मैहरः बाबा उस्ताद अलाउद्दीन खा की जयन्ती पर गूंजी संगीत साधना
मैहर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मैहर में विश्वविख्यात पद्मविभूषण उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की जन्म जयंती पर मंगलवार को मदीना भवन में कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी के निर्देशन में श्रद्धा एवं संगीत साधना का आयोजन किया गया। बाबा साहब की मजार पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुय चादर पोशी की रस्म अदा की गई तत्पश्चात बाबा साहब द्वारा निर्मित नलतरंग का वादन कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
एवं श्रद्धा, सम्मान और संगीत साधना से सराबोर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिला प्रशासन के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम बाबा साहब की मजार पर श्रद्धापूर्वक चादर चढ़ाई गई और फातिहा अदा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके पश्चात बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की महान संगीत परंपरा को समर्पित नलतरंग वादन की मनमोहक प्रस्तुति हुई। नलतरंग के मधुर स्वरों ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित संगीतप्रेमी मंत्रमुग्ध हो उठे। सुरों की इस साधना ने बाबा साहब की उस महान संगीत विरासत की स्मृतियों को जीवंत कर दिया, जिसने मैहर को देश-दुनिया के संगीत मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाई।
कार्यक्रम के दौरान बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब द्वारा स्थापित एवं निर्मित मैहर बैंड की गौरवशाली संगीत परंपरा को भी स्मरण किया गया। उनके योगदान को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने उनकी अमूल्य संगीत विरासत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
नलतरंग वादक सौरव चौरसिया के साथ उत्तम पांडेय, अशोक बड़ौलिया, राम सुमन चौरसिया, गौतम भारती के साथ ही ब्रजेश द्विवेदी, मोहम्मद अहमद खाँ, शशांक श्रीवास्तव, आनंद वर्मा, आनंद श्रीवास्तव, जितेश जैन, जयंत जैन, नसीब खान, अजय नामदेव, ब्रिजेश पांडे, अधिवक्ता मनीष मालवीय (इलाहाबाद) एवं मनोज कुशवाहा (सतना) सहित अनेक कलाकारों एवं संगीतप्रेमियों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम में तहसीलदार लालमणि सतनामी, आरआई लालमन साकेत सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं संगीतप्रेमी उपस्थित रहे।
मैहर की मिट्टी में संगीत नहीं, साधना बसती है
बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की जयंती पर आयोजित यह आयोजन महज श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि मैहर की उस गौरवशाली संगीत परंपरा का जीवंत उत्सव बना, जिसकी नींव बाबा साहब ने अपनी तपस्या और साधना से रखी थी।
मजार पर अदा हुई फातिहा और नलतरंग से गूंजे सुरों ने एक बार फिर संदेश दिया कि मैहर की मिट्टी में संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना, संस्कार और परंपरा है।
बाबा साहब की जयंती पर श्रद्धा और सुरों का यह संगम मैहर की सांस्कृतिक विरासत को नमन करते हुए एक यादगार शाम बन गयी।
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हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

