सागर: दक्षिण वनमंडल में 82 से अधिक जलीय पक्षी प्रजातियों की पहचान
सागर, 6 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित दक्षिण वनमंडल में पहली बार एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस 2026 का सफल आयोजन किया गया। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत झीलों, तालाबों, नदियों एवं अन्य जल स्रोतों में पाए जाने वाले जलीय पक्षियों की वैज्ञानिक गणना की जाती है।
इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य जलीय पक्षियों की संख्या, उनकी प्रजातीय विविधता तथा जल स्थलों की पारिस्थितिक स्थिति का आकलन करना है, ताकि भविष्य में जलीय पक्षियों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के लिए ठोस वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराया जा सके।
एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस 2026 के अंतर्गत वनमंडल दक्षिण सागर क्षेत्र के कुल 09 प्रमुख तालाबों का 3 एवं 04 जनवरी 2026 को सर्वेक्षण किया गया। इस कार्य में 04 सर्वेक्षण दलों के साथ वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल रहे।
सर्वेक्षण के दौरान दलों ने जलाशयों के किनारे पहुंचकर जलीय पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों, उनकी संख्या, गतिविधियों तथा प्राकृतिक आवास की स्थिति का सूक्ष्म अवलोकन कर आंकड़े एकत्रित किए।
82 से अधिक जलीय पक्षी प्रजातियों की पहचान
सर्वेक्षण के दौरान दक्षिण वनमंडल सागर क्षेत्र में लगभग 82 विभिन्न जलीय पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है।
इसके साथ ही कई दुर्लभ एवं प्रवासी एशियाई जलीय पक्षियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई, जिनमें प्रमुख रूप से
रिवर टर्न
रूडी शेल डक
लिटिल रिंग्ड प्लोवर
साइबेरियन स्टोन चेट
बुलीनेक स्टॉर्क
ब्लैक रेडस्टार्ट
रेड नेप्ड आईबिस
ब्लैक हेडेड आईबिस, शामिल हैं।
संरक्षण की दिशा में अहम कदम
वन अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के सर्वेक्षण न केवल जैव विविधता की स्थिति को समझने में सहायक होते हैं, बल्कि जल स्रोतों की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने और जलीय पक्षियों के संरक्षण हेतु प्रभावी योजनाएं बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दक्षिण वनमंडल सागर में पहली बार आयोजित यह एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और अधिक मजबूत करेगी।
हिन्दुस्थान समाचार/मनीष कुमार चौबे
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

