प्रकार के कायिक, चार प्रकार के वाचिक और तीन प्रकार के मानसिक पापों के शमन का माध्यम बनता है।

गंगा दशहरा पर दशविधि स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इसमें दूध, दही, भस्म, मृतिका, गोमूत्र, सर्वौषधि, कुशोदक, गाय का घी, स्वर्ण स्पर्शित जल एवं पवित्र जल से स्नान का विधान वर्णित है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह स्नान शरीर और आत्मा दोनों को पवित्र करता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी के अनुसार इस दिन गंगा, नर्मदा सहित पवित्र नदियों में स्नान कर वस्त्र दान, जप, तप, उपवास और ईश्वर आराधना करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। स्नान के उपरांत शिवलिंग पर गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य एवं फल अर्पित कर पूजन तथा रात्रि जागरण करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

पवित्र नगरी अमरकंटक से जुड़ी एक प्राचीन धार्मिक मान्यता यह भी है कि गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मां गंगा, मां नर्मदा से मिलने अमरकंटक आती हैं। श्रद्धालु इस दिवस को नदियों के दिव्य मिलन, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा के उत्सव के रूप में देखते हैं। इसी कारण अमरकंटक क्षेत्र में गंगा दशहरा का पर्व विशेष श्रद्धा, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल जल की पूजा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में नदियों के प्रति सम्मान, संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी देता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

Share this story