पन्ना कुआं हादसे में नया खुलासा: हादसे से पहले सीएम हेल्पलाइन में हुई थी शिकायत, अनदेखी पर उठे सवाल

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पन्ना कुआं हादसे में नया खुलासा: हादसे से पहले सीएम हेल्पलाइन में हुई थी शिकायत, अनदेखी पर उठे सवाल


पन्ना, 17 जून (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के ग्राम बीहरपुरवा में निर्माणाधीन कुएं के धंसने से पांच मजदूरों की मौत के मामले में एक नया और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जांच के दौरान दावा किया गया है कि हादसे से कई दिन पहले ही कुएं के निर्माण में हो रही अनियमितताओं की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई थी, लेकिन उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच दल के समक्ष सुनवाई के दौरान गांव के एक साक्षी ने बताया कि ग्राम बीहरपुरवा निवासी शिवप्रसाद अहिरवार ने मई माह में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर कुएं के निर्माण कार्य में बरती जा रही अनियमितताओं की जानकारी दी थी। शिकायत में आवश्यक कार्रवाई की मांग भी की गई थी।

इस खुलासे के बाद अजयगढ़ एसडीएम संजय नागवंशी द्वारा 5 जून को जनपद पंचायत अजयगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई। पत्र में पूछा गया कि संबंधित व्यक्ति या किसी अन्य द्वारा ऐसी कोई शिकायत दर्ज कराई गई थी या नहीं, यदि शिकायत हुई थी तो उसका निराकरण किस प्रकार किया गया। साथ ही शिकायत की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

एसडीएम संजय नागवंशी ने बताया कि इस संबंध में जनपद पंचायत अजयगढ़ के सीईओ को पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। इससे मामले में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

यदि जांच में यह साबित होता है कि हादसे से पहले शिकायत दर्ज हुई थी और उसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते शिकायत पर संज्ञान लिया जाता तो संभवतः पांच मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।

26 मई को ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के नयापुरवा में मनरेगा योजना के तहत निर्मल नीर कूप का निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान कुआं धंसने से पांच मजदूरों की मौत हो गई थी। जांच में अब तक कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में भी यही कुआं एक बार धंस चुका था, लेकिन उस घटना को सार्वजनिक नहीं किया गया। दस्तावेजों के अनुसार 2 मई 2025 के बाद कोई नया मस्टर रोल जारी नहीं हुआ, जबकि मौके पर निर्माण कार्य जारी रहने के आरोप हैं। वहीं मजदूरी मद में स्वीकृत राशि का अधिकांश हिस्सा खर्च दर्शाया गया, जबकि निर्माण कार्य अधूरा था।

इन तथ्यों के सामने आने के बाद मामले में वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी भुगतान और प्रशासनिक लापरवाही की आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे

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