मुरैना: 28 नवजात घडिय़ालों को अंडों से बाहर निकाला गया

मुरैना: 28 नवजात घडिय़ालों को अंडों से बाहर निकाला गया
मुरैना: 28 नवजात घडिय़ालों को अंडों से बाहर निकाला गया


- देवरी घडिय़ाल केंद्र हुआ घडिय़ाल बच्चों का जन्म

- घडिय़ाल केन्द्र में ही साफ पानी के कुण्ड में छोड़ा

मुरैना, 09 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य जो कि पूरे विश्व में घडिय़ालों के लिए अपनी अलग ही पहचान बनाये हुए है। जहां घडिय़ाल हर साल सुरक्षित तरीके से रहकर अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। इसी अभ्यारण्य में स्थित देवरी घडिय़ाल केंद्र में पहले घडिय़ालों को पाला जाता है, इसके बाद चंबल नदी में बड़े होने के बाद छोड़ा जाता है। रविवार को भी घडिय़ालों के कुनबे में इजाफा हुआ है। देवरी घडिय़ाल केंद्र पर रखे गए 28 अंडों से हेचिंग कराई गई है, जिसमें से घडिय़ाल के बच्चे बाहर आ चुके हैं। अब इन घडिय़ालों के बच्चों को तीन साल तक इस देवरी केंद्र में बने कृत्रिम आवासों में रखा जाएगा। जिसके बाद इन्हें चंबल नदी के प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाएगा।

बता दें कि देवरी घडिय़ाल केंद्र पर हर साल 200 अंडों को चंबल किनारे से घडिय़ालों के घोंसलों से इक_ा करके लाया जाता है। इसके बाद देवरी घडिय़ाल केंद्र में बने रेत के घोंसलों में लगभग 20 दिन तक रखा जाता है। इस बार भी 200 अंडे लाए गए थे, जिनमें से 28 अंडों की रविवार को वन विभाग के अधिकारियों ने हेचिंग कराई है। वन विभाग के एसडीओ भूरा गायकवाड़ ने बताया कि देवरी घडिय़ाल केंद्र पर 95 फीसदी तक सुरक्षित तरीके से हेचिंग हो जाती है। यह अंडे 40 दिनों तक अपने प्राकृतिक घोंसले में ही रहते है। जिससे उनमें बच्चे सही विकसित हो सके। इसके बाद अगले बीस दिनों तक देवरी घडिय़ाल केंद्र पर रखे जाते हैं। विशेषज्ञों की निगरानी में हेचिंग कराई गई है। जिसमें सभी अंडों से बच्चे बाहर आ चुके हैं। अब इन बच्चों को 15 दिनों तक क्वारंटीन कर रखा जाएगा। इसके बाद अन्य पुलों में शिफ्ट किया जाएगा। लगभग तीन साल तक देवरी घडिय़ाल केंद्र पर ही रखे जाएंगें, इसके बाद चंबल नदी में उनके रहवास में छोड़ दिया जाएगा।

देवरी घडिय़ाल केंद्र में अंडों से निकलने के बाद इन बच्चों को 15 दिन के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा। बच्चों के अंडे से निकलते ही एक केमिकल में इनको नहलाया गया था, इसके बाद क्वारंटीन पूल में छोड़ा गया है। केमिकल में नहलाने की वजह है कि किसी तरह का संक्रमण इन बच्चों को नहीं होता। 15 दिन का भोजन घडिय़ाल के बच्चे के पेट में ही रहता है। इसलिए भोजन देने की भी आवश्यकता नहीं होती। यह भोजन खत्म हो जाएगा तब इन्हें क्वारंटीन पूल से निकालकर दूसरे पूल में रखा जाएगा। देवरी घडिय़ाल केंद्र के एसडीओ भूरा गायकवाड़ ने बताया कि घडिय़ाल के बच्चों को 30 से 35 डिग्री टेम्प्रेचर में ही रखा जाता है। अगर यह तापमान कम या ज्यादा हुआ तो इनका लिंगानुपात बिगड़ जाता है। मतलब या तो सभी बच्चे नर हो जाएंगें या फिर सभी मादा हो जाएंगें। इसलिए तापमान बहुत महत्वपूर्ण है। लिंग का निर्धारण भी इनके अंडे से निकलने के बाद समय के साथ होता है। देवरी घडिय़ाल केंद्र पर अभी तक 180 अंडों की इस साल हेचिंग कराई जा चुकी हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/शरद/मुकेश

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