स्वामी नीलकंठ आश्रम की संपत्तियों के संरक्षण के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग, पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने उठाया मुद्दा
मैहर, 03 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने स्वामी नीलकंठ महाराज आश्रम की परिसंपत्तियों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार से आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि आश्रम की कथित रूप से अरबों रुपये मूल्य की संपत्तियों के संरक्षण और पारदर्शी प्रबंधन के लिए सरकार को ट्रस्ट की व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
सोमवार को जारी बयान में नारायण त्रिपाठी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि आश्रम की संपत्तियों के दीर्घकालीन संरक्षण का विषय उठाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आश्रम की परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में विवाद या दुरुपयोग की आशंका उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने कहा कि स्वामी नीलकंठ महाराज के प्रति लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं और दानदाताओं द्वारा वर्षों से दानस्वरूप दी गई भूमि एवं अन्य परिसंपत्तियां धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग में लाई जाती रही हैं। ऐसे में इन संपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
पूर्व विधायक ने सुझाव दिया कि आश्रम की धार्मिक गतिविधियों और पूजा-अर्चना का संचालन पुजारियों तथा एक सक्षम प्रबंधन समिति के माध्यम से किया जाए, जबकि भूमि एवं अन्य परिसंपत्तियों की खरीद-बिक्री अथवा हस्तांतरण जैसे महत्वपूर्ण मामलों को वैधानिक प्रक्रिया और सरकारी निगरानी के दायरे में रखा जाए। उनके अनुसार इससे आश्रम की मूल भावना सुरक्षित रहेगी और भविष्य में विवाद की संभावनाएं कम होंगी।
नारायण त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस विषय की गंभीरता से समीक्षा कर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने जिला प्रशासन से भी आश्रम की स्थिति और उससे जुड़े तथ्यों से राज्य सरकार को अवगत कराने की अपील की, ताकि आवश्यक होने पर नियमानुसार निर्णय लिया जा सके।
उन्होंने मैहर और आसपास के श्रद्धालुओं से भी आश्रम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाने का आग्रह किया। हालांकि, इस संबंध में आश्रम प्रबंधन अथवा राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

